NCP Crisis: क्‍या शरद पवार से NCP हथिया पाएंगे अजित पवार? जानें वो आधार जिस पर शिंदे को मिली थी शिवसेना

NCP Crisis: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) शरद पवार ने जैसे 1978 में बसंत दादा पाटिल से जैसे झल किया था वैसे ही उनके भतीजे अजित पवार ने उनके साथ किया है। महाराष्‍ट्र NCP जिसमें अजित पवार को शरद पवार का उत्‍तराधिकारी माना जाता था उन्‍होंने ने चाचा शरद द्वारा तव्‍बजों ना दिए जाने पर बगावत कर दी।

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इतना ही नहीं महाराष्‍ट्र की भाजपा और शिंदे गठबंधन में श‍ामिल होकर उपमुख्‍यमंत्री बनते ही अजित पवार शरद पवार से उनकी एनसीपी छीनने के लिए जुट चुके हैं। अजित पवार ठीक वो ही कर रहे हैं जैसे एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना पर कब्जा जमाया था। ऐसे में सवाल उठता है कि क्‍या अजित पवार के पास सारे आधार है जिनके आधार पर एकनाथ शिंदे उद्धव ठाकरे से उनकी शिवसेना छीनने में कायमाब हुए थे?

महाराष्‍ट्र में शिंदे वाली चाल चल रहे हैं अजित पवार

याद रहे महाराष्‍ट्र की राजनीति कुछ महीने पुराने वाले घटनाक्रम का मानो रिपीट टेलीकॉस्‍ट हो रहा है बस फर्क ये है कि पिछली बार शिवसेना थी और इस बार एनसीपी है क्‍योंकि शरद पवार से बगावत करने के बाद अजित पवार ने राष्‍ट्रीय कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी और उसके चुनाव चिन्‍ह पर दावा करते हुए याचिका दाखिल कर दी है।

कुछ महीने पहले ही चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे को शिवसेना सौंपी थी, उसी तरह अजित पवार ने एनसीपी के लिए दावा ठोंका है। शिंदे को जिस आधार पर शिवसेना सौंपी गई थी क्‍या वो सारे आधार अजित पवार के पास मौजूद है? आइए जानते हैं

अजित पवार को पार्टी और पार्टी सिंबल के लिए कहां दावा करना होगा?

जानकारों के अनुसार राजनीतिक दलों में बंटवारा दो स्थितियों पर निर्भर करता है।

पहली स्थिति- यदि राज्‍य में विधानसभा सत्र चल रहा हो तो ऐसे में विधानसभा स्‍पीकर के पास निर्णय लेना का अधिकार होता है और दल-बदलू कानून लागू होता है।

दूसरी स्थिति- अगर विधानसभा सत्र राज्‍य में नहीं चल रहा हो ऐसे में अगर राजनीतिक दल में फूंट होती है तब चुनाव आयोग फैसला करता है। चुनाव आयोग के इस अधिकार का विवरण रिजर्वेशन एंड अलॉटमेंट ऑर्डर, 1968 के पैराग्राफ 15 में है। याद रहे महाराष्‍ट में अभी ये दूसरी स्थिति ही लागू होती है।

चुनाव आयोग किस आधार पर पार्टी और सिंबल को लेकर लेता है फैसला?

चुनाव आयोग के पास जब कोई पार्टी का विवाद पहुंचता है तो वो पार्टी के बंटवारे के बारे में जांच करता है। सबसे पहले आयोग पार्टी के बंटवारे के पहले पॉर्टी की कमेटियों और बॉडी के निर्णायक मंडल की सूची निकालता है और ये पता लगता है कि किस गुट में कितने पार्टी के सदस्‍य किस गुट में हैं।

इसके साथ ही कितने सांसद और कितने विधायक किस पाले में हैं। ये पता करने के बाद आयोग पार्टी के पदाधिकारियों और चुने गए विधायकों या सांसदों का समर्थन किस गुट को है उसके आधार पर पार्टी के सिंबल को लेकर फैसला करता है। अगर इस पर पार्टी के अंदर समर्थन है ये नहीं दर्शा पाता है तो आयोग पार्टी के सांसदों ओर विधायकों के बहुमत के आधार पर फैसला सुनाता है।

एकनाथ शिंदे को कैसे मिली थी शिवसेना?

फवररी 2023 में चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को शिवसेना और पार्टी का चुनाव चिन्‍ह धनुष और तीर देने का फैसला सुनाया था। इसकी वजह थी कि एकनाथ शिंदे गुट के पास यूनाइटेट शिवसेना के टिकट पर जीत कर आए 55 विधायकों में 40 का समर्थन प्राप्‍त था। इसके साथ ही शिंदे के पास शिवसेना के 12 सांसदों का समर्थन भी था।

जानें अजित पवार की के पास कितनों का है समर्थन

वहीं अब बात अगर एनसीपी की दावेदारी की करें तो बंटवारे से पहले एनसीपी के कुल 53 विधायक हैं। जिसमें से 40 विधायकों का अजित पवार ने अपने साथ होने का दावा किया है। यानी 75 प्रतिशत से अधिक एनसीपी का खेमा अजित पवार के गुट में हैं वहीं शरद पवार के गुट में 25 प्रतिशत से कम विधायक हैं।

अजीत पवान ने 29 विधायकों के नाम की लिस्‍ट भी सौंपी है। इस लिस्‍ट में विधायकों के अलावा चार विधान परिषद सदस्‍यों के नाम भी शामिल हैं।

शरद पवार के पास महज 7 विधायक!

वहीं अजित पवार ने जो आज बैठक बुलाई है उसमें 35 से अधिक विधायकों के पहुंचने का दावा किया जा रहा है। वहीं शरद पवार की बैठक में 7 मौजूदा विधायकों के पहुंचने का दावा किया जा रहा है।

अजित NCP को हथियाने में आसानी से हो जाएंगे कामयाब

इस आधार पर देखा जाए तो अजित पवार बिलकुल उसी मजबूत स्थिति में हैं जिस स्थिति में कुछ महीने पहले महाराष्‍ट्र में एकनाथ शिंदे थे जिस आधार पर वो उद्धव ठाकरे को बाला ठाकरे से उत्‍तराधिकार में मिली शिवसेना को ना केवल छीनने में कामयाब हुए थे बल्कि पार्टी का सिंबल भी हथिया लिया था।

छगल भुजगल ने विधायकों के सम‍र्थन को लेकर किया है ये दावा

वैसे अजित पवार गुट के छगल भुजगल ने 40 विधायकों का अपने साथ होने ओर उनका एफिटेविट उनके पास होने का दावा किया। ऐसे में अगर ये दावा सच है तो अजित पवार शरद पवार से उनकी एनसीपी और उसका सिंबल छीनने में कामयाब हो जाएंगे।

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