Elgaar Parishad Case: एक्टिविस्ट गौतम नवलखा को बॉम्बे HC से जमानत मिली, जानें 21 दिन तक क्यों लगी रोक?
Elgaar Parishad Case: एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को कार्यकर्ता गौतम नवलखा को जमानत दे दी है। जस्टिस एएस गडकरी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने नवलखा की जमानत की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने कोर्ट से छह सप्ताह की अवधि के लिए आदेश पर रोक लगाने का आग्रह किया, ताकि वह सुप्रीम में अपील दायर कर सके। पीठ ने आदेश पर तीन सप्ताह के लिए रोक लगा दी है।
आपको बता दें कि अगस्त 2018 में गौतम नवलखा को गिरफ्तार किया गया था। नवलखा को पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने घर में नजरबंद करने की अनुमति दी थी। वह फिलहाल नवी मुंबई में रह रहे हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट ने गौतम नवलखा को 1 लाख के मुचलके पर जमानत दे दी है। वह इस मामले में जमानत पाने वाले सातवें आरोपी हैं।

इस साल अप्रैल में, एक स्पेशल कोर्ट ने गौतम नवलखा को जमानत देने से इनकार कर दिया था, क्योंकि सबूतों में उसे प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) का सक्रिय सदस्य बताया गया था। हाई कोर्ट में दायर अपनी अपील में, गौतम नवलखा ने कहा कि स्पेशल कोर्ट ने उसे जमानत देने से इनकार करते हुए गलती की है। यह नवलखा की नियमित जमानत की मांग को लेकर हाई कोर्ट में अपील का दूसरा दौर है।
पिछले साल सितंबर में स्पेशल एनआईए कोर्ट द्वारा उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज करने के बाद नवलखा ने पहले हाई कोर्ट का रुख किया था। एनआईए ने तब नवलखा की जमानत याचिका का विरोध करते हुए दावा किया था कि उनकी भर्ती के लिए उन्हें पाकिस्तान इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) जनरल से मिलवाया गया था, जो संगठन के साथ उनकी सांठगांठ को दर्शाता है।
Bombay High Court grants bail to Gautam Navlakha in the 2018 violence case related to Elgaar Parishad and Bhima Koregaon Pune. The order is stayed for 3 weeks so that if NIA wants to appeal in the Supreme Court.
— ANI (@ANI) December 19, 2023
इस साल अगस्त में, मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में आरोपी कार्यकर्ता वर्नोन गोंसाल्वेस और अरुण फरेरा की रिहाई का आदेश जारी किया।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, एल्गार परिषद भीमा कोरेगांव मामला 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से संबंधित है। पुलिस का दावा है कि अगले दिन पश्चिमी महाराष्ट्र शहर के बाहरी इलाके में कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़क उठी थी।
2017-18 भीमा कोरेगांव एल्गार परिषद मामले में वरवरा राव, सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा, आनंद तेलतुंबे, स्टेन स्वामी, वर्नोन गोंजाल्विस, और अरुण फरेरा सहित अन्य जैसे प्रतिष्ठित कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हुई। महाराष्ट्र पुलिस ने एल्गार परिषद के सदस्यों को गिरफ्तार करने के लिए पुणे, दिल्ली और भारत भर के अन्य शहरों में छापेमारी की थी, जिसके बारे में उनका दावा है कि इसे माओवादियों द्वारा वित्त पोषित किया गया था।












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