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Ajit Pawar Profile: नहीं रहें महाराष्ट्र राजनीति के 'पावर हाउस', अजित पवार कैसे बने सबसे ताकतवर नेता?

Deputy CM Ajit Pawar Political Journey: देश के लिए 28 जनवरी की सुबह एक काले दिन की तरह बन कर आई जब महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का भीषण विमान हादसे में निधन हो गया। उनके मौत की खबर सुनते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई।

अजित पवार को महाराष्ट्र की राजनीति का चाणक्य माना जाता था। उनके बारे में अक्सर कहा जाता था कि सत्ता चाहें किसी की भी रही हो लेकिन अजित दादा कभी विपक्ष में नहीं रहे। अजित पवार जमीनी राजनीति से निकलकर महाराष्ट्र की सत्ता का सबसे बड़ा पावर हाउस बने।

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पिछले 13 सालों में वो 5 बार महाराष्ट्र के लंबे समय तक उप मुख्यमंत्री बने रहे। जानिए महाराष्ट्र राजनीति के चतुर राजनीतिज्ञ अजीत पवार के राजनीतिक (Ajit Pawar Political Journey) सफर के बारे में...

Who is Deputy CM Ajit Pawar: कौन थे अजित पवार? 'पावर' की राजनीति के धुरंधर

अजित पवार, जिन्हें महाराष्ट्र की राजनीति का 'चाणक्य' और 'प्रशासनिक दिग्गज' माना जाता है, शरद पवार के भतीजे हैं। उनका जन्म 22 जुलाई, 1959 को अहमदनगर के देवलाली प्रवरा में हुआ था। उन्होंने महाराष्ट्र बोर्ड से SSC तक शिक्षा प्राप्त की। उनके पिता अनंतराव पवार मुंबई के मशहूर राजकमल स्टूडियो में काम करते थे। पिता अनंतराव पवार के निधन के बाद उन्होंने कम उम्र में ही जिम्मेदारी संभाली और सहकारी क्षेत्र से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की।

Ajit Pawar Political Journey: सत्ता के केंद्र में हमेशा बने रहने वाले नेता

अजित पवार की सबसे बड़ी खूबी यह रही है कि महाराष्ट्र की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद वे लगभग हर सरकार का हिस्सा रहे हैं। पिछले पांच सालों में महाराष्ट्र की राजनीति में जबरदस्त उथल-पुथल देखने को मिली है। तीन मुख्यमंत्री बदले, दो प्रमुख क्षेत्रीय दलों में टूट हुई और गठबंधन राजनीति ने नया आकार लिया। लेकिन इस पूरे दौर में एक नेता ऐसा रहा, जो लगभग कभी सत्ता से बाहर नहीं रहा और वह नाम है अजित पवार।

2019 में देवेंद्र फडणवीस के साथ अचानक शपथ लेकर डिप्टी सीएम बनने से लेकर, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी सरकार में उपमुख्यमंत्री रहने तक और फिर एकनाथ शिंदे सरकार में दोबारा डिप्टी सीएम बनने तक अजित पवार सत्ता के हर केंद्र में मौजूद रहे।

Ajit Pawar Political Career: राजनीति में एंट्री और मंत्रालयों का सफर

अजित पवार की राजनीति में एंट्री लगभग तय मानी जाती थी। उनके चाचा शरद पवार उस दौर में राज्य की राजनीति के बड़े चेहरे बन चुके थे। 1982 में, महज़ 23 साल की उम्र में, अजित पवार एक सहकारी चीनी मिल के बोर्ड के लिए चुने गए। यहीं से उनके राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव की नींव पड़ी। अजित पवार ने अपने दशकों लंबे करियर में कृषि, बिजली, सिंचाई, जल संसाधन और वित्त जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला है। वे बारामती विधानसभा क्षेत्र का कई दशकों से प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और उन्हें एक सख्त प्रशासक के रूप में जाना जाता है।

13 साल में 5 बार डिप्टी सीएम

महाराष्ट्र की राजनीति में उनका कद इस बात से समझा जा सकता है कि पिछले 13 सालों में वे पांच बार उपमुख्यमंत्री बने-

  • 2010-2012: पृथ्वीराज चव्हाण सरकार
  • 2012-2014: पृथ्वीराज चव्हाण सरकार
  • नवंबर 2019: देवेंद्र फडणवीस सरकार (3 दिन)
  • 2019-2022: उद्धव ठाकरे सरकार
  • जुलाई 2023 से अब तक: एकनाथ शिंदे सरकार

अजित दादा का बगावत के बाद नया सियासी मोड़

2019 में बीजेपी के साथ सरकार बनाकर और फिर तीन दिन में समर्थन वापस लेकर अजित पवार ने महाराष्ट्र की राजनीति को झकझोर दिया। 2023 में उन्होंने एक बार फिर चाचा शरद पवार से अलग होकर NCP में विभाजन किया और बीजेपी-शिवसेना गठबंधन का हिस्सा बने।

2024 के लोकसभा चुनावों में अजित पवार को झटका लगा, लेकिन विधानसभा चुनावों में महायुति की बड़ी जीत के साथ उनकी NCP ने 41 सीटें जीतकर यह साबित कर दिया कि वे अब अपने दम पर राजनीति करने में सक्षम हैं। बारामती से विमान हादसे में अजीत पवार की मौत के निधन से सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि देश के एक कद्दवार नेता को खोज दिया है।

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