Opinion Poll: महाराष्ट्र में आज हुए चुनाव तो भाजपा को मिलेंगी कितनी सीटें? नए सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा
Opinion Poll Maharashtra (टाइम्स नाउ नवभारत- मैट्रिज सर्वे) : महाराष्ट्र में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं, जिसके लिए अभी से ही सियासी दलों ने कमर कस ली है। बीते पांच सालों में महाराष्ट्र ने काफी सियासी उतार-चढ़ाव देखा है।
यहां की जनता इस बार स्थायी सरकार की ख्वाहिश रखती है, अब उसकी ये इच्छा पूरी होती है या नहीं ये तो चुनावी परिणाम बताएंगे लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि इस वक्त राज्य में सियासी पारा काफी हाई है।

राज्य में मौजूदा स्थिति क्या है? इसे लेकर टाइम्स नाउ नवभारत- मैट्रिज ने एक सर्वे किया है, जिसमें चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। इस पोल के रिजल्ट एमवीए और महायुति के बीच कांटे की टक्कर को दिखा रहे हैं। सर्वे में महायुति (बीजेपी, एनसीपी, शिवसेना) आगे है लेकिन एमवीए भी उससे ज्यादा पीछे नहीं है।
इसलिए यहां पर किसी भी पार्टी की राह आसान नहीं होगी, आपको बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 288 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए यहां पर मैजिक नंबर 145 चाहिए।
सर्वे में पूछा गया-आज हुए चुनाव तो महाराष्ट्र में किसकी बनेगी सरकार?
- कुल सीटें: 288
- मैजिक नंबर: 145
- महायुति: 137-152
- एमवीए:129-144
- अन्य: 03-08
अगर अलग-अलग दलों की बात करें तो भाजपा को सर्वे में 83-93 सीटें मिलती दिख रही हैं यानी की उसे 26.2 % वोट मिलते दिख रहे हैं तो वहीं SHS (SS) को 42-52 सीटें यानी की 6.8 % वोट, NCP (AP) को 07-12 सीटें यानी कि 2.8 % वोट, कांग्रेस को 58-68 सीटें यानी कि 16.2 % वोट मिले हैं।
Opinion Poll: महाराष्ट्र में कौन मारेगा बाजी?
तो वहीं सर्वे NCP (SP) को 13.7 % वोट यानी कि 35-45 सीटें देता दिख रहा है। तो वहीं अन्य के खाते में 10.1 प्रतिशत वोट यानी कि 03-08 सीटें आती दिख रही हैं।
क्या थी साल 2019 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की स्थिति?
- कुल सीटें: 288
- भारतीय जनता पार्टी 105
- शिवसेना 56
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 44
- राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी 54
- ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन 2
- मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी 1
- महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना 1
- समाजवादी पार्टी 2
- निर्दलीय 23
महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में ये मुद्दे होंगे हॉवी
किसान और कृषि संकट: महाराष्ट्र में कृषि संकट और किसानों की समस्याएं चुनावी चर्चा का मुख्य केंद्र बिंदु हैं। सूखा, कर्ज माफी और फसल बीमा जैसे मुद्दों पर राजनीतिक दल अपने-अपने एजेंडे के साथ उतरेंगे।
विकास और बुनियादी ढांचा: मुंबई, पुणे, नागपुर जैसे शहरों में विकास परियोजनाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर रहेगा।
सांस्कृतिक पहचान: शिवसेना और भाजपा जैसी पार्टियां इस बार भी मराठी पहचान और संस्कृति को मुख्य चुनावी मुद्दा बना सकती हैं।












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