बाघों के घर पन्ना टाइगर रिजर्व और नौरादेही में कीजिए वाटरफाॅल के दीदार, नजरें नहीं हटेंगी
सागर, 2 सितम्बर। मानसून की बारिश थमने के बाद प्राकृति का सौंदर्य शबाव पर है। हर ओर हरियाली बिखरी हुई है। पहाड़ी इलाकों में जलप्रपात लोगों का मन मोह रहे हैं। लोग परिवार सहित जलप्रपातों के दीदार करने, पिकनिक मनाने जा रहे हैं। बुंदेलखंड में कुछ स्थान ऐसे हैं जहां भव्य और सुंदर जलप्रपात हैं, लेकिन आम लोगों की पहुंच से दूर हैं। लोगों का यहां पहुंचा थोड़ा सा कठिन होता है। कारण ये घने जंगलों के बीच मौजूद हैं, जहां बाघों से लेकर तमाम वन्य प्राणी आसपास मौजूद होते हैं। हालांकि वन विभाग व पर्यटन विकास निगम ने कुछ जगह लोगों को जलप्रपात तक पहुंचने और मौके पर सुविधाएं विकसित की हैं, लेकिन बाघों का घर होने के कारण यहां मानवीय हस्तक्षेप कम ही रहता है। पन्ना टाइगर रिजर्व में ऐसे ही धुंधुआ और पाण्डव जलप्रपात मौजूद हैं। इधर नौरादेही में भी डोंगरगढ़ इलाके में हाथीनाला जलप्रपात मौजूद हैं।
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सैकड़ों फीट ऊंचाई से गिरता है पानी, धुंए जैसा धुंध हजारों फीट तक उठता है
पन्ना जिले में पन्ना टाइगर रिजर्व में धुंधुआ जलप्रपात मौजूद है। यह बहुत ही बड़ा व आकर्षक है। यहां पर करीब सैकड़ों फीट की ऊंचाई के पहाड़ों से पानी नीचे गिरता है। पानी और तेज हवाओं के कारण यहां हजारों फीट ऊंचाई तक पानी का धुंध उठता है। ऐसा प्रतीत होता है मानों जलप्रपात से पानी बादल बनकर आसमान में जा रहा हो। धुंधुआ जलप्रपात बारिश के दौरान काफी वेग से चलता है। इसकी आवाज जंगल में कई किलोमीटर दूर तक सुनाई देती है।

टाइगर रिजर्व के कारण यहां कम ही लोग पहुंच पाते हैं
धुंधआ जलप्रपात पन्ना टाइगर रिजर्व के अंदर हैं। जलप्रपात के आसपास जंगली जानवरों की मौजूदगी भी होती है। पहाड़ी के ऊपर और नीचे तब तब वन्य प्राणी आते जाते रहते हैं। इसलिए यहां सामान्य रुप से आम लोगों की मौजूदी कम ही होती है। बारिश के सीजन में यह इलाका काफी दुर्गम और खतरनाक भी हो सकता है। इसलिए यहां आम नागरिकों की आवाजाही को नियंत्रित रखा जाता है। जलप्रपात जिस नदी पर बना है। उसकी धारा के साथ जहां यह गिरता है, दोनों तरफ काफी घना जंगल लगा हुआ है।

पाण्डव जलप्रपात, यहां पाण्डवों ने वनवास काटा था
पन्ना टाइगर रिजर्व के अंदर एक बहुत ही खूबसूरत व रमणीय स्थल है पाण्डव वाटरफाॅल। इस जगह का ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक महत्व भी है। कहा जाता है कि पाण्डवों ने यहां वनवास के दौरान समय गुजारा था। केन नदी की उपनदी पर यहां एक बहुत ही आकर्षक जलप्रपात है। बारिश के मौसम में यहां गजब का नजारा होता हैं। यहां पर बारिश के सीजन में सैलानी आसानी से आ जा सकते हैं। जहां जलप्रपात का पानी गिरता है वहां नीचे एक कुंड बना हुआ है। बारिश में इसका आकार दिल के शेप में दिखाई देता है। यह पहाड़ी से एकदम सीधे नीचे न गिरकर पहाड़ी ढलान से होकर पानी नीचे की तरफ आता है, यह देखने में बेहद खूबसूरत है।

पाण्डव वाटरफाॅल 30 मीटर से नीचे गिरता है
पन्ना टाइगर रिजर्व में एक और जलप्रपात है जो सैलानियों के लिए काफी आकर्षण का केंद्र होता है। यह मानसून सीजन में भी खुला रहता है। यहां पर टाइगर रिजर्व ने सैलानियों व पर्यटकों के लिए सुरक्षा व्यवस्था करके रखी है। रैंलिंग आदि भी जलप्रपात के आसपास लगाई गई है। यह जलप्रपात केन नदी की एक उपनदी पर मौजूद हैं, जलप्रपात के बाद यह नदी केन नदी में जाकर मिल जाती है। पन्ना से करीब 13 किलोमीटर दूर घने जंगली इलाके में यह मौजूद है।

हाथी नाला जलप्रपात केवल बारिश में ही बनता है
नौरादेही वन्य प्राणी अभयारण्य के अंदर दमोह-तेंदूखेड़ा के पास डोंगरगढ़ इलाके में हाथीनाला जलप्रपात मौजूद हैं। काफी यह जलप्रपात आसपास के इलाके में सैलानियों के लिए काफी आकर्षण का केंद्र है। यहां बड़ी संख्या में लोग पिकनिक मनाने पहुंचते हैं। हालांकि यह जहां मौजूद हैं वह इलाका काफी कठिनाइयों से भरा है। यहां सुरक्षा व्यवस्था के कोई इंतजाम नहीं है। लोगों को खुद ही यहां सतर्क रहना होता है। जलप्रपात मानसून सीजन में काफी भव्य और सुंदर नजारा दिखाता है।

बुंदेलखंड में भव्य और सुंदर जलप्रपात, ये घने जंगलों के बीच मौजूद
बुंदेलखंड में कुछ स्थान ऐसे हैं जहां भव्य और सुंदर जलप्रपात हैं, लेकिन आम लोगों की पहुंच से दूर हैं। लोगों का यहां पहुंचा थोड़ा सा कठिन होता है। कारण ये घने जंगलों के बीच मौजूद हैं, जहां बाघों से लेकर तमाम वन्य प्राणी आसपास मौजूद होते हैं। हालांकि वन विभाग व पर्यटन विकास निगम ने कुछ जगह लोगों को जलप्रपात तक पहुंचने और मौके पर सुविधाएं विकसित की हैं, लेकिन बाघों का घर होने के कारण यहां मानवीय हस्तक्षेप कम ही रहता है। पन्ना टाइगर रिजर्व में ऐसे ही धुंधुआ और पाण्डव जलप्रपात मौजूद हैं। इधर नौरादेही में भी डोंगरगढ़ इलाके में हाथीनाला जलप्रपात मौजूद हैं।












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