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Ajit Pawar News: राजनीति के थे धुरंधर खिलाड़ी, इन 5 फैसलों ने बदले महाराष्ट्र के सियासी समीकरण

Ajit Pawar News: महाराष्ट्र की राजनीति में दादा के नाम से मशहूर अजित पवार की गिनती राजनीति के तेज-तर्रार नेताओं में होती थी। वह निर्णायक और अप्रत्याशित कदम उठाने वाले नेता के तौर पर भी जाने जाते थे। शरद पवार के भतीजे और नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख शामिल अजित पवार का राजनीतिक करियर काफी चर्चित रहा। उनके फैसलों ने महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे देश की राजनीति में हलचल मचा दी थी।

सत्ता की बिसात पर उनकी चालें कई बार विरोधियों के साथ-साथ सहयोगियों के लिए भी चौंकाने वाली साबित हुईं। अजित पवार अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को लेकर मुखर रहते थे। जब शरद पवार का साथ छोड़कर वह एनसीपी के बड़े धड़े के साथ अलग हुए थे तब भी खुलकर कहा था कि अब उन्हें अपने चाचा का राजनीतिक संरक्षण नहीं सिर्फ आशीर्वाद चाहिए।

Ajit Pawar News

Ajit Pawar News: अजित पवार के 5 चौंकाने वाले फैसले

2019 में सुबह-सुबह सरकार बनाकर मचाई हलचल

अजित पवार का सबसे बड़ा और चर्चित कदम नवंबर 2019 में सामने आया था। उस वक्त एनसीपी का विभाजन नहीं हुआ था। उन्होंने सुबह-सुबह देवेंद्र फडणवीस के साथ मिलकर सरकार बनाने की शपथ ले ली। फडणवीस ने सीएम और पवार ने डिप्टी सीएम की शपथ ली थी। बिना पार्टी नेतृत्व की जानकारी के उठाया गया यह कदम पूरे देश के लिए हैरान करने वाला था। हालांकि यह सरकार ज्यादा दिन नहीं चली, लेकिन इस फैसले ने अजित पवार को राष्ट्रीय राजनीति में सुर्खियों में ला दिया।

NCP में रहते हुए बीजेपी से नजदीकियां

अविभाजित एनसीपी के कद्दावर नेता होने के बावजूद अजित पवार अक्सर बीजेपी के साथ जाने की उत्सुकता दिखाते थे। कई मौकों पर उन्होंने ऐसे बयान और कदम उठाए, जिससे पार्टी के भीतर असहजता बढ़ी और राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गईं। आखिरकार वह शरद पवार से अलग होकर एनडीए की सरकार में शामिल हो गए।

Sharad Pawar से अलग होकर बगावत

2 जुलाई 2023 को अजीत पवार ने अपने चाचा शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी से अलग होकर एनडीए में शामिल हो गए। उन्होंने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली और एनसीपी दो गुटों में बंट गई। उनका यह कदम प्रदेश ही नहीं राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से हलचल मचाने वाला था।

बीजेपी के साथ जाना और डिप्टी सीएम बनना

अजित पवार ने एक बार नहीं, बल्कि कई बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 200 में कांग्रेस-एनसीपी सरकार में डिप्टी सीएम रहे और फिर बीजेपी-शिवसेना-एनसीपी सरकार में दो बार इसी पद पर रहे। सत्ता में बने रहने और अपने प्रभाव को कायम रखने के लिए उवह हमेशा व्यावहारिक राजनीति के पक्षधर रहे। कहा जाता है कि उनकी नजरें हमेशा प्रदेश के सीएम की कुर्सी पर थी, लेकिन उनकी यह महत्वाकांक्षा कभी पूरी ही नहीं हो सकी।

लोकसभा चुनाव में बारामती से बहन के सामने पत्नी को खड़ा करना

2024 के लोकसभा चुनाव में अजित पवार के फैसले ने सबको हैरान कर दिया था। दरअसल बारामती सीट से सुप्रिया सुले उम्मीदवार थीं और माना जा रहा था कि अजित पवार यहां से कैंडिडेट नहीं उतारेंगे। हालांकि, उन्होंने यहां से अपनी पत्नी सुनेत्रा पवार को ही उम्मीदवार बना दिया। उनके इस फैसले ने समर्थकों को भी हैरान कर दिया।

अजित पवार भारतीय राजनीति के उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने अपने फैसलों से बार-बार यह साबित किया कि वे जोखिम लेने से नहीं डरते। उनकी राजनीतिक चालों ने महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाई थी।

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