किसान के जनधन खाते में आए 15 लाख तो उसने लिखा PM मोदी को 'धन्यवाद पत्र', अब बैंक मांग रहा पैसा वापस
औरंगाबाद, 10 फरवरी: महाराष्ट्र के एक किसान की किस्मत उस वक्त चमक गई, जब उसके जनधन बैंक खाते में अचानक 15 लाख रुपए जमा हो गए। इसके बाद किसान ने सोचा की सरकार ने उसकी सुध ले ली, और उसने बैंक में जमा पैसों में से घर बनवा लिया, लेकिन पांच महीने बाद जब उसके पास बैंक का नोटिस पहुंचा तो सारा मामला उजागर हो गया।

15 लाख रुपए पाकर किसान खुश
दरअसल, महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के रहने वाले एक किसान के जनधन खाते में 15 लाख रुपए जमा हुए तो उसने सोचा कि सरकार अपने किए वादे के मुताबिक उसे दिए हैं, जो कि चुनाव के दौरान किया गया था। 15 लाख रुपए पाकर किसान खुश था, जिसके लिए उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर इसका आभार भी जताया, लेकिन यह खुशी कुछ ही महीनों की थी, क्योंकि छह महीने बाद बैंक की तरफ एक नोटिस आया और किसान से पैसे वापस करने के लिए कहा गया।

बैंक की तरफ से मिला नोटिस
पूरा मामला औरंगाबाद जिले के पैठण तालुका के दावरवाड़ी के किसान ज्ञानेश्वर ओटे से जुड़ा हुआ है, जिसको बैंक की तरफ से नोटिस मिला है, जिसमें बताया गया है कि जो रकम उसके खाते में आई है, वो गलती से डाली गई है। इसलिए उसे अब उन पैसों को वापस लौटाना पड़ेगा। जानकारी के मुताबिक किसान ज्ञानेश्वर के खाते में अगस्त 2021 में 15 लाख रुपए जमा हुए थे।

पीएम मोदी को लिखा था 'धन्यवाद'
जब पैसे जमा हुए तो किसान की खुशी कम नहीं हो रही थी। उसने महसूस किया कि पीएम मोदी अपने चुनावी वादों को पूरा कर रहे हैं और यहां तक कि उन्होंने प्रधानमंत्री को 'धन्यवाद' पत्र भी लिखा। ज्ञानेश्वर ओटे ने घर बनाने के लिए अपने बैंक ऑफ बड़ौदा खाते से 9 लाख रुपए निकाल लिए और घर का काम शुरू कर दिया। घर का काम पूरा होने के साथ-साथ पूरे इलाके में आग की तरफ 15 लाख जमा होने की बात फैल गई।

नोटिस को लेकर परेशान किसान
लेकिन 6 महीने बाद किसान का सपना उस वक्त टूट गया, जब उनके बैंक ने उन्हें नोटिस भेजा कि उनके खाते में गलती से बड़ी राशि जमा हो गई है। इसके अलावा बैंक ने उसे पूरी राशि वापस करने के लिए कहा है। बात यहां तक जा पहुंची है कि पैसे के लिए बैंक लगातार किसान पर दबाव बना रहा है। उधर नोटिस को लेकर परेशान किसान का कहना है कि वो इतनी भारी-भरकम रकम कहां से जुटाएगा।

ग्राम पंचायत को आवंटित करना था फंड
जानकारी के मुताबिक पैसों को किसान के खाते में ट्रांसफर करने के बजाए उसे वास्तव में विकास उद्देश्यों के लिए पिंपलवाड़ी ग्राम पंचायत को आवंटित किया गया था। लेकिन गलती से वो किसान के खाते में चले गए। चार महीने के बाद ग्राम पंचायत को मालूम चला कि यह पैसा झानेश्वर के खाते में आ गया है, जिसके बाद बैंक ने उसे नोटिस भेजा है।
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