Sanjay Raut मेधा सोमैया मानहानि केस में हुए बरी, जिसमें काटी थी 15 दिन की जेल की सजा, क्या है पूरा मामला?
Kirit Somaiya Wife Defamation Case: महाराष्ट्र में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत को मानहानि से जुड़े केस में बड़ी जीत मिली है। 26 फरवरी को मुंबई की एक सत्र अदालत ने उन्हें मेधा सोमैया मानहानि केस में बरी कर दिया है। भाजपा नेता किरीट सोमैया और उनकी पत्नी मेधा सोमैया द्वारा दायर मानहानि केस में कोर्ट का ये फैसला राउत द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका को स्वीकार करने के बाद आया है।
ये वो ही मामला है जिसमें 2025 में मजिस्ट्रेट अदालत ने इसी मामले में राउत को मानहानि का दोषी ठहराते हुए 15 दिन की जेल और 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया था।

संजय राउत को हुई थी 15 दिन की जेल
संजय राउत ने 15 दिन की जेल की सजा काटी थी। उद्धव गुट शिवसेना के सांसदों और विधायकों और नेताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली सत्र अदालत में मजिस्ट्रेट के फैसले को चुनौती दी थी।
क्या है मेधा सोमैया मानहानि मामला?
विवाद मीरा-भयंदर में कथित 100 करोड़ रुपये के शौचालय घोटाले से संबंधित था, जिसमें राउत ने किरीट और मेधा सोमैया की संलिप्तता का आरोप लगाया था। यह प्रकरण 2022 में मीरा-भयंदर शहर में 154 सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण के ठेके से जुड़ा है।
इन शौचालयों में से 16 के निर्माण का ठेका मेधा सोमैया के 'युवा प्रतिष्ठान' को मिला था। राउत ने आरोप लगाया था कि इस परियोजना में तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरज़ेड) नियमों का उल्लंघन हुआ, जाली दस्तावेज जमा किए गए और मीरा-भयंदर नगर पालिका के साथ धोखाधड़ी की गई। उन्होंने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का भी जिक्र किया था।
क्या बोले थे संजय राउत?
इस मामले पर संजय राउत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था, "जो गंदगी फैलाते हैं, वे पूछेंगे कि सबूत कहां हैं? सबूत कहां हैं? यह भी पता है। युवा प्रतिष्ठान के माध्यम से मेधा सोमैया और उनके परिवार ने ही यह घोटाला किया है।"
सोमैया दंपत्ति ने दायर किया था मानहानि केस
सोमैया दंपत्ति पर इस घोटाले में शामिल होने के निराधार और मानहानिकारक आरोप लगाने का दावा किया था। इन आरोपों के बाद ही मेधा सोमैया ने मानहानि का केस दायर किया था।
सत्र न्यायालय ने संजय राउत को निर्दोष बताते हुए बरी किया
मेधा सोमैया द्वारा मानहानि का दावा दायर करने के बाद, माझगांव दंडाधिकारी न्यायालय ने पहले संजय राउत को दोषी पाया था और सजा सुनाई थी। संजय राउत ने दंडाधिकारी न्यायालय के इस फैसले को सत्र न्यायालय में चुनौती दी थी। सत्र न्यायालय ने अब सुनवाई के बाद राउत को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया है, जिससे उन्हें इस मामले में बड़ी राहत मिली है।
किस आधार पर बरी हुए संजय राउत?
अदालत में सुनवाई के दौरान, दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। संजय राउत के वकील मनोज पिंगले ने तर्क दिया कि राउत ने किसी की मानहानि नहीं की है। वहीं, मेधा सोमैया की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता लक्ष्मण कनाल ने जोर देकर कहा कि जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि जिस घोटाले का आरोप लगाया गया था, वैसा कोई घोटाला हुआ ही नहीं। ऐसे में राउत के बयान मानहानि के दायरे में आते हैं।












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