एंटीलिया केस: क्या सचिन वाजे का 'कार'नामा, महाराष्ट्र सरकार पर भारी पड़ने वाला है
मुंबई: उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के बाहर से बरामद हुई विस्फोटकों से लदी स्कॉर्पियो कार की गुत्थी जिस तरह से एक के बाद एक और कार से उलझती जा रही है और उन सबके बीच मुंबई पुलिस के निलंबित असिस्टेंड पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वाजे महत्वपूर्ण कड़ी बनकर उभरते जा रहे हैं, इससे महा विकास अघाड़ी सरकार की सियासी सेहत पर सवाल उठ रहे हैं। क्योंकि, वाजे के बचाव के लिए शिवसेना ने शुरू में जिस तरह से मोर्चा खोला था, नए खुलासों के बाद वह बैकफुट पर आती दिख रही है। गठबंधन की बाकी दोनों दलों- कांग्रेस और एनसीपी में भी खलबली मची हुई है, इसलिए दिल्ली से मुंबई तक इनके नेताओं के बीच कई दौर की बैठकें हुई हैं। सामने से तो यही जताया जा रहा है कि 'ऑल इज वेल' है, लेकिन अंदर खाने इस बात को लेकर हड़कंप मचा हुआ है कि ना जाने नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी कौन सा खुलासा करने जा रही है।

सचिन वाजे पर महाराष्ट्र के सत्ताधारी गठबंधन में खलबली
एंटीलिया बम केस को महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस ने अभी तक जिस तरह हैंडल किया है, उससे एनसीपी और कांग्रेस अंदर से खुश नहीं है। इस घटना में संदिग्ध असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर को लेकर रोज जो नए खुलासे हो रहे हैं, उससे सरकार की भारी फजीहत हो रही है। 16 साल तक निलंबित रहे पुलिस वाले को जिस तरह से वापस सेवा में लिया गया और बड़े-बड़े हाई प्रोफाइल केस सौंपे गए, जांच में उसका कारनामा एक शातिर और कुख्यात अपराधी जैसा सामने आ रहा है। जो जानकारी सामने आ रही हैं, उससे लगता है कि उस शख्स को उस विस्फोटक मामले की जांच सौंपी गई थी, जिसे प्लांट करने में ही उसकी भूमिका थी। अब एनसीपी की ओर से कहा जा रहा है कि 'जो भी इस मामले में शामिल होगा उसे बख्शा नहीं जाएगा।' पवार की पार्टी की ओर से ऐसा कहने के बाद शिवसेना जो अबतक वाजे की वकालत कर रही थी, उसकी भी बोलती बंद लग रही है। फिलहाल गठबंधन की ओर से यही कहकर इस बवाल को शांत कराने की कोशिश है कि एनआईए इसकी जांच कर रही है और सबको उसकी रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए। क्योंकि, कोई पार्टी ये नहीं झुठला पा रही कि सचिन वाजे शिवसेना में भी शामिल हो चुका है।
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सचिन वाजे के 'कार'नामे से सरकार में टेंशन
बाहर से सत्ताधारी दलों की ओर से जो कुछ भी कहा जा रहा हो, लेकिन अंदर ही अंदर उनकी चिंता ये है कि जब सचिन वाजे के कारनामे की सुरागों की कड़ी जोड़त-जोड़ते एनआईए के अधिकारी बिजनेसमैन अंबानी के घर विस्फोटक रखने के मकसद के राज का पर्दाफाश कर देंगे तो डैमैज कंट्रोल करना नामुकिन हो जाएगा। क्योंकि, अब तो जांच एजेंसी मुंबई पुलिस के हेडक्वार्टर में उस क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट के दफ्तर तक पहुंच चुकी है, जिसका जिम्मा राज्य सरकार ने सचिन वाजे को सौंप रखा था। वहां से एनआईए ने उनका सीपीयू, आइपैड, कई सारे दस्तावेज और 2 फोन अपने कब्जे में लिए हैं। मंगलवार की रात तो एनआईए को वह काली मर्सिडीज भी हाथ लग गई, जो वाजे जैसे पुलिस के निचले ओहदे का अधिकारी दफ्तर आने जाने के लिए इस्तेमाल करता था। उसमें से एजेंसी को 5 लाख रुपये कैश, नोट गिनने वाली मशीन और बीयर की बोतलें भी बरामद हुई हैं। यानी इस कांड में अबतक तीन कार बरामद हुई हैं- विस्फोटकों वाली स्कॉर्पियो, उसके पीछे चल रही इनोवा कार, जो वाजे की यूनिट की है और संदेह है कि उसे वाजे ही चला रहे थे और अब काली मर्सिडीज।

साजिश के कहां तक जुड़ेंगे तार ?
एनआईए सूत्रों के मुताबिक 25 फरवरी को विस्फोटकों से लदी जो स्कॉर्पियो अंबानी के घर के बाहर पार्क की गई थी, उसके पीछे चल रही इनोवा को खुद वाजे ही चला रहे थे, जो कि उनकी सीईयू के इस्तेमाल की थी। इनोवा कार के आधिकारिक ड्राइवर ने एनआईए को बताया है कि 24 तारीख की रात ड्यूटी के बाद वह पुलिस हेडक्वार्टर में उसे खड़ी करके घर चला गया था। अभी तक वाजे ने एनआईए के सामने यह नहीं उगला है कि वह कार उसके ठाणे वाले घर तक कौन चलाकर ले गया। एनआईए के अधिकारियों को यह भी संदेह है कि जिलेटिन लदी स्कॉर्पियो को एक पुलिस कॉन्सटेबल ड्राइव कर रहा था। सबसे बड़ी बात ये है कि तीनों कार के नंबर प्लेट बदले गए थे और इन सब में वाजे मुख्य किरदार नजर आ रहा है। सूत्रों ने यह भी बताया है कि वाजे की हाउसिंग सोसाइटी से घटना के दो दिन बाद यानी 27 फरवरी को एक दूसरे असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर रियाजुद्दीन काजी ने जो डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर सीज किया था, उसका कोई आधिकारिक रेकॉर्ड नहीं है। उसमें क्राइम में इस्तेमाल वाली स्कॉर्पियो की तस्वीर दर्ज है जो उस रात से पहले वाजे के घर खड़ी थी। एजेंसी को पुख्ता संदेह है कि इनोवा से पीपीई पहना जो शख्स विस्फोटक लदी कार के मुआयने के लिए गया था, वह सचिन वाजे खुद था। मतलब इस अपराध में कई और लोग शामिल हो सकते हैं, इसलिए इसके पीछे एक बहुत बड़ी साजिश का अंदेशा है।

क्या जवाबदेही तय करेगी महराष्ट्र सरकार ?
अभी तक इस मामले में जो लग रहा है, उसमें आज न कल महाराष्ट्र सरकार को भी जवाबदेगी तय करनी पड़ेगी। मसलन, जब सचिन वाजे की सेवा में वापसी पर अदालत ने ऐतराज किया था तो फिर किसके दबाव में उसे फिर से पुलिस फोर्स में शामिल किया गया? क्योंकि, सूत्र बताते हैं कि उसकी वापसी पर गठबंधन के सहयोगी दलों में भी एक राय नहीं थी। एक दागी पुलिस वाले को कैसे सीधे क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट की जिम्मेदारी दे दी गई और कैसे कई हाई-प्रोफाइल और राजनीतिक तौर पर संवेदनशील केस की जांच उसे सौंप दी गई। अंबानी केस में वाजे पर जो बातें अबतक पब्लिक डोमेन में हैं, उससे उनके किसी शातिर अपराधी की तरह काम करने के आरोप लग रहे हैं। आखिर ऐसे अधिकारी के जिम्मे विस्फोटक केस की जांच किसके कहने पर पहले सौंपी गई, जबकि मुंबई पुलिस के पास भी इसके लिए एटीएस का विकल्प मौजूद था, जो बाद में इसमें सक्रिय हुआ। अभी तक की जांच से तो यह संदेह जाहिर हो रहा है कि वाजे खुद ही साजिश को अंजाम दे रहे थे और वह सबूतों को गायब करने में भी खुद ही जुटे हुए थे।

मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह पर गिरी गाज
माना जा रहा था कि डैमेज कंट्रोल के तौर पर आने वाले चंद दिनों में महाराष्ट्र सरकार पुलिस के बड़े महकमे पर इसका ठीकरा फोड़ सकती है और बुधवार को उसकी शुरुआत मुंबई पुलिस के कप्तान परमबीर सिंह से हो चुकी है। उन्होंने होम गार्ड की डीजी बना दिया गया है और उनकी जगह डीजीपी हेमंत नगराले को पुलिस कमिश्नर बनाया गया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने एनआईए जांच के बीच जिस तरह से कई वरिष्ठ मंत्रियों, गठबंधन के सहयोगियों और आला अधिकारियों के साथ बैठकें की थी, उससे ही कुछ बड़े फेरबदल के संकेत मिले थे। क्योंकि, इस मामले को लेकर एनसीपी कोटे से गृहमंत्री बने अनिल देशमुख भी निशाने पर हैं। सीएम से मिलने वालों में देशमुख, तत्कालीन डीजीपी हेमंत नगराले और तत्कालीन मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह भी शामिल थे। बाद में गृहमंत्री ने देर रात एंटी करप्शन ब्यूरो के डीजी रजनीश सेठ से के साथ बैठक की थी

25 फरवरी को अंबानी के घर के बारी मिली थी विस्फटकों से भरी कार
बता दें कि यह मामला तब सामने आया जब 25 फरवरी को मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर 20 जिलेटिन की छड़ों और अंबानी के नाम एक धमकी भरे खत के साथ एक लावारिस पड़ी स्कॉर्पियो बरामद की गई थी। बाद में पता चला कि वह स्कॉर्पियो ठाणे के एक कारोबारी मनसुख हिरेन की थी, लेकिन उन्होंने तब मीडिया से कहा था कि उनकी कार 17 फरवरी को ही चोरी हो गई थी। लेकिन, इस मामले में तब नया मोड़ आ गया जब खाड़ी से उनकी लाश बरामद हुई। शुरू में इसे आत्महत्या बताने की कोशिश हुई, लेकिन हिरेन की पत्नी ने सीधे सचिन वाजे पर उनकी हत्या का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उस स्कॉर्पियो का इस्तेमाल वाजे ही करते थे। बाद में एनआईए को उस कार के वाजे के घर पर होने के सुराग भी मिले। उसके बाद से इस केस में रोजाना नया खुलासा हो रहा है। अभी मनसुख की हत्या की जांच मुंबई पुलिस कर रही है। एनआईए सिर्फ विस्फोटक को लेकर छानबीन में जुटी है।












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