Maharashtra Chunav: क्या महायुति को फिर रोना होगा प्याज के आंसू, लोकसभा चुनाव से कितने बदले हालात?

Maharashtra Chunav 2024: महाराष्ट्र में प्याज उगाने वाले किसान सरकारी नीतियों में उतार-चढ़ाव और प्राकृतिक आपदाओं से आज भी जूझ रहे हैं। पिछली गर्मियों में फसल अच्छी हुई थी। लेकिन, तब प्याज निर्यात पर पाबंदी ने उनका मन छोटा कर दिया था। अब प्रतिबंध हटा लिया गया है तो अक्टूबर की भारी बारिश ने उनकी अधिकांश फसल को बर्बाद कर दिया है।

लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी और महायुति गठबंधन को प्याज किसानों की नाराजगी का खामियाजा भुगतना पड़ चुका है। टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक येवला इलाके के प्याज उत्पादक किसान राज्य और केंद्र दोनों सरकारों से मायूस हैं। इसी इलाके में लासलगांव भी है, जो देश में प्याज का सबसे बड़ा थोक बाजार है।

maharashtra chunav

डिंडोरी लोकसभा चुनाव हार चुकी है बीजेपी
येवला के किसान लासलगांव में अपनी उपज लाते हैं, जहां से पूरे देश में प्याज की कीमतें प्रभावित होती हैं। इस साल लोकसभा चुनाव में प्याज किसानों के असंतोष ने ही डिंडोरी में बीजेपी उम्मीदवार भारती पवार की हार में बड़ा योगदान दिया था।

इसे भी पढ़ें- Maharashtra Chunav: चुनाव से पहले महा विकास अघाड़ी में क्यों बिगड़ रही बात? गहराने लगे हैं मतभेद

इन विधानसभा क्षेत्रों में बढ़ी है महायुति की चुनौती
डिंडोरी लोकसभा क्षेत्र में आने वाले अधिकतर विधानसभा क्षेत्र नासिक के ग्रामीण इलाके हैं। प्याज किसानों की नाराजगी का असर यहां कि येवला के साथ-साथ डिंडोरी, बगलान, चंदवाड, मालेगांव बाहरी और निफाड सीटों पर पड़ सकता है।

प्याज निर्यात पर बार-बार पाबंदी बड़ा मुद्दा
दरअसल, देश में प्याज की कीमतों को काबू रखने के लिए पिछले कुछ वर्षों में इसके निर्यात पर कई बार सख्ती करनी पड़ी है, जो कि प्याज किसानों को रास नहीं आया है। हालांकि, सितंबर में ये प्रतिबंध हटा लिए गए थे, लेकिन किसानों को डर है कि विधानसभा चुनाव के बाद ये प्रतिबंध कहीं फिर से न लागू हो जाएं।

कई अन्य परेशानियां भी झेल रहे हैं किसान
इसके अलावा वे कीटनाशकों की बढ़ती कीमतों से भी किसान परेशान हैं और कृषि उत्पादों पर जीएसटी हटाने की भी मांग कर रहे हैं। इसके अलावा बारिश की वजह से जो नुकसान हुआ है, उसके बारे में एक किसान ने बताया, 'आमतौर पर प्रति एकड़ 80-100 क्विंटल प्याज की फसल होती है।' 'इस साल, मुझे दो एकड़ से केवल 12-15 क्विंटल प्याज ही मिल पाया।'

मराठा आरक्षण के मुद्दे का भी रहेगा असर
येवला में एनसीपी के छगन भुजबल और एनसीपी (एसपी) के माणिकराव शिंदे के बीच मुकाबला देखने को मिल रहा है। भुजबल मराठा आरक्षण के विरोधी रहे हैं, इससे भी महायुति उम्मीदवारों की चुनौतियां बढ़ी हुई हैं। भुजबल की सीट पर शरद पवार की पार्टी इसे भी भुनाने में लगी हुई है।

क्या चाहते हैं सामान्य प्याज किसान?
ऐसा भी नहीं है कि प्याज किसान पूरी तरह से महायुति से मुंह मोड़ने का मन बना ही चुके हैं। लेकिन, वह गठबंधन से जो उम्मीद कर रहे हैं, उसपर काफी हद तक उनका फैसला निर्भर करने वाला है। मसलन, लासलगांव के विनोद अहिरे ने कहा कि अगर न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित हो जाए तो किसान सरकार से राहत नहीं मांगते। उनका कहना है, 'केंद्र को प्याज के निर्यात में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।'

इसे भी पढ़ें- Maharashtra Chunav: 'जो भी संभाजी महाराज के हत्यारे में मसीहा देखते हैं', PM मोदी ने कांग्रेस को घेरा

वैसे येवला के मतदाताओं का एक वर्ग मानता है कि एमवीए के लिए भुजबल को हराना मुश्किल होगा, क्योंकि उन्होंने 2004 में अपनी पहली जीत के बाद से यहां एक मजबूत जनाधार बनाया है। भुजबल ने भी प्याज उत्पादकों में असंतोष के दावों को खारिज किया है और सारी चुनौतियों के बावजूद अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+