महाराष्ट्र मामले में फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से राहत, अदालत ने स्पीकर को विधायकों पर फैसला लेने से रोका
नई दिल्ली, 11 जुलाई: महाराष्ट्र में चल रहा सियासी संकट भले ही एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री बनने के साथ खत्म हो चुका हो, लेकिन दोनों की गुटों में वर्चस्व की लड़ाई जारी है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में विधायकों की अयोग्यता को लेकर दाखिल याचिका पर चीफ जस्टिस ने कहा कि फिलहाल महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर इस पर फैसला नहीं लेंगे। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान विधानसभा अध्यक्ष से विधायकों के मामले में कोई भी फैसला लेने से मना किया है, जिसके बाद दोनों गुटों के विधायकों को राहत मिली है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष को सूचित करने के लिए कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका पर फैसला नहीं किया जाता है, तब तक कोई निर्णय न लें। अदालत ने कहा है कि इस मामले में एक बेंच के गठन की आवश्यकता होगी और सूचीबद्ध होने में कुछ समय लगेगा। मामला कल सूचीबद्ध नहीं किया जाएगा।
जानिए क्या होगा फैसले का असर
वहीं इस अदालत के फैसले के बारे में देखे को अगर उद्धव ठाकरे के पक्ष कोर्ट गया तो महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा फिर से बदल सकती है। इस सुनवाई से शिवसेना का भविष्य भी तय होगा। क्योंकि विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर ने शिंदे गुट के बागी विधायकों को अलग टीम की मान्यता दे दी है। ऐसे में अगर अदालत इसे रद्द करता है, तो उद्धव गुट को राहत मिलेगी। वहीं, अगर कोर्ट ने शिंदे के गुट के पक्ष में फैसला सुनाया तो शिवसेना के पार्टी सिंबल की लड़ाई और बढ़ जाएगी।
कुल तीन याचिकाएं है, जिसमें पहली 16 बागी विधायकों की सदस्यता रद्द करने के फैसले, शिवसेना के शिंदे गुट को अलग मान्यता, शिंदे को सीएम बनाने के फैसले पर है।
सुनवाई से पहले संजय राउत का बयान
वहीं सुनवाई से पहले शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि जिस तरह से महाराष्ट्र में एक सरकार को थोपा, वह पूरी तरह से अवैध है। यह सरकार संविधान के मुताबिक नहीं बनी है। यह विधायकों के अयोग्य होने का मुद्दा है। सर्वोच्च न्यायालय में एक फैसला हो रहा है, उससे पता चलेगा कि देश में संविधान, कानून है या उसकी हत्या हो चुकी है।












Click it and Unblock the Notifications