प्रहलाद पटेल पहुंचे सतधारा स्तूप, बोले- केंद्र में पैसे देने का रहा, अब राज्य में इंप्लीटेशन करने का होगा काम
Vidisha news: आज पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने विदिशा के सतधारा का दौरा किया। इस मौके पर उन्होंने सतधारा के प्रमुख स्थलों, विशेषकर स्तूप, को देखा और यहां के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लिया।
प्राकृतिक सौंदर्य में मस्त
विकास मंत्री ने सतधारा के प्राकृतिक सौंदर्य की सराहना करते हुए कहा, "यहां का प्राकृतिक सौंदर्य अद्वितीय है। स्तूप का अद्भुतता और यहां का शांति पूर्ण वातावरण हर किसी को मोहित कर देता है।"

पर्यटन को बढ़ावा देने का दृष्टिकोण
उन्होंने सतधारा के पर्यटकों के साथ भी समय बिताया और उनके साथ फोटो खिंचवाईं। इसके बाद उन्होंने पर्यटकों से मिलकर उनके अनुभवों को सुना और इस स्थान को और बेहतर बनाने के लिए उनकी सुझावों की सुनी।
राज्य में ग्रामीण विकास की नई दिशा
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री बनने के बाद पटेल ने बताया, "अब तक केंद्र में रहने के बाद मुझे राज्य में ग्रामीण विकास विभाग की जिम्मेदारी मिली है। यहां इंप्लीमेंटेशन करने का काम होगा। हम सीखेंगे, आगे बढ़ेंगे, और नए कार्यों को प्रारंभ करेंगे।"
नए परियोजनाओं की तैयारी
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के लिए नए परियोजनाओं की तैयारी करने का भी संकेत दिया और आगे की योजनाओं के बारे में जनता को सूचित करने का आश्वासन दिया। मीडिया से चर्चा करते हुए प्रहलाद पटेल ने कहा, "हम मिलकर समृद्धि और समृद्धि की दिशा में काम करेंगे। गाँवों को विकसित करने के लिए हम सभी को मिलकर काम करना होगा।"
इस यात्रा में उन्होंने सतधारा के स्थानीय लोगों के साथ भी मिलकर उनकी समस्याओं का समाधान करने का आश्वासन दिया और उनसे सहयोग का आवेदन किया। यह दौरा स्थानीय लोगों के बीच में उत्साह और आत्मविश्वास को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण मौका साबित हुआ।
कहा है सतधारा स्तूप
विदिशा, मध्यप्रदेश: सतधारा स्तूप, जो कि सांची के समकालीन है, विदिशा से महज 20 किमी की दूरी पर स्थित है। यह स्तूप सम्राट अशोक द्वारा 272-238 ईसा पूर्व में बनवाया गया था और इसे उनके धर्म परिवर्तन के प्रमाण के रूप में समझा जा रहा है।
सतधारा स्तूप का निर्माण हलाली नदी के दाएं किनारे पहाड़ी पर हुआ था, जिसे खोजने में बौद्ध धरोहर के शोधकर्ता ए कन्धिम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस स्तूप को बनाने में शिल्पकला का प्रचुर सामर्थ्य और श्रद्धापूर्वक सामर्थ्य का उपयोग किया गया है, जिससे यह एक अद्वितीय आदर्श बन गया है।
सतधारा स्तूप का अद्वितीय आकृति, उसकी ऊँचाई, और शैली ने इसे एक प्रमुख बौद्ध स्थल बना दिया है जो ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। स्थानीय लोग इसे धार्मिकता और सांस्कृतिक विरासत का एक हिस्सा मानते हैं और इसे पर्याप्त सुरक्षा और ध्यान मिलता है।












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