'सुहास बाबर' दिवंगत अनिल बाबर के काबिल वारिस, शिंदे ने दिया टिकट
Maharashtra Election 2024: सांगली जिले की राजनीति में मुख्य रूप से कांग्रेस और एनसीपी का दबदबा है। भाजपा ने भी कुछ हद तक अपनी पैठ बनाई है और देर से ही सही, लेकिन सांगली जिले में शिवसेना की भी एंट्री हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री वसंतदादा पाटिल, पूर्व राजस्व मंत्री राजारामबापु पाटिल, जयंत पाटिल, आरआर पाटिल, पतंगराव कदम, प्रतीक पाटिल, विशाल पाटिल, सुरेश खाड़े जैसे कई नाम सांगली जिले के राजनीतिक क्षेत्र में चमके।
सांगली जिले का राजनीतिक इतिहास अनिल बाबर के नाम के बिना पूरा नहीं हो सकता, जिन्होंने खानापुर अटपाडी के सूखाग्रस्त क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था। अनिल बाबर की राजनीतिक यात्रा 1972 में शुरू हुई, जब वे मात्र 22 वर्ष की उम्र में सांगली जिला परिषद के सदस्य बने। 1981 तक वे विषय समिति के अध्यक्ष बन गए और बाद में 1982 से 1990 तक खानपुर पंचायत समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। साल 1990 में उन्होंने विधायक के रूप में महाराष्ट्र विधानसभा में प्रवेश किया।

1991 में उन्हें यशवंत सहकारी चीनी फैक्ट्री के अध्यक्ष के रूप में चुना गया। 1999 में वह फिर से विधायक बने और 2001 में उन्हें सांगली जिला सेंट्रल बैंक के निदेशक के रूप में चुना गया। वह 1999 से 2008 तक नेशनल हेवी इंजीनियरिंग कोऑपरेटिव लिमिटेड के अध्यक्ष थे। उन्होंने 2014 और 2019 नामक दो विधानसभा चुनावों में शिवसेना के टिकट पर विधान सभा में प्रवेश किया। खानापुर अटपाडी वीटा सांगली जिले का एक क्षेत्र है जो सूखाग्रस्त क्षेत्र के रूप में जाना जाता है।
सिंचाई की सुविधा न होने तथा नहरों का निर्माण न होने के कारण यहां के नागरिक बड़े पैमाने पर पलायन कर रहे हैं। अपने पूरे राजनीतिक जीवन में अनिल बाबर ने इस क्षेत्र को सींचने का प्रयास किया। 1972 से राजनीतिक क्षेत्र में रहे अनिल बाबर हमेशा सफल रहे हैं। संभावना जताई जा रही थी कि 2019 में उद्धव ठाकरे उन्हें अपने मंत्रिमंडल में शामिल करेंगे। लेकिन, उद्धव ठाकरे ने अनिल बाबर के मंत्री पद को भी नजर अंदाज कर दिया।
2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत में अनिल बाबर ने शिंदे का साथ दिया, तभी से बाबर एकनाथ शिंदे के खास बन गए। दुर्भाग्य से अनिल बाबर का हाल ही में निधन हो गया। इसके बाद कुछ दिन पहले एकनाथ शिंदे ने खानापुर अटपाडी का दौरा किया और उन्होंने बाबर की स्मृति को सलाम किया। एकनाथ शिंदे ने वादा किया था कि बाबर के दोनों बच्चों को अपने माता-पिता की कमी महसूस नहीं होगी। एकनाथ शिंदे को अपनी बात के पक्के नेता के रूप में जाना जाता है।
अपने वचन के अनुरूप शिंदे ने खानापुर अटपाडी विधानसभा क्षेत्र से अनिल बाबर के बेटे सुहास बाबर को मौका दिया है। अनिल बाबर ने विधानसभा क्षेत्र में सूखा दूर करने के लिए अथक प्रयास किये। उन्होंने वीटा शहर से 50 से 60 किलोमीटर दूर स्थित कृष्णा नदी का पानी खानापुर तक लाने पर जोर दिया। उसी से तेम्भू योजना का जन्म हुआ। इस योजना से अनिल बाबर की दूरदर्शिता का पता चलता है। अनिल बाबर ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में सड़कों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया।
इसीलिए बाबर ने सरकार से बातचीत के बाद वीटा मडगुले, खरसुंडी पलुस, वीटा मंजर्डे, खानापुर विसापुर की सड़कों के लिए पर्याप्त धनराशि स्वीकृत की थी। अनिल बाबर ने खानापुर अटपाडी निर्वाचन क्षेत्र में केरा नदी पर पुल के निर्माण के लिए धन स्वीकृत किया। इस पुल का काम पूरा हो चुका है और वीटा शहर के शितोले समुदाय के नागरिकों को अपने पूजा स्थल तक जाने में अच्छी सुविधा मिल गई है। बाबर ने खानापुर अटपाडी निर्वाचन क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं के निर्माण के लिए 15 करोड़ रुपये की निधि को मंजूरी दी और दरगोबा मंदिर के नवीनीकरण के लिए 9 करोड़ रुपये की निधि प्राप्त की। यह मंदिर खानापुर समूह से नौ किलोमीटर दूर है।












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