महाराष्ट्र में NDA और I.N.D.I.A. को टक्कर दे सकता तीसरा मोर्चा, जानें क्या है PVM की तैयारी?

2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्षी दल पूरे देश में इंडिया गठबंधन के दायरे में रहकर बीजेपी और एनडीए सरकार को टक्कर देने की रणनीतियां बना रहे हैं। इस महीने के अंत में इस सिलसिले में उनकी मुंबई में अगली बैठक भी होने वाली है।

लेकिन, महाराष्ट्र की राजनीति में एक अलग खिचड़ी भी पक रही है। यहां एक नया गठबंधन 'प्रगतिक विकास मंच' (पीवीएम) बना है, जो न भाजपा के खेमे वाले गठबंधन में जाना चाहता है और न ही कांग्रेस के साथ वाले किसी गठबंधन में।

third front in maharashtra

महाराष्ट्र में तीसरे मोर्चे की तैयारी
अभी देशव्यापी विपक्षी इंडिया गठबंधन में राज्य की तीन प्रमुख विपक्षी दल शामिल हैं- उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी), शरद पवार के खेमे वाली एनसीपी और कांग्रेस। राज्य में इन तीनों दलों का पहले से ही गठबंधन है, जो महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के नाम से जाना जाता है। लेकिन, पूर्व सांसद राजू शेट्टी के स्वाभिमान पक्ष और जयंत प्रभाकर पाटिल की अगुवाई वाली पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी का गठबंधन 'प्रगतिक विकास मंच' इनसे अलग अन्य छोटे-छोटे दलों को जोड़कर तीसरा मोर्चा बनाना चाहत हैं।

तीसरे मोर्चे में कई छोटे दलों को जोड़ने की कोशिश
राजू शेट्टी ने शनिवार को साफ किया है कि उनका मोर्चा बीजेपी और कांग्रेस का विकल्प बनाना चाहता है। इस कड़ी में वे तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की भारत राष्ट्र समिति से भी संपर्क साधने की कोशिश में हैं। शेट्टी ने ईटी से कहा है, 'हां हम जल्द ही कोल्हापुर में सीपीआई, सीपीएम, समाजवादी पार्टी और बहुजन विकास अघाड़ी जैसी छोटी पार्टियों के साथ बैठक करने जा रहे हैं। दोनों दलों के साथ हमारा खराब अनुभव रहा है, इसलिए हम विकल्प देना चाहते हैं।'

पीवीएम की जिनपर नजर, उनमें से कई 'इंडिया' में शामिल
हालांकि, शेट्टी का मंसूबा पूरा होने पाने में अभी बहुत बड़ा झोल लग रहा है। क्योंकि, वह कोल्हापुर में महाराष्ट्र की जिन छोटी दलों के साथ बैठक करने की बात कह रहे हैं, उनमें से अधिकांश, जैसे-वामपंथी दल और सपा अभी 26 दलों के इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं। ऐसे में अगर राज्य में ये दल महाराष्ट्र के लिए स्टैंड बदलेंगे तो यह राष्ट्रीय राजनीति के लिए एक दिलचस्प मोड़ होगा!

बीआरएस शामिल हुई तो महाराष्ट्र में मजबूत हो सकता है तीसरा मोर्चा
लेकिन, जहां तक बीआरएस की बात है, अगर वह पीवीएम के साथ जुड़ गई तो महाराष्ट्र में तीसरे मोर्चा एक प्रभावशाली गठबंधन हो सकता है। पिछले कुछ समय में तेलंगाना के सीएम केसीआर ने महाराष्ट्र में कई रैलियां की हैं। उनकी पार्टी 2024 में लोकसभा और राज्य विधानसभा का चुनाव भी लड़ना चाहती है।

हाल में महाराष्ट्र में बीआरएस की पकड़ बढ़ी है
प्रदेश में बीआरएस का प्रभाव बढ़ा है, इसका संकेत हाल ही में तब मिला जब बुलढाणा जिले में कई सरपंचों ने एनसीपी, वंचित बहुजन अघाड़ी, शिवसेना, शेतकारी संगठन और यहां तक कि कांग्रेस को भी छोड़कर बीआरएस का हाथ पकड़ लिया।

जानकार भी मानते हैं कि अन्य छोटी पार्टियों का पीवीएम में शामिल होना सत्तापक्ष या मुख्य विपक्षी दलों के लिए उतनी चिंता की बात नहीं हो सकती, जितना की बीआरएस का शामिल होना। यही वजह है कि पीवीएम की ओर से शेट्टी और जयंत पाटिल बीआरएस से लगातार बातचीत कर रहे हैं।

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