महाराष्ट्र में चुनाव से पहले शिंदे सरकार का बड़ा फैसला, देशी गाय को 'राज्यमाता गौमाता' का दर्जा
महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से पहले महायुति सरकार ने बड़ा कार्ड खेला है। सीएम शिंदे ने गाय के संरक्षण को बढ़ावा देते हुए राज्यमाता का दर्जा देने का निर्णय लिया है। प्रदेश सरकार ने अपने आदेश में कहा है कि वैदिक काल से भारतीय संस्कृति में देशी गाय की स्थिति, मानव आहार में देशी गाय के दूध की उपयोगिता, आयुर्वेद चिकित्सा, पंचगव्य उपचार पद्धति तथा जैविक कृषि प्रणालियों में देशी गाय के गोबर एवं गोमूत्र का प्रयोग होता आ रहा है। ऐसे में देशी गायों को राज्यमाता गोमाता का दर्जा दिया जाता है।
महायुति सरकार ने सोमवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में ये अहम फैसला लिया। जिसके तहत देसी गायों के पालन-पोषण के लिए 50 रुपये प्रतिदिन की सब्सिडी योजना लागू करने का निर्णय लिया गया। यह योजना महाराष्ट्र गोसेवा आयोग द्वारा ऑनलाइन लागू की जाएगी। महाराष्ट्र के सभी जिलों में एक गोशाला सत्यापन समिति का गठन किया जाएगा, जो गौसंरक्षण के लिए रिपोर्ट तैयार करेगी।

दरअसल, 2019 में हुई पशुगणना के मुताबिक देसी गायों की संख्या 46,13,632 तक कम पाई गई है। ऐसे में शिंदे सरकार के इस फैसले को महाराष्ट्र में गौसंरक्षण के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।
बता दें महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल 26 नवंबर को खत्म हो रहा है। ऐसे में महायुति सरकार का देसी गायों को लेकर फैसला अहम माना जा रहा है। शिंदे सरकार के निर्णय से ठीक दो दिन पहले चुनाव आयोग की टीम ने महाराष्ट्र में चुनावी तैयारियों का जायजा लिया है।
सरकार के निर्णय को लेकर डिप्टी सीएम देवेंद्र फड़नवीस ने कहा, "स्वदेशी गायें हमारे किसानों के लिए वरदान हैं। इसलिए, हमने उन्हें यह (राज्य माता) दर्जा देने का फैसला किया है। हमने स्वदेशी गायों के पालन-पोषण के लिए मदद देने का भी फैसला किया है।"












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