राजपाल यादव को जेल भेजने वालीं महिला जज स्वर्ण कांता शर्मा कौन हैं? पहले केजरीवाल से भी हो चुका है पंगा!
बॉलीवुड कॉमेडी किंग राजपाल यादव को दिल्ली हाई कोर्ट से बहुत बड़ा झटका लगा है। चेक बाउंस होने के पुराने मामले में कोर्ट ने उनकी अर्जी खारिज करते हुए उन्हें सीधा तीन महीने के लिए जेल भेज दिया है। इस कड़े फैसले को सुनाने वाली कोई और नहीं बल्कि दिल्ली हाई कोर्ट की धाकड़ जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा हैं।
जस्टिस शर्मा ने दो टूक शब्दों में कहा कि राजपाल यादव को कर्ज चुकाने के कई मौके दिए गए लेकिन वह हर बार नाकाम रहे। अब उनको और मौके नहीं दे सकते हैं। वैसे यह कोई पहली बार नहीं है जब जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा सुर्खियों में हैं। इससे पहले दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के केस और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर मशहूर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के हैंडल को लेकर भी उनके फैसले देश भर में चर्चा का विषय बन चुके हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कौन जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा।

राजपाल यादव को क्यों जाना पड़ा जेल?
यह पूरा विवाद 'मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड' कंपनी से जुड़े लोन और चेक बाउंस का है। मई 2024 में सेशंस कोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी मानते हुए छह महीने की सजा सुनाई थी। उस समय हाई कोर्ट में उनके वकील ने भरोसा दिलाया था कि वे आपस में समझौता कर लेंगे, जिसके बाद सजा पर रोक लगा दी गई थी। मामला सुलझाने के लिए मीडिएशन सेंटर भी भेजा गया था।
राजपाल यादव ने वादा किया था कि वे ढाई करोड़ रुपये किस्तों में चुका देंगे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसी साल 5 फरवरी को कोर्ट के कड़े रुख के बाद उन्होंने सरेंडर किया था। तब डेढ़ करोड़ रुपये जमा करने पर उन्हें अंतरिम राहत मिली थी। अब वादे पूरे न करने पर कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की सजा बरकरार रखते हुए उन्हें तीन महीने के लिए जेल भेज दिया है।
कौन जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा? (Who is Justice Swarana Kanta Sharma?)
- जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा का कानूनी और अकादमिक रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के दौलत राम कॉलेज से इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन के दौरान उन्हें 'बेस्ट ऑल-राउंडर स्टूडेंट' चुना गया था। इसके बाद उन्होंने 1991 में एलएलबी और 2004 में एलएलएम की पढ़ाई पूरी की।
- जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने चार साल की कड़ी मेहनत के बाद साल 2025 में 'जुडिशियल एजुकेशन' विषय पर अपनी पीएचडी पूरी की। इसके लिए उन्होंने यूके, अमेरिका, सिंगापुर और कनाडा की अदालतों का गहराई से अध्ययन किया।
- जस्टिस शर्मा महज 24 साल की उम्र में मजिस्ट्रेट बन गई थीं। उनकी काबिलियत को देखते हुए 35 साल की उम्र में वे सेशंस जज बन गईं। उन्होंने सीबीआई की स्पेशल कोर्ट, फैमिली कोर्ट, महिला कोर्ट और पॉक्सो (POCSO) जैसी कई बड़ी अदालतों में काम किया है। मार्च 2022 में उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट का परमानेंट जज नियुक्त किया गया।

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने 5 किताबें भी लिखी हैं
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पहचान सिर्फ अदालती कमरों तक सीमित नहीं है। वे एक बेहतरीन लेखिका भी हैं और उन्होंने समाज के अलग-अलग मुद्दों पर 5 किताबें लिखी हैं।
- Don't Break After Break-Up: यह किताब ब्रेकअप के दर्द से जूझ रही महिलाओं को हिम्मत देने वाली एक बेहतरीन गाइड है।
- Beyond Baghban: इस किताब में बुजुर्गों के अकेलेपन, उनके इमोशनल और आर्थिक संघर्षों को करीब से दिखाया गया है।
- Tumhari Sakhi: यह किताब महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए लिखी गई है।
- Love Full Circle: यह उनका एक काल्पनिक उपन्यास (Fiction) है, जो उनकी रचनात्मकता को दर्शाता है।
- Judicial Education: यह किताब देश की न्यायिक प्रणाली को और बेहतर बनाने के उनके विजन पर आधारित है।
जब जज के सामने आने से केजरीवाल ने किया इनकार
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा का नाम उस समय सबसे ज्यादा उछला जब दिल्ली आबकारी नीति मामले में सीबीआई ने अरविंद केजरीवाल की रिहाई को चुनौती दी। इस केस की सुनवाई जस्टिस शर्मा की बेंच के पास आई, तो केजरीवाल ने एक याचिका दायर कर मांग की कि जज खुद को इस मामले से अलग कर लें। केजरीवाल का आरोप था कि उन्हें इस बेंच से निष्पक्ष न्याय की उम्मीद नहीं है।
बात यहीं नहीं रुकी, अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक बेहद तीखा पोस्ट लिखा। उन्होंने साफ कहा कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत से न्याय मिलने की उनकी उम्मीदें टूट चुकी हैं।
उन्होंने महात्मा गांधी के सिद्धांतों और सत्याग्रह का हवाला देते हुए ऐलान कर दिया कि वे इस केस में जज के सामने पेश नहीं होंगे और न ही अपनी कोई दलील रखेंगे। हालांकि, कानूनी जानकार मानते हैं कि तीन दशकों का लंबा करियर और प्रशिक्षित जुडिशियल मीडिएटर होना जस्टिस शर्मा की निष्पक्षता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
CJP के 'एक्स' अकाउंट बैन पर सुनाया ऐतिहासिक फैसला
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के सोशल मीडिया हैंडल पर सरकार द्वारा लगाए गए बैन को तुरंत हटाने का आदेश देकर बड़ी राहत दी। इस फैसले के बाद इस डिजिटल विंग को संभालने वाले अभिजीत दीपके और उनके समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखा गया।
कोर्ट की कार्यवाही के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार का पक्ष रखते हुए बताया कि नीट (NEET) की दोबारा होने वाली परीक्षा के समय छात्रों और माता-पिता के बीच किसी भी तरह के भ्रम या घबराहट को रोकने के लिए इस सैटायर (व्यंग्य) अकाउंट को ब्लॉक किया गया था।
तुषार मेहता ने कोर्ट में माना कि अब परीक्षा शांति से पूरी हो चुकी है, इसलिए बैन जारी रखने का कोई तुक नहीं है। इस पर जस्टिस शर्मा ने सीधा और व्यावहारिक फैसला सुनाते हुए कहा कि जब मुख्य चिंता और डर ही खत्म हो चुका है, तो पाबंदी लगाने का कोई आधार नहीं बचता। उन्होंने तुरंत पुराना एक्स अकाउंट बहाल करने का आदेश दे दिया।














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