Wildlife: वन्य जीवों का हो रहा अवैध व्यापार तो इस नंबर पर करें कॉल

महराजगंज के डीएफओ पुष्प कुमार ने वन्य जीवों के शिकार व अवैध व्यापार को रोकने के लिए टोल फ्री नंबर जारी किया है। जिस पर कोई भी इसकी जानकारी दे सकता है।

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Wildlife News Mahrajganj: भारत, जैव विविधता के संदर्भ में विश्व के सबसे समृद्ध देशों में एक है। यहां अनेक जीव जंतु स्वतंत्र ढंग से विचरण करते हैं। यह हर रोज के जीवन में इस तरह गुॅंथे हुए है कि हम इनकी कद्र नहीं करते और इन्हें आए दिन क्षति पहुंचाते रहते हैं। इन वन्य जीवों के संरक्षण के लिए कई नियम भी बनाए गए हैं लेकिन हम उनका भी पालन नहीं करते हैं। इसके लिए हाल ही में वन विभाग ने एक टोल फ्री नंबर जारी किया है जिस पर वन्य जीवों के अवैध व्यापार एवं अवैध शिकार के सम्बन्ध में सूचना दी जा सकेगी।

वन्य जीवों के साथ न करें यह काम महराजगंज के डीएफओ पुष्प कुमार ने बताया कि प्राय: लोग जाने- अनजाने में संरक्षित जीवों को पालतू बनाने के साथ कुछ ऐसा व्यवहार करते हैं, जो कि वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत दंडनीय होता है। सभी लोगों को इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, उत्तर प्रदेश के निर्देशानुसार वन्यजीव संरक्षण हेतु बिना अनुमति के वन्य जीवों को पिंजड़े अथवा किसी परिसर में कैद कर रखना अपराध है और ऐसा न करें। वन्यजीवों का शिकार, फंदे में फंसाना, दौड़ाना, जहर देना आदि अवैध है।वन्य जीवों का व्यापार अवैध है। अतः इसमें शामिल न हों। वन्य जीवों के मांस का भक्षण या अन्य वन्यजीव से सम्बन्धित उत्पादों जैसे चमडा सींग, पंख, बाल, नाखून, हड्डी आदि का उपभोग वर्जित है। इसलिए इनका उपभोग न करें। वन्य जीवों को चोट पहुंचाना, उनके अण्डों व घोसलों को नष्ट करना भी अपराध है। वन्य जीवों जैसे भालू बन्दर, लंगूर, साप, तीतर, तोता आदि को मनोरंजन हेतु प्रयोग में लाना गैर कानूनी है। इसलिए ऐसा न करें। वन्य जीवों को चारा देकर पालतू न बनाएं।

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इस नंबर पर दें सूचना वन्य जीवों को घायल अवस्था या अनाथ स्थिति में पाये जाने पर वन विभाग के निकटस्थ कार्यालय को तत्काल सूचित करें। वन्य जीवों के अवैध शिकार, व्यापार आदि में शामिल व्यक्तियों व संस्थाओं की सूचना वन विभाग एवं पुलिस विभाग के निकटस्थ कार्यालय को दें। वन्य जीवों के अवैध व्यापार एवं अवैध शिकार के सम्बन्ध में सूचना राष्ट्रीय हेल्प लाइन नम्बर 1800-11-9334 (टोल फ्री) पर दें।

डीएफओ ने कहा उक्त निर्देशों का पालन कर आमजन वन्यजीवों के संरक्षण में अपना बहुमूल्य योगदान दे सकते हैं और एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभा सकते हैं।

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    वन्य जीव संरक्षण कानून क्या है जानवरों पर हो रहे अत्याचार को रोकने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 1972 में भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम पारित किया था। इसका मकसद वन्य जीवों के अवैध शिकार, मांस और खाल के व्यापार पर रोक लगाना था। इसमें वर्ष 2003 में संशोधन किया गया जिसका नाम भारतीय वन्य जीव संरक्षण (संशोधित) अधिनियम 2002 रखा दिया गया।

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