Maharashtra: अजित पवार के मन में क्या चल रहा है? दो बयानों में उलझी है बीजेपी-शिवसेना-एनसीपी सरकार
महाराष्ट्र सरकार में शामिल गठबंधन के दलों के बीच कुछ न कुछ असमान्य जरूर है। एनसीपी नेता और उपमुख्यमंत्री अजित पवार की ओर से ऐसे बयान दिए जा रहे हैं, जिससे यही संकेत मिल रहे हैं।
उनका ताजा बयान उनके वित्त विभाग को लेकर है। महाराष्ट्र की राजनीति को समझने वाले जानते हैं कि यह विभाग अपने चाचा से बगावत करके एनसीपी के ज्यादा विधायकों को तोड़कर बीजेपी-शिवसेना सरकार में शामिल होने वाले अजित पवार के लिए कितना महत्वपूर्ण रहा है।

वित्त विभाग को लेकर पवार के बयान से बढ़ गई अटकलें
लेकिन, शनिवार को उन्होंने अपनी पार्टी और परिवार के गढ़ माने जाने वाले बारामती में समर्थकों से कह दिया कि उन्हें नहीं पता कि वह आगे वित्त मंत्री रहेंगे भी या नहीं। पवार के पास उपमुख्यमंत्री के अलावा यह महत्वपूर्ण विभाग भी है। उन्होंने कहा, 'आज वित्त मंत्रालय मेरे पास है, इसलिए आपको ज्यादा फायदा (योजनाएं देने में ) मिलता है.....हालांकि, आगे यह पोर्टफोलियो मेरे पास रहेगा या नहीं, यह नहीं कहा जा सकता।'
अजित पवार के लिए काफी महत्वपूर्ण रहा है वित्त विभाग
पवार का यह बयान सत्ताधारी गठबंधन को लेकर पहले से चल रही अटकलबाजियों को और बढ़ा रहा है। इसके मुताबिक बीजेपी, शिवसेना और अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी सरकार के भीतर सबकुछ सही नहीं चल रहा है। यहां इस बात को ध्यान में रखना जरूरी है कि जब उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना टूटी थी, तब मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के समर्थक विधायकों की यह सबसे बड़ी पीड़ा थी कि उनके साथ विकास फंड के आवंटन में भेदभाव किया जाता है; और यह आरोप और किसी पर नहीं अजित पवार पर ही लगाई जाती थी।
भविष्य में क्या होगा, कोई नहीं जानता- बीजेपी
हालांकि, महाराष्ट्र में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले अजित पवार के बयान को मीडिया के सामने ज्यादा तबज्जो देने से बचते दिखे हैं। उनके हिसाब से पवार ने ऐसा कुछ भी नहीं कहा है, जो असामान्य है। वे बोले, 'भविष्य में क्या होगा, कोई नहीं जानता....आपके लिए या मेरे लिए कल का दिन कैसा रहेगा, कोई नहीं जानता। यह एक स्वाभाविक बयान है, यह राजनीतिक बयान नहीं है।'
मुस्लिम आरक्षण की भी कर चुके हैं वकालत
गौरतलब है कि इससे पहले अजित पवार शिक्षण संस्थानों में मुसलमानों को 5% कोटा आरक्षित करने का समर्थन भी कर चुके हैं और इस मामले में मुख्यमंत्री एकनात शिंदे और अपने समकक्ष डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस के साथ चर्चा का भरोसा भी दे चुके हैं। जबकि, उन्हें यह बखूबी पता है कि खासकर बीजेपी की नीति के लिए मुस्लिम आरक्षण के नाम पर सोचना भी मुश्किल है। फिर पवार ऐसा बयान क्यों दे रहे हैं?
गृहमंत्री अमित शाह के कार्यक्रम में भी नहीं हुए शामिल
उनके ये दोनों बयान उस समय आए हैं, जब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मुंबई दौरे पर हुई बैठकों से वे अनुपस्थित रहे थे। शाह ने मुख्यमंत्री शिंदे और उपमुख्यमंत्री फडणवीस के साथ बंद कमरें में बैठकें भी की थी। लेकिन, पवार का कहना है कि उन्हें बारामती में पहले से तय हुई बैठकों में शामिल होना था, इसलिए गृहमंत्री के साथ वाली मीटिंग में वे नहीं शामिल हो सके। उनके मुताबिक इसकी सूचना गृहमंत्री के दफ्तर के साथ ही सीएम शिंदे और डिप्टी सीएम फडणवीस को भी दे दी गई थी।
महाराष्ट्र के सत्ताधारी गठबंधन के अंदर की इस असमंजस को विपक्ष और हवा देने में लगा हुआ है। हाल ही में शिवसेना (उद्धव बाल ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने भविष्यवाणी की थी कि जल्द ही एकनाथ शिंदे की जगह अजित पवार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। उन्होंने अपनी भविष्यवाणी के पीछे शिंदे गुट के 16 विधायकों के अयोग्य घोषित होने का दावा किया था।
सीएम बनने के दावों को नकारा
हालांकि, जब पुणे में अजित पवार से उनके सीएम बनने की भविष्यवाणी को लेकर सवाल पूछे गए तो उन्होंने कहा, '.....इस खबर में कोई सच्चाई नहीं है.....मैं सिर्फ विकास के बारे में सोचता हूं।'












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