हाईकोर्ट ने बरकरार रखी गलत भाव से पड़ोसी महिला के पैर सहलाने वाले की सजा
मुंबई, 25 दिसंबर: देर रात पड़ोस के घर में जाकर महिला के पैरों को गलत तरह से छूने वाले व्यक्ति की सजा को बॉम्बे हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है। महाराष्ट्र के जालना जिले के पर्तूर के रहने वाले 36 वर्षीय परमेश्वर धगे को रात में पड़ोसी महिला के पैरों पर हाथ फेरने को लेकर निचली अदालत ने एक साल की सजा सुनाई थी। इसको धगे की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। शुक्रवार को हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए सजा को बरकरार रखा है।

सात साल पुराना केस
अभियोजन पक्ष के अनुसार 4 जुलाई 2014 की रात करीब 11 बजे महिला ने महसूस किया कि कोई उसके पैर पर हाथ चला रहा है। वह उठी तो देखा कि उसका पड़ोसी परमेश्वर धागे उसकी चारपाई पर बैठा हुआ ये कर रहा है। ये देखते ही महिला जोर से चिल्लाई, जिससे उसकी सास जाग गई, इस पर धगे वहां से भाग गया।

2015 में हुई थी सजा
महिला ने मामले की पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई और मुकदमा कायम हो गया। 25 जून 2015 को पर्तूर में प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट ने धगे को आपराधिक अतिचार और महिला की शील भंग की कोशिश का दोषी ठहराया। जिसके लिए उसको एक साल जेल की सजा सुनाई गई। जालना सेशन कोर्ट के सजा को बरकरार रखने के बाद धगे ने उच्च न्यायालय का रुख किया

हाईकोर्ट में भी नहीं चले धगे के तर्क
बॉम्बे हाईकोर्ट में धगे के वकील की ओर से तर्क दिया गया कि भयानक रात में जबकि महिला का पति घर पर नहीं था। ऐसे में घर का दरवाजा बंद नहीं करने से साफ है कि दोशी ने उसकी सहमति से उसके घर में प्रवेश किया था। इसके अलावा महिला के पैर छूना कोई यौन हमला नहीं है, ऐसे में उसकी सजा को रद्द किया जाए।
धगे के वकील के तर्कों से न्यायमूर्ति एमजी सेवलीकर संतुष्ट नहीं हुए। अदालत ने कहा कि किसी महिला के शरीर के किसी अंग को कोई अजनबी उसकी सहमति के बिना छुए तो ये मर्यादा का उल्लंघन होगा। अदालत ने कहा कि दोषी ने शाम को महिला से पूछताछ की थी कि उसका पति रात में घर में नहीं है। ऐसे में साफ है कि वह यौन इरादे से वहां गया था। ऐसे में उसकी सजा को बरकरार रखा जाता है।












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