मराठा को OBC में नहीं चाहिए आरक्षण, चुनाव से पहले प्रकाश अंबेडकर की आर-पार की लड़ाई ने बढ़ाई मुसीबत
Maharashtra News: महाराष्ट्र विधान सभा चुनाव अब जब नजदीक है ऐसे में मराठा आरक्षण का मामला फिर से गरमाता नजर आ रहा है क्योंकि अब वंचित बहुजन अघाड़ी के नेता प्रकाश अंबेडकर ने मराठा आरक्षण के लिए ओबीसी कोटे में नहीं बल्कि अलग से मराठा आरक्षण की व्यवस्था करने की मांग रख दी है।
इतना ही नहीं प्रकाश अंबेडकर ने इस बात पर जोर दिया है कि राजनीति पार्टियां ये स्पष्ट करें कि मराठा आरक्षण के लिए वो क्या व्यवस्था चाहती हैं? उन्होंने कहा अब इस पर आर-पार की लड़ाई लड़नी होगी।
प्रकाश अंबेडकर के इस बयान के बाद चुनाव से पहले मराठा आरक्षण को लेकर ये बहस तूल पकड़ चुकी है। वहीं मराठा आरक्षण के लिए मनोज जरांगे की बार-बार की भूख हड़ताल इस बहस को और अहम बना दी है कि राजनीति दल मराठा आरक्षण के मुद्दे के लिए किस हद तक लड़ने जा रहे हैं।

बता दें घोषणापत्र में प्रकाश अंबेडकर ने लिखा है कि "जब हमने यात्रा निकाली थी, तब हमने एक सवाल पूछा था - जरांगे पाटिल की मांग है कि मराठा समुदाय को ओबीसी से आरक्षण दिया जाना चाहिए। इसलिए राजनीतिक दलों को इस पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
वहीं अब वंचित बहुजन अघाड़ी के नेता प्रकाश अंबेडकर ने मराठा आरक्षण को लेकर चिंता व्यक्त की और कहा मराठा आरक्षण को ओबीसी कोटे में इसे शामिल करना स्वीकार्य नहीं है। प्रकाश अंबेडकर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि राजनीति दलों को इस मुद्दें पर अपनी भूमिका स्पष्ठ करना चाहिए। उन्होंने कहा राजनीतिक दलों ने अपनी भूमिका स्पष्ठ नहीं की। सीएम एकनाथ शिंदे ने बैठक बुलाई लेकिन कुछ भी स्पष्ठ नहीं हुआ।
इसके साथ ही प्रकाश अंबेडकर ने शरद पवार की तारीफ की और कहा शरद पवार ने रत्नगिरी में जरांडे पाटिल की मांग का समर्थन किया। पवार ने कहा छोटे समुदायों को इस आरक्षण में सावधानी से शामिल किया जाना चाहिए। लेकिन इसके विपरीत शिवसेना यूटीबी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने ये कहा पीएम मोदी के पास जाइए और प्रतिशत बढ़ाइए और ओबीसी कोटे से ही आरक्षण दीजिए।
बता दें मराठा आरक्षण का मुद्दा राजनीतिक नेताओं, सामुदायिक समूहों और कार्यकर्ताओं के बीच एक विभाजनकारी मुद्दा बना हुआ है। प्रकाश अंबेडकर ने ओबीसी आरक्षण में किसी भी समायोजन के खिलाफ लगातार तर्क दिया है, इसे न्याय और समानता की लड़ाई के रूप में पेश किया है।
प्रकाश अंबेडकर ने कहा मैं ओबीसी श्रेणी के भीतर 55 लाख प्रमाण पत्र वितरित करने के सरकार के फैसले का कड़ा विरोध करते हैं। उन्होंने कहा ओबीसी आरक्षण रहना चाहिए लेकिन मराठा को ओबीसी के अंदर नहीं देना चाहिए। अंबेडकर के इस रुख से साफ है कि अगर ऐसा होता है तो ओबीसी को आवंटित आरक्षण का अतिक्रमण नहीं होगा।
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