मध्य प्रदेश में कम वोटिंग से किसे फायदा- BJP या कांग्रेस? पहले चरण में 6 सीटों पर 67.08 % मतदान के मायने जानिए

Madhya Pradesh Lok Sabha Election 2024 Voting: लोकसभा चुनावी समर को लेकर मध्य प्रदेश में पहले चरण के तहत 6 लोकसभा सीटों पर शुक्रवार को मतदान हुआ। इस दौरान ईवीएम मशीन में 88 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला बंद हो गया है। पहले चरण के मतदान को लेकर पिछले दो लोकसभा चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो, इस बार वोटिंग परसेंटेज कम रहा है।

चुनाव आयोग की ओर से जारी आंकड़ों में 6 लोकसभा सीटों पर 67.08 फीसदी मतदान रहा है। ऐसे में सियासी गलियारों में वोटिंग परसेंट घटने पर कई के मायने निकाले जा रहे हैं। वोटिंग परसेंटेज घटने को कांग्रेस अपने लिए फायदेमंद मान रही है। कांग्रेस इससे खुश नजर आ रही। जबकि भाजपा का दावा है कि मध्य प्रदेश में 29 में से 29 सीटों पर जीत हासिल होगी।

Madhya Pradesh Lok Sabha Election 2024 Voting

पिछली बात की अपेक्षा 7.5% फीसदी कम रहा मतदान
मध्य प्रदेश में पहले चरण के तहत वोटिंग प्रतिशत घटने पर कांग्रेस में खुश दिखाई दे रही है। कांग्रेस का अपना कयास हैं कि उन्हें फायदा मिलेगा। दूसरी ओर बीजेपी भी अपनी जीत को लेकर पूरी लेकर पूरी तरह निश्चित हैं।

पहले चरण में शहडोल, मंडला, जबलपुर, बालाघाट, छिंदवाड़ा और सीधी पर मतदान हुआ। लेकिन इन सीटों पर पिछली बार 2019 में 71.86% मतदान हुआ। जबकि इस बार काफी प्रयास के बाद भी इस बार इन सीटों पर 67.08 फ़ीसदी ही वोटिंग रही। जो पिछले आंकड़ों की अपेक्षा 7.5% कम है।

सीधी लोकसभा सीट में भारतीय जनता पार्टी अब ज्यादा चिंतित दिखाई दे रही है। यहां सिर्फ 54.36 प्रतिशत मतदान हुआ है। ये 2019 के मुकाबले 15 प्रतिशत कम है। यहां बीजेपी उम्मीदवार राजेश मिश्रा और कांग्रेस के कमलेश्वर पटेल के बीच सीधा मुकाबला है।

भारतीय जनता पार्टी के लिए नाक का सवाल बनी छिंदवाड़ा लोकसभा सीट में कम मतदान होना पार्टी नेताओं को चौंका रहा है। छिंदवाड़ा में पूर्व में हुए चुनाव का आंकलन किया जाए तो पता चलता है कि जब-जब इस क्षेत्र में मतदान बढ़ा है तो भाजपा का वोट प्रतिशत बढ़ा है। लेकिन इस बार कम मतदान होने से भाजपा संशय में है। 2009 में 71.86 फीसदी मतदान हुआ था, कांग्रेस जीती थी।

2014 और 2019 के आम चुनाव मतदान प्रतिशत बढ़ा तो कांग्रेस की जीत का अंतर कम हुआ। 2014 में कांग्रेस के कमल नाथ एक लाख 16 वोटों जीते थे। लेकिन 2019 में कांग्रेस के नकुल नाथ ने महज 37 हजार वोट के अंतर से बड़ी मुश्किल से जीत पाए थे। इस बार चुनाव में 2.5 फीसदी वोटिंग कम हुई है। अगर पुराने आकलन सही साबित होते हैं तो यह खबर भारतीय जनता पार्टी के लिए कतई अच्छी नहीं है।

जबलपुर सीट में 60.52% मतदान हुआ है, जबकि 2019 में यहां 69.43% वोटिंग हुई थी। शहडोल लोकसभा में 64.11% मतदान हुआ है। 2019 में यहां 74.73 प्रतिशत मतदान हुआ था। सीधी में इस बार 56.18% मतदान हुआ है, जबकि 2019 में यहां 69.50 प्रतिशत मतदान हुआ था। बालाघाट में 72.66 प्रतिशत मतदान हुआ है, 2019 की स्थिति में यहां 77.61 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। मंडला में 72.92% वोटिंग हुई, 2019 में यहां मतदान 77.76% हुआ था।

छिंदवाड़ा में इस बार 79.18% मतदान हुआ जबकि 2019 में 82.42% मतदान हुआ था। सीधी में 2019 के मुकाबले 14 प्रतिशत कम, शहडोल में भी 11 प्रतिशत कम वोटिंग हुई है। इसी प्रकार मंडला की बात की जाए तो यहां पांच प्रतिशत कम मतदान हुआ है। जबलपुर लोकसभा में लोकसभा में 9 प्रतिशत कम वोटिंग हुई। आदिवासी क्षेत्र सिहोरा में सबसे ज्यादा 65 प्रतिशत वोटिंग हुई है।

बालाघाट में बीजेपी उम्मीदवार भारती पारधी का मुकाबला कांग्रेस सम्राट सिंह सरस्वार और बसपा के कंकर मुंजारे से है। यहां मतदान भले ही तीन से चार प्रतिशत कम हुआ हो लेकिन अभी भी भाजपा यहां संतुष्ट दिखाई दे रही है। राजनीतिज्ञों का कहना है कि कंकर मुंजारे ने कांग्रेस के वोट काटे होंगे ऐसा कहा जा सकता है।

शहडोल लोकसभा की बात करें तो यहां 10 प्रतिशत कम मतदान हुआ है। इससे कांग्रेस में उत्साह दिख रहा है। संभावित है कि भाजपा की मौजूदा सांसद हिमाद्री सिंह की जीत का मार्जिन कम हो सकता है।

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