महाराष्ट्र के गवर्नर भगत सिंह कोश्यारी के 'इस्तीफे पर विचार' का सच क्या है ?

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के बारे में राजभवन के एक सूत्र ने कहा है कि वह उम्र और स्वास्थ्य कारणों से अपना पद छोड़ना चाहते हैं। वैसे, आधिकारिक तौर पर राजभवन ने इस्तीफे की अटकलों को खारिज किया है।

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी अपने बयानों की वजह से कई बार विवादों में आ चुके हैं। इस बार उन्होंने मराठा सम्राट छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर ऐसा बयान दिया कि गैर-भाजपा दलों को एक नई ऊर्जा मिल गई। उन्होंने उनके बयान को लेकर महाराष्ट्र और केंद्र सरकार को बैकफुट पर ढकेलने की कोई कोशिश नहीं छोड़ी है। इस बीच ऐसी खबरें भी आई हैं कि राज्यपाल खुद ही इस्तीफा देने की सोच रहे हैं, जिसका राजभवन ने औपचारिक तौर पर खंडन भी कर दिया है। सवाल है कि इस तरह की अटकलें क्यों लग रही हैं ? आखिर इसके पीछे की सच्चाई क्या है?

अपने पद से मुक्ति चाहते हैं राज्यपाल कोश्यारी ?

अपने पद से मुक्ति चाहते हैं राज्यपाल कोश्यारी ?

महान मराठा सम्राट छत्रपति शिवाजी महाराज पर महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के बयान से छिड़ा विवाद शांत नहीं हो रहा है। शिवसेना (उद्धव ठाकरे), एनसीपी और कांग्रेस हाथ आए मौके को आसानी से गंवाने नहीं देना चाहती हैं। उन्होंने राज्यपाल कोश्यारी के खिलाफ अपना अभियान जारी रखा है। इस बीच द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक अब खुद राज्यपाल ही अपने पद पर नहीं बने रहना चाहते हैं। दावे के मुताबिक उन्होंने अपनी यह इच्छा कुछ करीबियों और परिचितों के सामने जाहिर भी की हैं। वैसे इसका कारण कुछ अलग बताया जा रहा है।

उम्र और स्वास्थ्य की वजह से पद छोड़ना चाहते हैं-सूत्र

उम्र और स्वास्थ्य की वजह से पद छोड़ना चाहते हैं-सूत्र

रिपोर्ट के मुताबिक राजभवन के एक सूत्र ने कहा है कि 'हां, अपनी उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए वह इस पद से मुक्त होना चाहते हैं और पिछले कुछ महीनों से इसके बारे में अपने करीबियों और कुछ अधिकारियों से साझा भी कर रहे हैं। इसका शिवाजी महाराज पर उनकी टिप्पणी को लेकर जारी विवाद या शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की ओर से बुलाई गई बंद से कोई लेना-देना नहीं है।' 80 साल के भगत सिंह कोश्यारी जबसे महाराष्ट्र के राज्यपाल नियुक्त हुए हैं, राजनीतिक तौर पर कई बार गैर-भाजपा दलों के निशाने पर आ चुके हैं। खासकर जब उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली महा विकास अघाडी की सरकार थी, तब राजभवन और मुख्यमंत्री के कार्यालय का रिश्ता बहुत ही खराब नजर आता था।

राजभवन ने इस्तीफे पर विचार की बात खारिज की है

राजभवन ने इस्तीफे पर विचार की बात खारिज की है

हालांकि, महाराष्ट्र के राजभवन ने आधिकारिक तौर पर गर्वनर के द्वारा इस्तीफे पर विचार किए जाने की खबरों को आधारहीन बताया है। वैसे एनसीपी नेता और महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता अजित पवार ने भी हाल ही में दावा किया था कि कई मौकों पर राज्यपाल ने निजी तौर पर पद से मुक्ति पाने की इच्छा जताई थी। पवार ने दावा किया, 'उन्होंने (कोश्यारी ने) मुझसे कहा कि वह पद छोड़ना चाहते हैं।' पवार ने यहां तक दावा किया था कि गवर्नर जानबूझकर ऐसे विवादित बयान देते थे, ताकि केंद्र सरकार उन्हें राज्य से शिफ्ट कर दे।

'मुझसे हमेशा कहा कि वह महाराष्ट्र छोड़ना चाहते हैं'

'मुझसे हमेशा कहा कि वह महाराष्ट्र छोड़ना चाहते हैं'

अजित पवार ने कहा, 'जब भी राज भवन में मैं उनसे मिला, उन्होंने मुझसे हमेशा कहा कि वह महाराष्ट्र छोड़ना चाहते हैं। जब भी किसी सरकारी पदाधिकारी को उसकी इच्छा के खिलाफ किसी पद पर पदस्थापित किया जाता है, वह कुछ विवाद खड़ा करते हैं, ताकि सरकार ट्रांसफर आदेश जारी करने को मजबूर हो जाए। मैं नहीं कह सकता कि वो (कोश्यारी) यहां पर वैसा ही करना चाह रहे हैं।'

विपक्ष के निशाने पर हैं राज्यपाल

विपक्ष के निशाने पर हैं राज्यपाल

राज्यपाल कोश्यारी के इस्तीफे पर चल रही अटकलों के बारे में शिवसेना सांसद और उद्धव ठाकरे के वफादार नेता संजय राउत ने कहा, 'माननीय राज्यपाल ने इस्तीफे की पेशकश की है....बहुत बढ़िया है! लगता है कि महाराष्ट्र बंद के आयोजन का शिवसेना के संकेत का नतीजा दिखा रहा है। फिर भी महाराष्ट्र के दुश्मनों के साथ लड़ाई जारी रहेगी।' एनसीपी चीफ शरद पवार और उद्धव ठाकरे भी छत्रपति शिवाजी महाराज पर कोश्यारी की टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं और उनके ट्रांसफर करने या इस्तीफा की मांग कर चुके हैं।

शिवाजी महाराज पर दिया था बयान

शिवाजी महाराज पर दिया था बयान

दरअसल, इसी महीने राज्यपाल ने एक कार्यक्रम में महान मराठा सम्राट छत्रपति शिवाजी महाराज को 'पुराने जमाने का आदर्श' बताया था। उन्होंने कहा था कि नए जमाने के आदर्श डॉक्टर अंबेडकर और नितिन गडकरी हैं। इसी टिप्पणी पर महाराष्ट्र की राजनीति में उबाल आ गई। भाजपा नेताओं ने राज्यपाल की बातों को संभालने की बहुत कोशिश की है, लेकिन विपक्ष इसे भुनाने को मौका गंवाने के लिए तैयार नहीं है।

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