Mumbai Ahmedabad Bullet Train: बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट अब पकड़ेगा रॉकेट वाली रफ्तार, चीन से भारत पहुंची मशीनें
Mumbai Ahmedabad Bullet Train: मुंबई अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर एक बड़ी अड़चन आखिरकार दूर हो गई है। लंबे समय से चीन में अटकी टनल बोरिंग मशीन (TBM) अब भारत पहुंच गई हैं। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्से-भूमिगत सुरंग-पर काम तेज होने की उम्मीद है। इन मशीनों के जरिए ही अंडरग्राउंड रेल लाइन बिछाने का काम पूरा होगा
अधिकारियों के अनुसार, दो अत्याधुनिक TBM मशीनें जवाहरलाल नेहरू पोर्ट पहुंच गई हैं। इन मशीनों का उपयोग बुलेट ट्रेन के भूमिगत कॉरिडोर के निर्माण में किया जाएगा। यह खेप कई महीनों तक जियो-पॉलिटिकल कारणों से चीन में फंसी रही थी। इस देरी की वजह से परियोजना की समयसीमा पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही थी।

Mumbai Ahmedabad Bullet Train: चीन से भारत पहुंची मशीनें
- सूत्रों के मुताबिक, पहली TBM का कटर हेड पहले ही सितंबर 2025 में मुंबई पहुंच चुका था, जबकि बाकी पुर्जे अब आए हैं। दूसरी मशीन के सभी हिस्से भी इसी खेप में शामिल हैं।
- यह उपकरण मार्च की शुरुआत में चीन से रवाना हुआ, चेन्नई बंदरगाह पहुंचा और 18 मार्च को मुंबई के लिए भेजा गया। इन मशीनों की असेंबली और परीक्षण के बाद लगभग तीन महीने में सुरंग की खुदाई शुरू होने की संभावना है।
- यह TBM मिक्सशील्ड तकनीक से लैस है, जो जटिल भू-आकृतियों और समुद्री इलाकों में खुदाई के लिए खास तौर पर डिजाइन की गई है।
Bullet Train Project: 7 किमी लंबी समुद्री सुरंग बनेगी
परियोजना का सबसे कठिन हिस्सा बांद्रा कुर्ला कॉमप्लेक्स (BKC) से शिलफाटा के बीच 20.37 किलोमीटर लंबा भूमिगत सेक्शन है। इसमें ठाणे क्रीक के नीचे लगभग 7 किलोमीटर लंबी समुद्री सुरंग भी शामिल है, जो इस प्रोजेक्ट को इंजीनियरिंग के लिहाज से बेहद जटिल बनाती है। यह पूरी परियोजना नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड विकसित कर रहा है। इसकी कुल लागत करीब 1.08 लाख करोड़ रुपये है। बुलेट ट्रेन को 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलाने के लिए डिजाइन किया गया है।
Mumbai Ahmedabad Bullet Train Update: भारत-चीन के बीच अहम करार
इस घटनाक्रम का एक अहम पहलू भारत और चीन के बीच हाल के समय में बेहतर होते आर्थिक संबंध भी हैं। सरकारी स्तर पर समन्वय और कूटनीतिक प्रयासों के चलते इन मशीनों की डिलीवरी संभव हो पाई। बताया जाता है कि अगस्त 2025 में शंघाई कॉर्पोरेशन आर्गनाइजेशन समिट के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच हुई बातचीत में भी इस मुद्दे को उठाया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि टीबीएम मशीनों के पहुंचने से अब परियोजना की गति तेज होगी और मुंबई के भूमिगत हिस्से का निर्माण समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी। यह भारत के पहले हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए एक महत्वपूर्ण प्रगति मानी जा रही है।












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