महाराष्ट्र में पूरा सियासी खेल बदल सकते हैं ये 29 विधायक, जानिए पर्दे के पीछे की पूरी कहानी
मुंबई, 22 जून। महाराष्ट्र में सियासी संकट मंडरा रहा है। उद्धव ठाकरे की सरकार के खिलाफ विधायकों ने बगावत कर दी है। शिवसेना के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री एकनाथ शिंदे तकरीबन 40 विधायकों के साथ असम के गुवाहाटी चले गए हैं। एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद प्रदेश में महाविकास अघाड़ी सरकार का सियासी गणित बिगड़ गया। उद्धव सरकार के सियासी संकट के बीच भारतीय जनता पार्टी ने भी अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। ऐसे में निर्दलीय विधायकों और छोटे दलों के विधायकों की भूमिका काफी अहम हो गए हैं।

बहुमत का गणित
प्रदेश मे निर्दलीय और छोटे दलों के कुल 29 विधायक हैं, लिहाजा महाराष्ट्र में सियासी संकट के बीच इन विधायकों की भूमिका काफी अहम हो गई है। प्रदेश में विधानसभा की कुल 288 सीटें हैं, लेकिन शिवसेना के विधायक रमेश लटके की मृत्यु के बाद विधानसभा में 287 सदस्य हैं, ऐसे में सरकार बनाने के लिए 144 विधायकों का समर्थन जरूरी है। किसी भी पार्टी को प्रदेश में सत्ता में बने रहने के लिए 144 विधायकों के समर्थन की जरूरत है। महाविकास अघाड़ी में एनसीपी,कांग्रेस और शिवसेना साथ हैं और 30 नवंबर 2019 को जब सरकार बनी तो इनके पास कुल 169 विधायक थे।

क्या है नंबर गेम
शिवसेना के पास मौजूदा समय में 55 विधायक हैं, एनसीपी के पास 53 विधायक और कांग्रेस के पास 44 विधायक हैं। वहीं भाजपा की बात करें तो उसके पास 105 विधायक हैं। लेकिन उपचुनाव में जीत के बाद भाजपा के पास कुल 106 विधायक हो गए हैं। प्रदेश में 13 निर्दलीय विधायक हैं। इसमे से एक विधायक राजेंद्र पाटिल येदरावकर अघाड़ी सरकार में मंत्री हैं, उन्हें शिवसेना के कोटे से मंत्री बनाया गया है। इसी तरह से शंकरराव गडाख, बाचू कादू भी शिवसेना के कोटे से मंत्री हैं। 13 निर्दलीय विधायकों में से 6 विधायक भाजपा के समर्थन में हैं। 5 ने शिव सेना को अपना समर्थन दिया है, कांग्रेस और एनसीपी के पास एक 1-1 निर्दलीय विधायक का समर्थन है।

आसान नहीं होगा समर्थन हासिल करना
जनशक्ति पार्टी के विधायक विनय कोरे, राष्ट्रीय समाज पक्ष रत्नाकर गट्टे भी भाजपा के समर्थन में हैं। देवेंद्र भूयर, श्यामसुंदर शिंदे एनसीपी का समर्थन कर रहे हैं। राज्यसभा चुनाव की बात करें प्रदेश में 6 सीटों पर चुनाव हुआ था, जिसमे एआईएमआईएम, सपा के 2-2 विधायकों ने कांग्रेस का समर्थन किया था, जबकि बहुजन विकास अघाड़ी के तीन विधायकों ने भाजपा का समर्थन किया था। ऐसे में प्रदेश के सियासी संकट में इन छोटे दलों के विधायक और निर्दलीय विधायकों का रुख अहम होगा।












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