जानिए महाराष्ट्र विधानसभा का नंबर गेम, क्या एकनाथ शिंदे की बगावत ले डूबेगी उद्धव सरकार!
मुंबई, 21 जून। महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। शिवसेना के विधायक और कैबिनेट मंत्री एकनाथ शिंदे तकरीबन 12 विधायकों के साथ लापता हो गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार वह गुजरात के सूरत स्थित एक होटल में रुके हैं। खुद शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने इस बात की पुष्टि की थी कि एकनाथ शिंदे संपर्क से बाहर हैं। उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। संजय राउत ने आरोप लगाया है कि उद्धव ठाकरे की सरकार को सत्ता से हटाने के लिए भारतीय जनता पार्टी षड़यंत्र कर रही है। भाजपा राजस्थान और मध्य प्रदेश की तर्ज पर यह षड़यंत्र कर रही है लेकिन हम ये महाराष्ट्र है, हम ऐसा होने नहीं देंगे।

आपात बैठक बुलाई गई
रिपोर्ट की मानें तो एकनाथ शिंदे के अलावा तकरीबन 20 विधायक भी बगावती सुर अपना चुके हैं और संपर्क से बाहर हैं। राजनीतिक हलचल बढ़ती देख शिवसेना ने आपात बैठक बुलाई तो कांग्रेस ने भी अपने विधायकों को संपर्क साधा है। अहम बात यह है कि आगामी राष्ट्रपति चुनाव को लेकर एक तरफ जहां विपक्षी दल कवायद में जुटे हैं तो दूसरी तरफ महाराष्ट्र संकट सामने आ खड़ा हुआ है। इस संकट को देखते हुए एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार आज मुंबई पहुंचेंगे और उद्धव ठाकरे से मुलाकात करेंगे।

26 विधायकों के लापता होने की खबर
सूत्रों की मानें तो सूरत के होटल में 26 विधायक मौजूद हैं, ऐसे में अगर यह रिपोर्ट सच है तो उद्धव ठाकरे की सरकार मुश्किल में नजर आ रही है। रिपोर्ट की मानें तो सूरत के ली-मैरेडियन होटल में ये विधायक ठहरे हैं। होटल में शिवसेना के 15 से अधिक विधायक हैं। एकनाथ शिंदे को शिवसेना की रीढ़ माना जाता है, उन्हें बाल ठाकरे के समय में शिवसेना का सबसे बड़ा नेता माना जाता था। ऐसे में शिंदे का पार्टी से बगावत करना काफी भारी पड़ सकता है। हालांकि संजय राउत ने दावा किया है कि शिंदे से संपर्क हो गया है और वह जल्द ही वापस आ सकते हैं।

वोटों का गणित
महाराष्ट्र विधानसभा के गणित की बात करें तो प्रदेश में विधानसभा की कुल 288 सीटें हैं। ऐसे में सरकार बनाने के लिए 145 विधायकों की जरूरत होती है। एनसीपी के पास 53 विधायक हैं, कांग्रेस के पास 44 विधायक और शिवसेना के पास 55 विधायक हैं। लिहाजा तीनों दलों की बात करें तो कुल मिलाककर उनके पास 152 विधायक हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी में कई छोटे-छोटे दल भी शामिल हैं। एमवीए में बीवीए के 3, सपा के 2, पीजेपी के 2, पीडब्ल्यूपी के एक और 8 निर्दलीय विधायक हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी के पास 106 विधायक हैं। ऐसे में अगर शिवसेना के एक दर्जन से अधिक विधायक लापता हैं तो ठाकरे सरकार पर संकट खड़ा नजर आ रहा है। एनडीए की बात करें तो उसके पास 113 विधायकों का समर्थन है। लिहाजा वोटों का गणित प्रदेश में काफी दिलचस्प बनता नजर आ रहा है।

क्या चाहते हैं शिंदे
रिपोर्ट की मानें तो एकनाथ शिंदे कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार चलाने के पक्ष में नहीं है। इसकी बड़ी वजह यह है कि ठाकरे सरकार में अधिकतर अहम मंत्रालय एनसीपी के पास है और प्रदेश सरकार की सत्ता की चाभी शरद पवार के पास है। शिंदे इस बात से बिल्कुल खुश नहीं है। जिस तरह से विधायकों के फंड में भेदभाव किया जा रहा है उसको लेकर भी शिंदे नाराज हैं। यही नहीं आदित्य ठाकरे के रवैये से भी शिंदे नाराज हैं। इन तमाम वजहों के चलते शिंदे ने बगावती सुर अपनाएं हैं। सूत्रों की मानें तो शिंदे शिवसेना से नाराज नहीं हैं बल्कि वह चाहते हैं कि शिवसेना भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाए।

वोटों का गणित
महाराष्ट्र विधानसभा के गणित की बात करें तो प्रदेश में विधानसभा की कुल 288 सीटें हैं, लेकिन शिवसेना के एक विधायक की मृत्यु के बाद 287 विधायक हो गए हैं। ऐसे में सरकार बनाने के लिए 144 विधायकों की जरूरत होती है। एनसीपी के पास 53 विधायक हैं, कांग्रेस के पास 44 विधायक और शिवसेना के पास 55 विधायक हैं। लिहाजा तीनों दलों की बात करें तो कुल मिलाककर उनके पास 152 विधायक हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी में कई छोटे-छोटे दल भी शामिल हैं। एमवीए में बीवीए के 3, सपा के 2, पीजेपी के 2, पीडब्ल्यूपी के एक और 8 निर्दलीय विधायक हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी के पास 106 विधायक हैं। एनडीए की बात करें तो उसके पास 113 विधायकों का समर्थन है। लिहाजा वोटों का गणित प्रदेश में काफी दिलचस्प बनता नजर आ रहा है। ऐसे में अगर शिवसेना के विधायक टूटते हैं तो निसंदेह छोटे दलों के विधायक और निर्दलीय विधायक सत्ता पक्ष के साथ जाना चाहेंगे। ऐसे में अगर शिवसेना के एक दर्जन से अधिक विधायक लापता हैं तो ठाकरे सरकार पर संकट खड़ा नजर आ रहा है।

दिल्ली-मुंबई में बढ़ी हलचल
देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि असंतोष लोगों के सामने आया है। ये परिवर्तन की शुरुआत है और जबतक एक जनता के हितों की सरकार महाराष्ट्र में नहीं आएगी हमारा संघर्ष जारी रहेगा। यह सत्ता का संघर्ष नहीं है बल्कि जनहित का संघर्ष है। रिपोर्ट की मानें तो देवेंद्र फडणवीस अमित शाह से मुलाकात करने के लिए दिल्ली पहुंच रहे हैं। महाराष्ट्र संकट के बीच जेपी नड्डा और अमित शाह की भी दिल्ली में मुलाकात हुई है। वहीं शरद पवार दिल्ली से महाराष्ट्र पहुंच रहे हैं और वह इस संकट के बीच ठाकरे से मुलाकात करेंगे।












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