Maharashtra Elections: BJP का 10 साल से कैसा रहा है जनाधार? पढ़िए सबसे बड़ी पार्टी बनने के दावे की हकीकत
Maharashtra Chunav 2024: 2019 के विधानसभा चुनाव में महाराष्ट्र में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और उसका वोट शेयर भी सबसे ज्यादा था। लेकिन, इस बार के लोकसभा चुनावों में सबसे अधिक सीटों पर लड़कर भी भाजपा का प्रदर्शन बहुत ही निराशाजनक रहा। ऐसे में एक सियासी संदेश यह निकाला गया है कि बीजेपी अब एक महत्वपूर्ण राज्य में पहले जितनी ताकतवर नहीं रह गई है। लेकिन, वनइंडिया का विश्लेषण इस धारणा से अलग है, जो कि तथ्यों पर आधारित है।
महाराष्ट्र में भाजपा को मिल रहे हैं सबसे ज्यादा वोट
2024 के लोकसभा चुनावों में महाराष्ट्र की 48 सीटों में से सत्ताधारी महायुति की ओर से 28 सीटों पर लड़कर भी बीजेपी सिर्फ 9 ही सीटें जीत सकी। वहीं विपक्षी एमवीए की ओर से 17 सीटों पर लड़कर ही कांग्रेस ने 13 सीटें जीतकर सबको पछाड़ दिया। लेकिन, तथ्य यह है कि बीजेपी का वोट शेयर फिर भी 26.2% के आंकड़े पर कायम रहा, जो की सबसे ज्यादा है। वहीं कांग्रेस सीटें जरूर ज्यादा जीती, लेकिन उसे मात्र 16.9% वोट ही मिल सके।

2014 में जबसे भाजपा को महाराष्ट्र में 'मोदी लहर' का लाभ मिला है, उसका जनधार सबसे बड़ा हो चुका है। उसके बाद जितने भी चुनाव हुए हैं, बीजेपी को सबसे ज्यादा वोट मिलते रहे हैं। इस साल लोकसभा चुनावों में बीजेपी की सहयोगी एकनाथ शिंदे की शिवसेना 15 सीटों पर लड़कर 7 सीटें जीती और उसका वोट शेयर 13% रहा। वहीं अजित पवार की एनसीपी ने 4 सीटों पर चुनाव लड़ी और 3.6% वोट जुटाए।
दूसरी तरफ विपक्षी गठबंधन की ओर से उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) ने 21 सीटों पर चुनाव लड़कर 9 सीटें जीतीं और उसका वोट शेयर 16.7% रहा। जबकि, शरद पवार की एनसीपी (एससीपी) ने 10 सीटों पर लड़कर 8 सीटें जीतीं और 10.3% वोट प्राप्त किए।
लोकसभा चुनाव में भाजपा की सीटें घटीं, वोट शेयर लगभग कायम
मतलब, भाजपा पिछले लोकसभा चुनावों के मामले में 23 के आंकड़े से नीचे जरूर गिरी है, लेकिन पिछली बार के 27.8% वोट शेयर के नजदीक ही उसका जनाधार अब भी कायम है। कांग्रेस तब 1 सीट जीती थी और उसका वोट शेयर तब भी 16.4% ही रहा। उस समय अविभाजित शिवसेना को 23.5% और एनसीपी को15.7% वोट मिले थे।
लोकसभा चुनावों में क्यों बिगड़ा बीजेपी का गणित?
भाजपा नेताओं का कहना है कि दरअसल, इस बार के लोकसभा चुनावों में हुआ ये कि वह एक निर्वाचन क्षेत्र में अधिकतर विधानसभा क्षेत्रों भले ही बढ़त बनाए रही, किसी एक या दो विधानसभा क्षेत्रों में उसके खिलाफ इस तरह से एकतरफा वोटिंग हुई कि अंतिम परिणाम उसके खिलाफ चला गया।
मसलन पार्टी के एक नेता ने कहा, 'अच्छे वोट प्रतिशत के बावजूद हमारे नंबर घट गए, क्योंकि हम कुछ लोकसभा सीटों में से एक या दो विधानसभा क्षेत्रों में बुरी तरह से पीछे रह गए, जबकि बाकी विधानसभा क्षेत्रों में आगे रहे। इससे हमारी संख्या घट गई, लेकिन हमारा वोट शेयर कायम रहा।'
धुले लोकसभा सीट क्यों हारी बीजेपी?
उन्होंने धुले लोकसभा सीट का उदाहरण देकर बताया, '6 विधानसभा क्षेत्रों में से हम 5 में आगे थे, लेकिन मालेगांव सेंट्रल विधानसभा क्षेत्र में बुरी तरह से पिछड़ गए, इसकी वजह से सिर्फ 3,000 वोटों से हम हार गए।'
दरअसल, धुले लोकसभा सीट पर भाजपा के सुभाष भाम्रे को पांच विधानसभा क्षेत्रों में 93,000 से लेकर 1.41 लाख तक वोट मिले थे, लेकिन मालेगांव सेंट्रल में उन्हें मात्र 4,542 वोट मिले। वहीं इस क्षेत्र में कांग्रेस की शोभा बछाव को 1.98 लाख वोट मिले और इस वजह से भाजपा प्रत्याशी 5 विधानसभा सीटों पर लीड करने के बाद भी 3,831 वोटों से हार गए। अनुमानों के मुताबिक मालेगांव सेंट्रल विधानसभा क्षेत्र में मुसलमान वोटरों की संख्या लगभग 78% से अधिक है।
2014 लोकसभा चुनावों से ही रहा है भाजपा के पक्ष में ट्रेंड
अब 2014 के लोकसभा चुनावों से महाराष्ट्र में भाजपा को मिले वोटों पर नजर डाल लेते हैं, तो उसके जनाधार पर स्थिति और भी साफ हो सकती है। तब पार्टी 24 सीटों पर लड़ी थी और मोदी लहर की वजह से 23 सीटें जीत गई थी। तब भी पार्टी का वोट शेयर 27.6% था। उस चुनाव में कांग्रेस को 18.3%, एनसीपी को 16.1% और शिवसेना को 20.8% वोट मिले थे।
2019 और 2014 के विधानसभा चुनावों में भाजपा गठबंधन में भी चुनाव लड़ी या अकेले ही मैदान में उतरी तो भी उसका वोट शेयर सबसे ज्यादा था। 2019 में वह 164 सीटों पर लड़ी तो 25.8% वोट आया। वहीं कांग्रेस को 15.9%, एनसीपी को 16.7% और शिवसेना को 16.4% वोट मिले।
2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा अकेले मैदान में थी। वह 260 सीटों पर लड़ी और फिर भी उसका वोट शेयर सबसे ज्यादा 27.8% रहा था। तब शिवसेना को 19.4%, कांग्रेस को 18% और एनसीपी को 17.2% वोट आए थे। इस चुनाव में कांग्रेस और एनसीपी भी अलग-अलग मैदान में थी।
हमारा मूल जनाधार एकजुट है- बीजेपी नेता
भाजपा के एक नेता का कहना है, 'पिछले 10 सालों में बीजेपी ने एनडीए और विपक्षी दलों में राज्य में अकेले सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है, इससे पता चलता है कि हमारा मूल जनाधार एकजुट है। यह मूल आधार राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में अधिक है, लेकिन यह हमारे साथ बना हुआ है।'
दरअसल, महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और बीजेपी के वरिष्ठ नेता देवेंद्र फडणवीस ने हाल ही में एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा है, वह अकेले तो विधानसभा चुनाव नहीं जीत सकती, लेकिन सबसे बड़ी पार्टी बनकर जरूर उभरेगी। फडणवीस का दावा पार्टी के इसी ठोस जनाधार पर टिका है, जिसमें थोड़ी भी बढ़ोतरी अप्रत्याशित परिणाम लाने की गुंजाइश रखते हैं।












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