महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019: नागपुर ईस्ट सीट के बारे में जानिए
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नई दिल्ली। नागपुर शहर की नागपुर ईस्ट सीट बेहद ही अहम सीट है। इस सीट पर सबसे अधिक बार शिवसेना का कब्जा रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में इस सीट से बीजेपी उम्मीदवार कृष्ण पंचम ने जीत हासिल की थी। दूसरे स्थान पर कांग्रेस अभिजीत गोविंद राव थे। 2014 में नागपुर ईस्ट से 21 प्रत्याशी मैदान में थे और यहां 56.36 फीसदी वोटिंग हुई थी। यहां सीधी लड़ाई बीजेपी और कांग्रेस होती रही है। इस सीट पर वोटरों की संख्या 327400 से अधिक है। कृष्णा पंचम को इस पिछले चुनाव में 99,136 वोट मिले थे। जबकि कांग्रेस के अभिजीत गोविंद को 50,522 वोट मिले। अभिजीत कृष्णा पंचम से 48,614 मतों से हार गए थे। नागपुर ईस्ट महाराष्ट्र के नागपुर जिले का हिस्सा है। यह विधानसभा नागपुर संसदीय क्षेत्र में आती है।

महाराष्ट्र विधानसभा में यह सीट नंबर 54 है। इस सीट पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधी लड़ाई होती रही है। इस सीट 1978 से हुए चुनावों में अब तक तीन बार शिवसेना, दो बार बीजेपी और एक बार एनसीपी व कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। पिछले दो बार से यह सीट लगातार बीजेपी जीतती आ रही है। ऐसे में इस चुनाव में पार्टी इस सीट को बरकरार रखना चाहेगी। बीजेपी से पहले 2004 में इस सीट पर एनसीपी का कब्जा था। 1990 से लेकर 1999 तक इस सीट पर लगातार शिवसेना का कब्जा रहा है। इस सीट से गणेश नायक दो बार शिवसेना से विधायक चुने गए। वहीं 1985 में कांग्रेस के गौरी जनार्दन शांताराम चुनाव जीते थे।
जानें अपने विधायक के बारे में
कृष्णा पंचम खोपड़े भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सक्रिय सदस्य रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और भाजपा में शामिल हो गए। कृष्णा खोपड़े 12 महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य भी थे। 2014 में खोपड़े नागपुर शहर के भाजपा के प्रमुख थे। 2009 में उन्होंने कांग्रेस के 5 बार के विधायक सतीश चतुर्वेदी को हराकर एक बड़ा उलटफेर किया था। खोपड़े नागपुर महानगर पालिका में पार्षद और एक स्थायी समिति के अध्यक्ष थे। उनके राजनीतिक करियर की नब्बे के दशक में शुरुआत हुई थी। जब वे नागपुर में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजपा की युवा शाखा) के अध्यक्ष बने। 33 वर्ष की आयु में खोपड़े नागपुर महानगर पालिका के नगर पार्षद बने और 1992 से 2014 तक लगातार 5 बार पार्षद चुने गए। कृष्ण खोपड़े 1995-1996 में नागपुर नगर निगम के उप महापौर रहे हैं। उनके चुनावी हलफनामे के मुताबिक, उनकी कुल संपत्ति लगभग 4 करोड़ रुपए है। वहीं उन पर 1 करोड़ से अधिक की देनदारी है। पांचवी तक पढ़े कृष्ण पंचम खुद को बिजनेसमैन बताते हैं। उनके खिलाफ कुल नौ मुकदमे दायर हैं।
शहर एक नजर:
अगर हम बात नागपुर के इतिहास और संस्कृति की करें तो नागपुर महाराष्ट्र राज्य का तीसरा बड़ा शहर है। नागपुर भारत के मध्य में स्थित है। इसे महाराष्ट्र की उपराजधानी भी कहा जाता है। नागपुर भारत का 13 वां व विश्व का 114 वां सबसे बड़ा शहर हैं। यह नगर संतरों के लिये काफी मशहूर है। इसलिए इसे लोग ऑरेंज सिटी भी कहते हैं। इसे भारत की टाइगर राजधानी भी कहा जाता है। नागपुर को गोंड राजवंश ने खोजा था जिस पर बाद में मराठा साम्राज्य के अंतर्गत भोसलो ने अपना आधिपत्य जमा लिया था। बाद में अंग्रेजो ने कब्जा करके नागपुर को प्रांत की केन्द्रीय राजधानी बना दिया था।
नागपुर शहर का दिलचस्प नाम इस शहर की नाग नदी के नाम पर पड़ा है वही पुर संस्कृत और हिन्दी में शहरों के साथ जुड़ने वाला प्रत्यय है। नवेगांव बांध, सीताबुल्दी किला और पेंच नेशनल पार्क नागपुर में कुछ प्रमुख आकर्षण केन्द्र है। दीक्षा भूमि नागपुर की प्रतिष्ठित जगह है जहां एक हजार दलितों ने डॉ. बी. आर. अम्बेडकर का अनुसरण किया और बौद्ध धर्म में परिवर्तित हो गए। नागपुर शहर के बीचों-बीच एक पत्थर का खम्भा लगा हुआ है जिसमें देश के सभी प्रमुख शहरों की नागपुर से दूरी लिखी हुई है। इस जीरो माइल का निर्माण ब्रिटिश शासन के दौरान किया गया था।












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