'ED सीधे उपराष्ट्रपति के दरवाजे पर पहुंची', धनखड़ के इस्तीफे पर संजय राउत की किताब में बड़ा खुलासा, मचा हडकंप
Sanjay Raut book Big revelation: शिवसेना (ठाकरे गुट) के सांसद संजय राउत ने अपनी पुस्तक 'नरक में स्वर्ग' के नए संस्करण में देश के पूर्व उपराष्ट्रपति से संबंधित गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। राउत ने एक संवैधानिक पद से हुए इस्तीफे के पीछे की 'अदृश्य राजनीति' को उजागर करने का दावा किया है, जिससे केंद्र सरकार और केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
राउत का दावा है कि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का 21 जुलाई 2025 को 'स्वास्थ्य कारणों' का हवाला देते हुए दिया गया इस्तीफा स्वाभाविक नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी बाहरी दबाव का परिणाम था, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।

धनखड़ से क्यों मांगा गया था इस्तीफा?
पुस्तक में आरोप है कि सरकार को उपराष्ट्रपति के आधिकारिक आवास से मोदी सरकार विरोधी संभावित गतिविधियों की सूचना मिली थी। यह सूचना पाते ही सरकार तुरंत सतर्क हो गई और धनखड़ से इस्तीफे की मांग की गई। उन्होंने पहले इनकार कर दिया था।
'ईडी सीधे उपराष्ट्रपति के दरवाजे पर पहुंची और...'
हालांकि, उनके इनकार के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा तैयार एक विशेष 'फाइल' उनके सामने रख दी गई। यह फाइल धनखड़ और उनकी पत्नी द्वारा जयपुर में घर की बिक्री से संबंधित थी, जिससे प्राप्त कुछ धन कथित तौर पर विदेश भेजा गया था। ईडी इस पूरे लेनदेन पर नजर रख रही थी।
'राजीनामे के लिए सामने रखी फाइल'
किताब में दावा किया गया है कि ईडी ने इस मामले की एक अलग फाइल बनाकर सीधे तत्कालीन उपराष्ट्रपति के सामने प्रस्तुत की। इसके बाद ही उनकी तबीयत एकाएक बिगड़ी और उन्होंने अपने संवैधानिक पद से इस्तीफा दे दिया। यह आरोप राजनीतिक हल्कों में विवादों का कारण बन सकता है।
संजय राउत ने भाजपा पर किया तीखा प्रहार
संजय राउत ने इस पूरे प्रकरण का संदर्भ देते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पर तीखे प्रहार किए हैं। उन्होंने कहा कि यह घटना है कि जांच एजेंसियां देश के उपराष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद तक पहुंच चुकी थीं। राउत ने अपनी पुस्तक में ईडी की इन कार्रवाइयों को 'इतिहास के काले पन्नों' में दर्ज होने वाला बताया और इसे 'भाजपा की एक शाखा' कहा है।
संयज राउत की किताब 'नरक में स्वर्ग' मचाएगी बवाल
संजय राउत की किताब 'नरक में स्वर्ग' के हिंदी और अंग्रेजी संस्करण का 23 मार्च को विमोचन होगा । इन नई आवृत्तियों में, मूल मराठी संस्करण की तुलना में चार अतिरिक्त अध्याय शामिल हैं, जिनमें कई बड़ी राजनीतिक घटनाओं के परदे के पीछे के राज खुलने की उम्मीद है। अब इन दावों पर सत्ताधारी भाजपा और संबंधित एजेंसियों की प्रतिक्रिया का इंतजार है।












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