Maharashtra Chunav: चुनाव से पहले महा विकास अघाड़ी में क्यों बिगड़ रही बात? गहराने लगे हैं मतभेद
Maharashtra Chunav 2024: महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आ चुकी है। मुकाबला सत्ताधारी महायुति गठबंधन से है, लेकिन विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) के दलों में भारी अंतर्विरोध नजर आ रहा है। इनके नेता परस्पर विरोधाभासी बयान दे रहे हैं। गठबंधन की ओर से रणनीति के तहत किसी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया गया है, लेकिन फिर भी अलग-अलग तरह के दावे किए जा रहे हैं। चुनाव प्रचार में भी तालमेल का अभाव है।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में एमवीए का मुकाबला उस महायुति गठबंधन से है, जिसकी अगुवाई बीजेपी कर रही है और उसकी चुनावी रणनीति बहुत ही सधी हुई मानी जाती है। लेकिन, फिर भी गठबंधन के नेताओं के सुर अभी तक नहीं मिल पा रहे हैं। इससे लगता है कि गठबंधन के भीतर सबकुछ सही नहीं चल रहा है।

चुनाव हुए नहीं मुख्यमंत्री पर दावेदारी शुरू
मसलन, टीओआई को दिए एक इंटरव्यू में शिवसेना-यूबीटी के नेता आदित्य ठाकरे ने कहा है कि मुख्यमंत्री पर फैसला नतीजे आने के बाद होगा। लेकिन, पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज पृथ्वीराज चव्हाण ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री तो कांग्रेस का ही बनेगा।
जनादेश से होगा सीएम का फैसला- आदित्य ठाकरे
आदित्य ठाकरे के मुताबिक, 'एक ऐसा मुख्यमंत्री होगा, जो महाराष्ट्र के हित में काम करेगा। मुख्यमंत्री का फैसला जनादेश से होगा। एमवीए के लिए मुख्यमंत्री पर फैसला करने के लिए दो दिन काफी है। हम महायुति की तरह नहीं हैं, जहां सीएम पद के लिए हर एक दूसरे की खींचने में लगा हुआ है।'
मुख्यमंत्री कांग्रेस से होगा- पृथ्वीराज चव्हाण
लेकिन, एक और इंटरव्यू में कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा है, 'हम सत्ता में आएंगे और कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी (गठबंधन में) बनेगी और मुख्यमंत्री कांग्रेस से होगा।' एमवीए की पिछली सरकार में उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री थे।
शिवसेना-यूबीटी कर चुकी है उद्धव को सीएम का चेहरा बनाने की कोशिश
उनकी पार्टी शिवसेना-यूबीटी ने आखिर-आखिर तक कोशिश की थी कि गठबंधन की ओर से उद्धव को ही सीएम का चेहरा बनाकर पेश किया जाए। लेकिन, आम सहमति ये बनी की यह चुनाव परिणाम आने के बाद तय किया जाएगा। लेकिन, कांग्रेस नेता ने मतदान से पहले दावा ठोक कर भविष्य के आसार बता दिए हैं।
बता दें कि उद्धव ठाकरे सिर्फ मुखयमंत्री बनने के लिए ही 2019 में बीजेपी के साथ गठबंधन में चुनाव जीतकर भी उस कांग्रेस-एनसीपी से हाथ मिलाने पहुंचे गए थे, जिन्हें वे हराकर आए थे।
उद्धव ठाकरे को भी सता रहा है सहयोगी दलों में बिखराव का डर
सिर्फ मुख्यमंत्री पद का ही मुद्दा नहीं। चुनाव प्रचार में भी महा विकास अघाड़ी के सहयोगियों के बीच तालमेल का भारी अभाव दिख रहा है। मसलन, शिवसेना-यूबीटी के सुप्रीमो उद्धव ठाकरे को सहयोगी दलों से गुजारिश तक करनी पड़ गई है कि उन्हें सभी सहयोगी दलों के लिए प्रचार करना चाहिए।
उद्धव ने सहयोगी दलों से साफ कहा है कि चाहे कोई भी दल चुनाव लड़ रहा हो, सभी सहयोगी दलों के नेताओं को उनके लिए प्रचार करना चाहिए, नहीं तो आपस में दिक्कतें पैदा होनी शुरू हो जाएंगी।
प्रचार में कांग्रेस नेता के नहीं पहुंचने पर भड़के उद्धव
सोलापुर की एक रैली में उद्धव ने कहा, 'प्रणीति आज यहां नहीं हैं, मुझे लगता है कि वह विदर्भ में प्रचार कर रही हैं, लेकिन मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि उन्हें भी प्रचार (शिवसेना-यूबीटी के प्रत्याशी के प्रचार) में शामिल होना चाहिए।
अपनी एकता नहीं तोड़नी चाहिए- शिवसेना-यूबीटी नेता
उद्धव ने आगे कहा, 'मुझे याद है कि मैंने खुद उनके पिता सुशील कुमार शिंदे के आग्रह पर प्रणीति के लिए (सोलापुर लोकसभा चुनाव में) प्रचार किया था.....इन सारे लोगों ने आपके लिए काम किया था, आज आपको उनके लिए काम करने की जरूरत है।'
उद्धव ने तो यहां तक कहा कि 'एक गठबंधन के तौर पर हमें अगर बीजेपी और उसके सहयोगियों को बाहर कहना है तो अपने संबंधों को बनाए रखने की जरूरत है, इसलिए हमारी एकता को ऐसे कार्यों से नहीं तोड़ा जाना चाहिए।' शिवसेना-यूटीबी चीफ इस वजह से भड़के हुए थे कि कांग्रेस नेतृत्व सोलापुर दक्षिण से उनके पार्टी के उम्मीदवार अमर पाटिल का समर्थन नहीं कर रहा है।












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