Maharashtra: घर से बाहर आ गई एनसीपी की लड़ाई, भतीजे या भुजबल में किसे चुनेंगे पवार?
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में घर का झगड़ा अब बाहर आ गया है। पार्टी सांसद और अपनी चचेरी बहन सुप्रिया सुले को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद, अजित पवार ने जिस तरह से प्रदेश अध्यक्ष के पद पर दावा जताया था, उसने ओबीसी नेताओं को भी इसके लिए सक्रिय कर दिया है।
एनसीपी के ओबीसी चेहरे छगन भुजबल ने भी अब पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद पर अपनी दावेदारी पेश कर दी है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि भुजबल का यह दांव खुद का है या फिर इसके पीछे की भी कोई राजनीति है। लेकिन, इतना तय है कि कोई भी फैसला लेना पार्टी सुप्रीमो के लिए बहुत आसान नहीं होने वाला।

ओबीसी नेता को बनाएं प्रदेश अध्यक्ष- छगन भुजबल
एनसीपी के अंदर पहले ही जारी घमासान के बीच छगन भुजबल ने गुरुवार को कहा, 'हम सिर्फ ओबीसी के बारे में सिर्फ बातें नहीं करते रह सकते, हमें जिम्मेदारी मिलनी भी जरूरी है। पार्टी में कई ओबीसी नेता है, जैसे कि मैं....जितेंद्र आव्हाड, धनंजय मुंडे....मुझे लगता है कि एक ओबीसी नेता को प्रदेश में पार्टी प्रमुख होना चाहिए।'
अजित पवार ने संगठन में मांगा है रोल
बुधवार को एनसीपी की स्थापना दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में चाचा शरद पवार की मौजूदगी में अजित पवार ने विधानसभा में विपक्ष के नेता पद पर बने रहने से अनिच्छा जताते हुए इशारों में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद पर दावेदारी ठोक दी थी। उन्होंने कहा था कि संगठन में शक्ति दीजिए और देखिए कि पार्टी कैसे चलाई जाती है।
सुप्रिया सुले के कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद अजित पवार ने बदला पैंतरा
वह इशारों-इशारों में मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल के काम करने के तरीके पर सवाल उठा गए थे। संयोग से जूनियर पवार को विपक्ष के नेता के पद से मोहभंग होना तब सार्वजनिक हुआ था, जब कुछ ही दिन पहले पार्टी सुप्रीमो शरद पवार ने बेटी सुप्रिया सुले और वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की घोषणा की।
संगठन की जिम्मेदारी मांगकर दूर की सोच रहे हैं अजित पवार
प्रदेश अध्यक्ष बनने की उनकी इच्छा को संगठन में पकड़ बनाने की उनकी ख्वाहिश के तौर पर देखा जा रहा है। इससे उन्हें अपने समर्थकों को चुनावों में टिकट देने का मौका मिल सकता है और अगर चुनावों में महा विकास अघाड़ी गठबंधन सबसे बड़ा गठबंधन बनता है और एनसीपी सबसे बड़ी पार्टी तो उनके मुख्यमंत्री पद पर भी दावेदारी बन सकती है, जिसकी चाहत वे पहले जाहिर भी कर चुके हैं।
पवार के परिवार की पावर पॉलिटिक्स!
माना जा रहा है कि अगर अजित पवार की इच्छा के अनुसार उन्हें संगठन में लाकर महाराष्ट्र में पार्टी की कमान सौंपी जाती है तो इससे उनका बहन सुप्रिया सुले के साथ सियासी कश्मकश और बढ़ सकती है। लेकिन, सार्वजनिक तौर पर सुले भाई की इच्छा पर खुशी जता रही हैं।
अजित पवार की मांग पर सुले ने खुशी जताई
सुप्रिया सुले ने कहा है, 'मैं बहुत खुश हूं कि दादा संगठन में काम करना चाहते हैं, संगठन में जितने ज्यादा नेता और जितने अधिक गाइड आएंगे, इससे संगठन और भी मजबूत होगा। अगर भाई कहते हैं कि संगठन में काम करना चाहते हैं तो इससे पार्टी कार्यकर्ताओं को अच्छा संदेश जाता है। '
हमें सबको साथ लेकर चलना है-सुले
उन्होंने यह भी कहा कि 'एक बहन हमेशा चाहती है कि उसके भाई को वह सबकुछ मिले, जो उसकी इच्छा है।' लेकिन, साथ ही यह भी जोड़ दिया कि, 'पार्टी एक परिवार है और इसलिए हमें सबको साथ लेकर चलना है।' अभी शरद पवार, सुप्रिया सुले और प्रफुल्ल पटेल पटना में आयोजित विपक्षी दलों की बैठक में व्यस्त हैं। वहां से लौटने के बाद एनसीपी में पैदा हुई रार का कोई नया अंजाम देखने को मिल सकता है।












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