MP चुनाव में राहुल ने क्यों पकड़ी राजीव गांधी वाली रणनीति, '100 रुपए में भागीदारी' वाले बयान की INSIDE STORY
Rahul Gandhi: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावी रैली में कांग्रेस जातिगत जनगणना का मुद्दा उछाले हुए हैं। राहुल गांधी अपनी रैलियों में दलित-ओबीसी की भागीदारी के आंकड़े भी समझाने की कोशिश कर रहे हैं। वह अपनी मांग भी दोहरा रहे हैं कि इस वर्ग की जितनी आबादी, उसके हिसाब से ही उनकी भागीदारी सुनिश्चिंत होना चाहिए।
जबलपुर और सतना में भी राहुल गांधी ने केंद्र-राज्य सरकार को घेरते हुए कई सवाल किए। यहां राहुल गांधी का दिया '100 रूपए' वाला बयान चर्चा में हैं। लगभग 38 साल पहले 1985 में राहुल के पिता और सबसे युवा पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने भी कुछ ऐसा ही बयान दिया था। फर्क इतना था कि उन्होंने भ्रष्टाचार को लेकर 1 रूपये का उदहारण दिया था और राहुल ने दलित-ओबीसी की भागीदारी का उदहारण देने 100 रुपए का जिक्र किया।
राहुल गांधी इस बयान को और हवा उस वक्त दे रहे है, जब मध्य प्रदेश समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का मौसम हैं। गुजरते सियासी वक्त के साथ राहुल के बयानों की इस धार में '100 रुपये..' वाले बयान के कई मायने भी हैं। दलित-ओबीसी की बातें कर कांग्रेस उनके दिल में जगह बचा सकें, साथ ही बीजेपी जिस वर्ग को आने वाले चुनाव में बड़ी ताकत मानकर चल रही हैं, उसे काउंटर भी किया जा सकें।

ये कहा है राहुल गांधी ने
जबलपुर में भी राहुल गांधी ने मंच से कहा कि 'प्रधानमंत्री कहते हैं कि देश में कोई जात नहीं है, सिर्फ एक जात है गरीबी। खुद को ओबीसी बताकर वोट मांगते हैं और सत्ता हासिल करते हैं। जातिगत जनगणना के मामले में कहते हैं कि देश में कोई जात नहीं है। राहुल ने कहा कि यह पीएम मोदी की इन बातों के बीच लोगों को उस सच्चाई का नहीं पता है कि देश या प्रदेश को चलाने वाली सरकार में दलित-ओबीसी की भागीदारी कितनी हैं?
100 रुपये में 1 रुपये खर्च करने का निर्णय..
देश को प्रधानमंत्री और उनके 90 कैबिनेट सचिव चलाते हैं, जिसमें से सिर्फ तीन कैबिनेट सचिव ही ओबीसी हैं। जो 100 रुपये में सिर्फ एक रुपये खर्ज करने का निर्णय लेते हैं। इसी तरह मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान और उनके 53 अधिकारी सरकार को चलाते हैं। जिसमें से सिर्फ एक अधिकारी दलित वर्ग का है और उसे पास 100 रुपये में से 33 पैसे खर्च करने का अधिकार है। देश को सांसद व विधायक नहीं चलाते हैं, आईएएस अधिकारी चलाते हैं। जिसकी जितनी आबादी उसकी उतनी भागीदारी के लिए देश में जातिगत जनगणना आवश्यक है। जानकारों की माने तो राहुल अपने पिता राजीव गांधी की रणनीति को अपना रहे हैं।
पिता राजीव गांधी ने ये दिया था बयान
साल 1985 में ओडिशा के कई जिले सूखा प्रभावित थे। इंदिरा गांधी की मौत के बाद उनके बेटे राजीव गांधी सबसे युवा प्रधानमंत्री बने और कालाहांडी जिला पहुंचे। जहां उन्होंने एक पब्लिक मीटिंग में भ्रष्टाचार के मुद्दे का बेहिचक जिक्र किया। उन्होंने उदहारण दिया कि सरकार जब भी 1 रुपया खर्च करती है तो लोगों तक 15 पैसे ही पहुंच पाते हैं। देश में बहुत भ्रष्टाचार है। यह ग्रासरूट लेवल पर है जिसे दिल्ली से बैठकर दूर नहीं किया जा सकता।
राजीव के बयान का ये भी करते आए जिक्र
राजीव गांधी का 1 रूपया वाला बयान इतना फेमस है कि भ्रष्टाचार की बात होने पर चर्चा की जाती हैं। मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी गाहे-बगाहे राजीव के बयान की याद दिलाते रहते हैं। कोरोनाकाल के वक्त अप्रैल 2020 में भी मोदी ने कहा था कि पहले लोग कहते थे कि केंद्र से 1 रुपया चलता है तो केवल 15 पैसा ही पहुंचता है। आज 1 रुपया निकलता है तो 100 के 100 लाभार्थियों के खाते में जमा हो जाता है। इतना ही नहीं 2017 में 'आधार' की वैधता से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने तक राजीव गांधी के उस बयान का जिक्र किया। तत्कालीन जस्टिस एके सीकरी और अशोक भूषण की बेंच ने कहा था कि एक पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा था कि 1 रुपये खर्च करने पर 15 पैसे ही पहुंच पाते हैं। इसमें कोई शक नहीं की आधार इस तरह के भ्रष्टाचार की बीमारी को आधार दूर कर सकता है। 2020 में पेश हुए केन्द्रीय बजट पेश करते वक्त भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भरे सदन में राजीव के बयान को याद दिलाया और मौजूदा वक्त में बदले हालात से तुलना तक की।












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