Maharashtra Chunav: गायब दिख रहे हैं कृषि से जुड़े मुद्दे! तो 'किसानों' ने खुद बनाया अपना 'मेनिफेस्टो'
Maharashtra Chunav 2024: महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में इसबार किसानों से जुड़े मुद्दे उस तरह से प्रभावी नजर नहीं आ रहे हैं, जिसकी संभावनाएं हमेशा रहती हैं। जबकि, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का मुद्दा हो या सिंचाई की समस्या या फिर लोन माफी का। ये सारे मुद्दे आज भी ज्वलंत हैं। लेकिन, कोई भी बड़ा राजनीतिक दल इसपर उस तरह से हाय-तौबा नहीं कर रहा है, जो अक्सर चुनावों के दौरान देखा जाता है।
चुनावी माहौल में सियासी दलों की राजनीतिक बेरुखी के बीच कुछ किसान संगठनों ने किसानों की परेशानियों को सामने रखने के लिए खुद ही मिल बैठ कर एक 'किसान मेनिफेस्टो' तैयार किया है। यह मेनिफेस्टो किसान मजदूर आयोग और नेशन फॉर फार्मर्स ने तैयार किया है।

महाराष्ट्र में राजनीतिक दलों के लिए 'किसान मेनिफेस्टो'
इस 'किसान मेनिफेस्टो' में कृषि संकट पर ध्यान देने, शेतकारी कामगार आयोग या कृषि कल्याण आयोग बनाने, नकदी फसलों के एमएसपी में 20% बोनस की बढ़ोतरी, आत्महत्या-पीड़ित किसान परिवार से बकाया कृषि लोन की माफी, सभी फसलों के लिए लाभकारी मूल्य, पानी का समान वितरण जैसी मांगों पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का प्रस्ताव रखा गया है।
यह घोषणापत्र कई कृषि संगठनों राज्य के विभिन्न इलाकों के किसानों की चिंताओं को समझने वाले विशेषज्ञों की राय पर दो दिनों तक मंथन के बाद तैयार किया गया है। जिन लोगों की राय इसमें शामिल की गई है, उनमें महिला किसान, आदिवासी किसान के अलावा विदर्भ क्षेत्र के किसान भी शामिल हैं।
सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के साथ यह मेनिफेस्टो साझा किया गया है और साथ ही अपील की गई है कि वह इनकी मांगों को अपने चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाएं।
महाराष्ट्र की नई सरकार के लिए डिमांड की लिस्ट तैयार
किसान मेनिफेस्टो में कहा गया है,'शेतकारी कामगार आयोग या कृषि कल्याण आयोग एक वैधानिक संस्था होगी और इसमें सिर्फ सरकारी अधिकारी ही शामिल नहीं होंगे, बल्कि कृषि क्षेत्र के जाने-माने स्वतंत्र विशेषज्ञ भी रहेंगे। कोई भी नई, आने वाली सरकार कृषि संकट और इससे जुड़े मुद्दों पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने के लिए प्रतिबद्ध रहे।'
'किसान मेनिफेस्टो' या चुनावी संदेश?
'किसान मेनिफेस्टो' में यह भी कहा गया है कि 'नई सरकार को महाराष्ट्र में कपास, सोयाबीन और गन्ने जैसे कैश क्रॉप के लिए मौजूदा और पूरी तरह से अपर्याप्त एमएसपी को 20% बोनस के साथ पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए। तमिलनाडु और केरल में लंबे समय से यह प्रक्रिया चली आ रही है, जहां राज्य अपनी जरूरतों के हिसाब से केंद्रीय एमएसपी में रकम जोड़ देते हैं। (राजस्थान, एमपी और छत्तीसगढ़ में वहां के विधानसभा चुनावों के दौरान धान के लिए 30% और गेहूं के लिए 20% बोनस की घोषणा 'पीएम गारंटी' के तौर पर की गई थी। महाराष्ट्र में भी वही व्यवस्था क्यों नहीं)?'
हालांकि, इस 'किसान मेनिफेस्टो' का जो टोन है, उसमें चुनावी संदेश भी छिपा हो सकता है। मसलन, इसमें कहा गया है कि पूर्ववर्ती एमवीए सरकार के दौरान 36,000 रुपए की लोन माफी दी गई थी। उसे फिर से शुरू करने की वकालत की गई है। इसके अनुसार कृषि लोन हर किसान का अधिकार है।
सभी फसलों के लिए लाभकारी मूल्य की मांग
इसके साथ ही सभी फसलों के लिए लाभकारी मूल्यों की जरूरत पर जोर देते हुए इस घोषणापत्र में यह भी मांग की गई है कि बाजरा, दालों, सब्जियों, फल, दूध और अन्य ऐसे योग्य कृषि उत्पादों सहित सभी फसलों के लिए लाभकारी मूल्य दिए जाने चाहिए ताकि महाराष्ट्र के किसान सीमित जल प्रबंधन से 'विकसित फसल प्रणाली' की ओर बढ़ सकें।
कृषि और किसानी से आगे तक की लिस्ट है तैयार
मंदिर ट्रस्ट की जमीनों पर खेती करने वाले किसानों को उसका मालिकाना हक देने की मांग भी 'किसान मेनिफेस्टो' में शामिल है। इनके अलावा सिंचाई के लिए बिजली की निर्बाध सप्लाई जैसी मांगों को भी इस लिस्ट में प्राथमिकता दी गई है।
किसान संगठनों की ओर से अपने घरों और खेतों में भी काम करने वाली महिलाओं को भी 5,000 रुपए बतौर मुआवजा दिए जाने की वकालत की गई है।
अब खासकर इस चुनाव में मुकाबला कर रहे दोनों ही प्रमुख गठबंधन, सत्ताधारी महायुति और विपक्षी महा विकास अघाड़ी इस मेनिफेस्टो को किस अंदाज में स्वीकार करते हैं यह चुनाव प्रचार के बचे हुए दिनों में ही देखने को मिल सकता है।












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