Maharashtra politics: अजित पवार बने डिप्टी सीएम, NCP से हुए अलग, क्या हुआ पीछे पूरा खेल, जानिए पूरी टाइमलाइन
Maharashtra politics Ajit Pawar: महाराष्ट्र की राजनीति में फिर से एक बड़ा उलटफेर हो गया है। शरद पवार द्वारा सुप्रिया सुले और प्रफुल्ल पटेल को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) का कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के तीन हफ्ते बाद 02 जुलाई को अजीत पवार ने कम से कम 29 विधायकों के समर्थन के साथ एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फड़नवीस की महाराष्ट्र सरकार में शामिल हो गए हैं।
अजित पवार ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में राजभवन में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। लेकिन ऐसा नहीं है कि ये उलटफेर अचानक या कुछ दिनों में हुआ है।

अजित पवार के विद्रोह की अफवाहें महीनों से फैल रही हैं और हर बार शरद पवार को स्थिति में सुधार करते देखा गया है। हालांकि पार्टी में अजित पवार को धीरे-धीरे किनारे किए जाने से उनकी नाराजगी किसी से छिपी नहीं थी। हालांकि अजित पवार बीते दिनों में इन सभी अफवाहों को खारिज करते रहे हैं।
टाइमलाइन: जानिए कब से NCP में आई दरारा...
अक्टूबर 2019: अजित पवार ने भाजपा को NCP का समर्थन देते हुए उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। फड़नवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। सरकार थोड़े समय के लिए ही चल पाई क्योंकि एनसीपी, कांग्रेस और अविभाजित शिवसेना ने गठबंधन बनाकर सरकार बनाई।
2019 से 2022: शिंदे-फड़नवीस की सरकार बनने से पहले तक अजित पवार महा विकास अघाड़ी सरकार के उपमुख्यमंत्री बने रहे।
2022-2023: शिंदे और फड़नवीस की सरकार बनने के बाद अजित पवार विधानसभा में विपक्ष के नेता बने।
अप्रैल 2023 में अफवाहें फैलने लगीं कि अजित पवार भाजपा-शिंदे सेना को समर्थन देंगे। अजित पवार NCP के कई कार्यक्रमों से दूर रहने लगे। इधर दूसरी ओर अजित पवार ने पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ में कई बयान जारी किए लेकिन साथ ही यह भी कहा कि वह कभी भी एनसीपी नहीं छोड़ेंगे।
मई 2023: शरद पवार ने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफे देने की घोषणा की। माना जा रहा था कि अजित पवार की नजर इस पद पर है। लेकिन कुछ दिन बाद शरद पवार ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया।
जून 2023: शरद पवार ने सुप्रिया सुले और प्रफुल्ल पटेल को पार्टी का संयुक्त कार्यकारी अध्यक्ष बनाया। वहीं अजित पवार को पार्टी में कोई पद नहीं दिया गया। अजित पवार ने खुले तौर पर कहा कि वह पार्टी में पद चाहते हैं, विधानसभा में विपक्ष के नेता की भूमिका नहीं। इसके बाद से ही अजीत पवार पार्टी से नाराज रहने लगे।
जुलाई 2023: अजीत पवार ने महाराष्ट्र सरकार को समर्थन दिया और 2 जुलाई को संयुक्त डिप्टी सीएम के रूप में शपथ ले ली।












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