Mumbai News: मुंबई को मिलेगा 120 KM का हाईस्पीड कोस्टल कॉरिडोर, मिनटों में नरीमन पॉइंट से विरार पहुंचाएगा
Mumbai News: महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई महानगर क्षेत्र के लिए उत्तन-विरार सी लिंक प्रोजेक्ट (DPR) को मंगलवार को मंज़ूरी दे दी है। जिसके तहत 120 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड कोस्टल कॉरिडोर बनाया जाएगा। इस कॉरिडोर के तहत सड़कें नार्थ मुंबई कोस्टल एरिया में बनेगी। यह प्रोजेक्ट मुंबई और उससे जुड़े उपनगर क्षेत्रों के लाखों लोगों के लिए यात्रा के अनुभव को पूरी तरह बदल देगी।
यह कॉरिडोर मुंबई के वेस्ट के किनारे एक भविष्य की रिंग रोड का अंतिम छूटा हुआ हिस्सा होगा, जिससे नरीमन पॉइंट से विरार और फिर पालघर तक निर्बाध, हाई-स्पीड आवाजाही संभव हो सकेगी। इस प्रोजेक्ट में उत्तन-विरार सी लिंक और इसके आगे वधावन बंदरगाह तक विस्तार शामिल है। यह एक पूरी तरह से एक्सेस-नियंत्रित एक्सप्रेसवे होगा जो दक्षिण मुंबई को वसई, विरार, पालघर और भारत के आगामी सबसे बड़े गहरे समुद्र बंदरगाह से जोड़ेगा।

मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटी
यह मुंबई-वधावन एक्सप्रेसवे कॉरिडोर (MVEC) क्षेत्र की पुरानी भीड़भाड़ वाली सड़कों और बढ़ते यात्रा समय की समस्या का समाधान करेगा। इस प्रोजेक्ट से भायंदर, उत्तन, वसई और विरार बेल्ट के साथ महत्वपूर्ण विकास क्षमता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही हर लिहाज से मुंबईकरों का सफर आरामदायक करेगा। ये सी-लिंक मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में लंबी दूरी की यात्रा को कैसे बदलेगा, आइए जानते हैं...
भारत का सबसे लंबा सी लिंक
उत्तन-विरार सी लिंक (UVSL) प्रोजेक्ट मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन के भीतर एक हाई-स्पीड, आठ-लेन वाला उत्तर-दक्षिण कोस्टल कॉरिडोर है। इसे भायंदर के पास उत्तन को विरार से 24.35 किलोमीटर के समुद्री पुल के माध्यम से जोड़ने की परिकल्पना की गई है। यह एक बड़ी योजना का पहला चरण है, जिसमें इस गलियारे को विरार से पालघर में आगामी गहरे ड्राफ्ट वाले वाधवन बंदरगाह तक और उत्तर की ओर विस्तारित किया जाएगा।
कितनी लागत से बनेगा ये कॉरिडोर
फर्स्ट फेज में कुल 55.12 किलोमीटर का क्षेत्र शामिल है, जिसमें सी लिंक और पहुँच मार्ग दोनों हैं। इसमें उत्तन और विरार के बीच 24.35 किलोमीटर का सी लिंक, 9.32 किलोमीटर का उत्तन कनेक्टिंग रोड, 2.5 किलोमीटर का वसई कनेक्टिंग रोड और 18.95 किलोमीटर का विरार कनेक्टिंग रोड शामिल है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 58,754 करोड़ रुपये है।
इसके लिए, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) को विदेशी ऋणदाताओं से 44,332 करोड़ रुपये जुटाने की अनुमति दी गई है, जिसमें जापान की JICA को प्राथमिक स्रोत के रूप में देखा जा रहा है। राज्य सरकार करों, भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास के लिए 11,116 करोड़ रुपये का योगदान देगी, जबकि MMRDA 3,306 करोड़ रुपये जोड़ेगी।
मिनटों में नरीमन पॉइंट से विरार पहुंचाएगा
यह नेटवर्क पूरी तरह से चालू मुंबई कोस्टल रोड, बांद्रा-वर्ली सी लिंक, निर्माणाधीन बांद्रा-वर्सोवा सी लिंक और वर्सोवा-भायंदर एलिवेटेड कोस्टल कॉरिडोर से मिलकर बनेगा। जब ये सभी खंड पूरे हो जाएंगे, तभी यात्री दक्षिण मुंबई से विरार तक एक निर्बाध, हाई-स्पीड तटीय मार्ग पर आसानी से यात्रा कर पाएंगे।
क्या यह सी लिंक दक्षिण मुंबई तक आवाजाही में सुधार करेगा?
उत्तन-विरार सी लिंक सीधे तौर पर दक्षिण मुंबई तक कनेक्टिविटी में सुधार नहीं करेगा। इसका महत्व इस तथ्य में निहित है कि यह पश्चिमी मुंबई के साथ एक निरंतर तटीय सड़क नेटवर्क बनाने की राज्य की दीर्घकालिक योजना का एक महत्वपूर्ण घटक है, जिससे शहर के चारों ओर एक रिंग रोड प्रभावी रूप से बन जाएगी।
सी लिंक मौजूदा किन समस्याओं को क्या हल करेगा?
एक बार जब पूरी तटीय श्रृंखला स्थापित हो जाएगी, तो सभी सी लिंक मिलकर वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे, एसवी रोड और लिंक रोड पर दबाव कम करने में मदद करेंगे, ये तीनों ही मार्ग नियमित रूप से भारी भीड़ का सामना करते हैं। वे वर्सोवा के उत्तर में तटीय कनेक्टिविटी में मौजूदा कमी को भी पूरा करेंगे, जहाँ वर्तमान में कोई सीधा तटीय मार्ग नहीं है।
45 मिनट में पहुंचाएगा विरार से दक्षिण मुंबई
आज, दूर उत्तरी उपनगरों और दक्षिण मुंबई के बीच यात्रा में 90 मिनट से दो घंटे तक का समय लग सकता है। कोस्टल कॉरिडोर के तैयार हो जाने के बाद यह समय काफी कम होने की उम्मीद है। विरार से दक्षिण मुंबई तक लगभग 45 से 55 मिनट लग सकते हैं, जबकि वसई या उत्तन से दक्षिण मुंबई तक की यात्रा 30 से 40 मिनट तक कम हो सकती है। वास्तविक समय विभिन्न तटीय सड़क लिंकों के पूरा होने पर निर्भर करेगा।
भायंदर, वसई और विरार के यात्रियों को मिलेगा लाभ
पहली बार, इन उपनगरों को दक्षिण मुंबई तक सीधी और तेज़ पहुँच मिलेगी। यात्री दहिसर और मीरा रोड पर भीड़भाड़ वाले जंक्शनों से बच सकेंगे, और रोज़गार केंद्रों, व्यापारिक जिलों और प्रमुख अस्पतालों तक तेज़ी से पहुँच प्राप्त कर सकेंगे। उत्तरी उपनगर मुंबई के प्राथमिक गतिशीलता नेटवर्क में बेहतर ढंग से एकीकृत हो जाएंगे।
सी लिंक मुंबई को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से कैसे जोड़ेगा?
विरार कनेक्टर सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ता है। इससे दिल्ली और गुजरात से लंबी दूरी का ट्रैफिक भीड़भाड़ वाले पश्चिमी उपनगरों से गुजरने के बजाय तटीय गलियारे के माध्यम से मुंबई में प्रवेश कर पाएगा। यह पश्चिमी भारत में माल ढुलाई की तेज़ और अधिक कुशल आवाजाही को भी सक्षम करेगा।
प्रोजेक्ट वाधवन बंदरगाह से कैसे जुड़ी है?
उत्तन-विरार सी लिंक प्रस्तावित तटीय एक्सप्रेसवे का दक्षिणी आधार बनाता है जो पालघर में वाधवन बंदरगाह तक और आगे बढ़ेगा। यह बंदरगाह और मुंबई के बीच एक सीधा, हाई-स्पीड माल ढुलाई मार्ग बनाएगा, जिससे उपनगरीय सड़कों के माध्यम से भारी मालवाहक वाहनों की आवाजाही कम होगी और लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार होगा।












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