महाराष्ट्र सरकार में अजित गुट को मिले 7 मंत्रालय, पवार के खाते में आए वित्त और योजना
Maharashtra portfolio allocation, महाराष्ट्र की सियासत में हर दिन नया घटनाक्रम देखने को मिल रहा है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार के बीच करीब डेढ़ घंटे तक विभागों के बंटवारे को लेकर बैठक हुई।
सीएम शिंदे ने एनसीपी के नवनियुक्त मंत्रियों के विभागों के बंटवारे पर अंतिम मुहर लगा दी है। एनसीपी के खाते में वित्त मंत्रालय मिलाकर कुल सात विभाग आए हैं। जिनमें योजना,खाद्य और नागरिक आपूर्ति, सहकारी समितियां, महिला और बाल विकास, कृषि, राहत और पुनर्वास, चिकित्सा शिक्षा मंत्रालय शामिल हैं।

महाराष्ट्र के नवनियुक्त डिप्टी सीएम अजीत पवार को वित्त और योजना विभाग मिला है। वहीं कैबिनेट मंत्री छगन भुजबल को खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री बनाए गए हैं। हसन मुश्रीफ को चिकित्सा शिक्षा, धर्मराव अत्राम को खाद्य एवं औषधि प्रशासन, अनिल भाईदास पाटिल को खेल मंत्रालय दिया गया है।
कैबिनेट मंत्री अनिल पाटिल को राहत और पुनर्वास, आपदा प्रबंधन विभाग, अदिति सुनील तटकरे को महिला एवं बाल विकास, धनंजय मुंडे को कृषि और दिलीप वाल्से पाटिल को राजस्व, पशुपालन और डेयरी विकास विभाग मिला है।
मंत्रालयों के नए आवंटन के बाद राज्य की कैबिनेट की स्थिति बदल गई है। चार प्रतिष्ठित विभागों शहरी विकास, गृह, वित्त और राजस्व में से मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के पास केवल इनमें से एक मंत्रालय बचा है। सीएम एकनाथ शिंदे को अपना कृषि विभाग गंवाना पड़ा है।
कई दिनों तक चली रस्साकशी के बाद अजीत पवार वित्त और योजना, खाद्य और नागरिक आपूर्ति, सहकारी समितियां, महिला और बाल विकास, कृषि, राहत और पुनर्वास और चिकित्सा शिक्षा विभाग लेने में सफल रहे।
माना जा रहा है कि, इन विभागों के बंटवारे के बाद शिंदे गुट में नाराजगी देखने को मिल रही है। दरअसल शिवसेना अजित पवार को फिर से वित्त मंत्रालय देने के पक्ष में नहीं थी। जिसके लेकर उन्होंने पहले भी नाराजगी जाहिर की थी। शिंदे गुट के विधायक भरत गोगावले और प्रहार पार्टी के विधायक बच्चू कडू के नेतृत्व में शिवसेना विधायकों ने अजित पवार का कड़ा विरोध किया था।
अजित पवार गुट वित्त के साथ ही सहकारिता मंत्रालय को लेकर आक्रामक था। जिसकी वजह ये है कि, दर्जन भर से अधिक एनसीपी नेता सहकारी या निजी चीनी कारखाने चला रहे हैं। ऐसे में वे चाह रहे थे कि एनसीपी सहकारिता मंत्रालय ले ताकि उनकी परेशानिया आसानी से हल हो सकें, इसके अलावा सहकारी बैंकों में भी एनसीपी के नेताओं का दबदवा है।
बता दें कि 2 जुलाई को अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री और छगन भुजबल, दिलीप वलासे पाटिल, हसन मुश्रीफ, धनंजय मुंडे, संजय बनसोडे, अदिति तटकरे और धर्मरावबाबा अत्राम ने मंत्री पद की शपथ ली












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