जानिए क्यों असली शिवसेना की लड़ाई में स्पीकर की भूमिका हो सकती है निर्णायक
मुंबई, 04 जुलाई। महाराष्ट्र में जिस तरह से सत्ता का उलटफेर हुआ और एकनाथ शिंदे पार्टी के बागी विधायकों विधायकों के साथ मिलकर भाजपा के सहयोगसे सरकार का गठन किया उसके बाद अब असल शिवसेना की लड़ाईऔर भी दिलचस्प हो गई है। उद्धव ठाकरे ने इस बाबत सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने पार्टी के 16 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है। लेकिन अब इस लड़ाई में विधानसभा के नवनिर्वाचित स्पीकर राहुल नार्वेकर की भी भूमिका काफी अहम हो गई है।

सुप्रीम कोर्ट नहीं स्पीकर के हाथ में अंतिम फैसला!
भाजपा के वरिष्ठ नेता सुधीर मुंगांतिवार का कहना है कि विधानसभा से जुडे मामलों में स्पीकर की भूमिका काफी अहम होती है। अगर शिवसेना के 55 में से 39 विधायक एकनाथ शिंदे के खेमे में चले गए हैं तो तस्वीर बिल्कुल साफ है कि बहुत किसके पास है। भाजपा-शिंदे गठबंधन को इस बात का भरोसा है कि सदन में एक बार फैसला हो जाता है तो मुश्किल है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप करे।

स्पीकर का फैसला सभी पर बाधित
विधानसभा सचिवालय के एक अधिकारी का कहना है कि अब जह हमने स्पीकर को चुन लिया है तो ठाकरे की शिवसेनाा और शिंदे की शिवसेना में से कौन सा असली है उसका फैसला स्पीकर ही करेंगे। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद जरूरी प्रक्रिया का पालन करने के बाद स्पीकर का फैसला ही अंतिम होगा जो हर किसी पर लागू होगा। वहीं भाजपा के एक सूत्र का कहना है कि हमे इस बात की कोई चिंता नहीं है, इस तरह के मामलों में कानूनी और सदन की लड़ाई तकरीबन 3 महीने तक चलती है। नए स्पीकर के चयन के बाद अगली चुनौती शिंदे गुट को ही असली शिवसेना साबित करना है। ऐसे मामलों में सामान्य तौर पर स्पीकर का फैसला ही कोर्ट पर बाधित होता है।

महाविकास अघाड़ी में सबकुछ ठीक नहीं
भाजपा और शिंदे के बीच का गठबंधन इसलिए भी और भरोसे में है क्योंकि महाविकास अघाड़ी के भीतरखाने में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि अगर उद्धव ठाकरे ने खुद ही इस लड़ाई को छोड़ दिया है और विधान परिषद में अपनी सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है तो कांग्रेस और एनसीपी के पास कोई वजह नहीं है कि वह नई सरकार के खिलाफ लड़ाई को आगे बढ़ाए और विधायकों की अयोग्यता को लेकर लड़ाई लड़े।












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