Maharashtra Election: MVA में दरार! विदर्भ की सीटों पर अभी नहीं बनी बात, किस करवट बैठेगा उद्धव गुट?
Maharashtra Elections 2024: महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के बीच महाविकास अघाड़ी गठबंधन के अंदर एक बार अंतर्कलह सामने आई है। विदर्भ की सीटों को लेकर एनसीपी (शरद चंद्र) और उद्धव गुट और कांग्रेस की बी अब तक सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे 12 सीटों पर कैंडिडेट्स लिस्ट को लेकर नाम फाइनल करने से मंथन का दौर चल रहा है। इस बीच रिपोर्ट्स के मुताबिक, उद्धव गुट विदर्भ में अपनी मजबूत पकड़ होने के दावे के साथ अधिस सीटों की मांग पर अड़ा रहा है।
महाराष्ट्र में चुनाव पहले एमवीए एक बार फिर अंतर्द्वंद की स्थिति से गुजर रहा है। दावा किया जा रहा है कि महाविकास अघाड़ी गठबंधन के घटक दलों की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं एक बार फिर से गठबंधन के अस्तित्व पर भारी पड़ रही हैं।

शिवसेना के ठाकरे गुट, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को एक मंच पर लाने वाले गठबंधन के अस्तित्व पर एक बार फिर से सवाल खड़े हैं। विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के घटक दलों के बीच खींचतान जरूरी है। विदर्भ की सभी 12 सीटों पर दावा करने वाला उद्धव गुट, एनसीपी और कांग्रेस के बीच गतिरोध तेज हो गया है। ऐसे में रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि ठाकरे गुट के नेता दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान से संपर्क कर रहे हैं।
महाराष्ट्र में सीट बंटवारे पर कई दौर की वार्ता हो चुकी है। अंतिम बार मुंबई के ट्राइडेंट होटल में 10 घंटे तक चली बैठकों के बावजूबद कोई हल नहीं निकल पाया।
विदर्भ की सीटों को लेकर टकरार क्यों?
महाराष्ट्र में अब तक नासिक जैसी सीट पर एमवीए में कोई प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। यहां ठाकरे गुट सुधाकर बडगुजर की उम्मीदवारी पर जोर दे रहा है। वहीं कांग्रेस अपना उम्मीदवार उतारने पर अड़ी हुई है। लंबी बैठक के दौरान स्थिति और बिगड़ गई। दरअसल, कांग्रेस नेता नाना पटोले के नासिक पश्चिम पर जोर देने के कारण कथित तौर पर शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने वॉकआउट कर दिया।
विदर्भ की 12 सीटों पर नहीं बनी बात
महाराष्ट्र में मौजूदा सीट-बंटवारे की बातचीत में विदर्भ एक अहम क्षेत्र है। ठाकरे गुट ने विदर्भ की 12 प्रमुख सीटों पर दावा किया है। जिन सीटों पर उद्धव गुट दावेदारी कर रहा है उनमें, अरमोरी, चिमूर और रामटेक जैसे प्रमुख निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। ये वर्तमान में या तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) या स्वतंत्र उम्मीदवारों के पास हैं, और ठाकरे गुट का तर्क है कि चूंकि ये सीटें वर्तमान में एमवीए के पदाधिकारियों के पास नहीं हैं। जबकि कांग्रेस इनमें से कई सीटें उद्धव गुट को देने के पक्ष में नहीं है।












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