मुंबई में राज ठाकरे की पार्टी की क्या है रणनीति? MNS के इस दांव ने बढ़ाई शिवसेना की टेंशन?
Maharashtra Chunav 2024: राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) इसबार के विधानसभा चुनावों में मुंबई की 36 में से 25 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ रही है। 2024 के लोकसभा चुनावों में एमएनएस महायुति या एनडीए को समर्थन दे रही थी, लेकिन विधानसभा चुनाव में अचानक अकेले ही लड़ने का फैसला कर लिया। मायानगरी में राज ठाकरे की पार्टी ने जिस तरह से चुन-चुनकर सीटें तय की हैं, उसके पीछे कुछ खास रणनीति लग रही है।
मुंबई में बीते पांच वर्षों में एमएनएस का यह पहला चुनाव है। बीते दो दशकों में पार्टी का ग्राफ लगातार गिरता गया है। इसलिए बीएमसी चुनावों से पहले ये चुनाव उसकी भविष्य की राजनीति के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2009 के विधानसभा चुनावों में एमएनएस 13 सीटें जीती थी और 2019 में इसके विधायकों की संख्या खघटकर 1 रह गई थी।

हमारी सीटों के चुनाव में कोई पैटर्न नहीं- एमएनएस
मौजूदा चुनावों के बारे में पार्टी पदाधिकारी नितिन सारदेसाई का कहना है, 'हमने मेरिट के आधार पर उम्मीदवारों को चुना है और उन्हीं सीटों पर लड़ रहे हैं, जहां हम मजबूत हैं। इसमें कोई पैटर्न नहीं है। हमने यह नहीं देखा कि विरोधी उम्मीदवार कौन है, चाहे शिवसेना का है, कि बीजेपी का है या फिर कांग्रेस या एनसीपी का।'
वरिष्ठ भाजपा नेताओं के खिलाफ एमएनएस ने नहीं उतारे उम्मीदवार
जिन 25 सीटों पर एमएनएस चुनाव लड़ रही है, उनमें से 12 पर शिवसेना और 10 पर बीजेपी के भी उम्मीदवार हैं। लेकिन, सात ऐसी सीटें भी हैं, जहां भाजपा के वरिष्ठ नेता मैदान में हैं और वहां एमएनएस ने अपने प्रत्याशी नहीं उतारे हैं। जिन बीजेपी नेताओं के खिलाफ इसने प्रत्याशी नहीं उतारे हैं, वो सीटें हैं-
1) कोलाबा- विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर
2) बांद्रा वेस्ट- मुंबई बीजेपी के अध्यक्ष आशीष शेलार
3) मलाड वेस्ट- विनोद शेलार
4) मुलुंड- प्रदेश बीजेपी कोषाध्यक्ष मिहिर कोटेचा
5) अंधेरी वेस्ट- अमीत सातम
6) लोढ़ा (मालाबार हिल)- मंगल प्रभात
7) सायन कोलीवाड़ा- कैप्टन तमिल सेल्वन
बीजेपी से शिवसेना में आए नेताओं के खिलाफ भी टिकट नहीं
मजेदार बात ये है कि राज ठाकरे की पार्टी ने मुंबादेवी में शाइना एनसी और अंधेरी ईस्ट में मुर्जी पटेल के खिलाफ भी किसी को टिकट नहीं दिया है। ये दोनों नेता चुनाव लड़ने के लिए ही बीजेपी से ही 'सीटों के संतुलन' के तहत शिवेसना में आए हैं। हालांकि, इसने कलीना में अमरजीत सिंह के खिलाफ प्रत्याशी खड़ा कर दिया है, जो भाजपा से रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) में आए हैं।
हिंदुत्व और मराठीमानुष वोटों के विभाजन आशंका!
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एमएनएस की इस तरह की रणनीति से शिवसेना को झटका लग सकता है। 'सेना ने सेवरी में उम्मीदवार नहीं दिए हैं, लेकिन एमएनएस वर्ली, माहिम, मागाठाणे, कुर्ला, चांदीवली, भांडुप और विक्रोली में उम्मीदवार उतारे हैं। क्योंकि, एकनाथ शिंदे और एमएनएस दोनों ही हिंदुत्व और मराठी मानुष वाली विचारधारा से हैं, इससे वोटों के विभाजन की आशंका है।....'
सेवरी सीट पर महायुति गठबंधन में से किसी ने भी प्रत्याशी नहीं दिए हैं। इस तरह से एमएनएस वहां स्वतंत्र रूप से एमवीए के साथ सीधी लड़ाई में बताई जा रही है। पार्टी हर सीट पर जोरदार प्रचार में जुटी है। ऐसे में यह महायुति और कुछ हद तक महा विकास अघाड़ी (MVA) के वोट बैंक में भी सेंध लगा सकती है।
वर्ली और माहिम में 'शिवसैनिकों' के बीच ही जंग
इन सीटों में दो सीटें बहुत ही हाई-प्रोफाइल हैं। वर्ली और माहिम। इन सीटों पर शिवसेना, शिवसेना (यूबीटी) और एमएनएस की वजह से मुकाबला त्रिकोणीय हो चुका है। वर्ली में यूबीटी से उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे हैं तो माहिम से राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे, जिनके पीछे उपमुख्यमंत्री और भाजपा के दिग्गज देवेंद्र फडणवीस भी खड़े हैं।
मुंबई में राज ठाकरे की पार्टी की क्या है रणनीति?
कुल मिलाकर एमएनएस की चुनावी रणनीति से सवाल उठता है कि क्या कम से कम मुंबई में उसकी बीजेपी के साथ कोई डील हो चुकी है? यही नहीं, सीएम शिंदे की शिवसेना से उसका संघर्ष उसी रणनीति का हिस्सा है या फिर वास्तविक लड़ाई लड़ी जा रही है?












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