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MP new liquor policy: मध्यप्रदेश की शराब नीति पर उमा भारती का तीखा हमला, "गोबर की चोट ज्यादा भारी पड़ सकती है"

MP News: मध्य प्रदेश की पूर्व सीएम और भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने राज्य की नई आबकारी नीति के क्रियान्वयन पर तीखी नाराजगी जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लगातार पोस्ट करते हुए सरकार से सवाल किया है कि क्या शराब वितरण नीति के प्रति लापरवाही बरती जा रही है।

उमा भारती ने दावा किया कि 2023 में घोषित शराब नीति शराबबंदी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम थी, लेकिन अब इसके उद्देश्यों से भटकाव दिख रहा है। इस बीच, ग्रामीण क्षेत्रों में शराब दुकानों के स्थानांतरण को लेकर विशेषकर महिलाओं के बीच विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं।

MP new liquor policy Uma Bharti displeasure over MP new liquor policy protests intensify in rural areas

उमा भारती का सोशल मीडिया पर तीखा हमला

उमा भारती ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, "दो साल पहले मध्य प्रदेश में शराबबंदी को लेकर एक व्यापक अभियान चला, जिसके परिणामस्वरूप जनवरी 2023 में नई शराब नीति घोषित हुई। यह नीति एक व्यापक विचार-विमर्श के तहत बनी थी, जो हमें धीरे-धीरे पूर्ण शराबबंदी की ओर ले जा रही थी।" उन्होंने आगे कहा कि पिछले डेढ़ साल में उन्होंने नई सरकार के साथ इस मुद्दे पर लगातार चर्चा की, लेकिन अब नीति के क्रियान्वयन में कमी दिख रही है।

उमा ने अपनी नाराजगी को और स्पष्ट करते हुए लिखा, "चार महीने से मन में हलचल मची हुई है। ऐसा लग रहा है जैसे हम शराब वितरण नीति के प्रति लापरवाह हो गए हैं। दुकानों के आवंटन को लेकर सर्वत्र जनविरोध, विशेषकर महिलाओं का विरोध हो रहा है। क्या हम जनता की भावनाओं को नजरअंदाज कर रहे हैं?" उन्होंने अपनी बात को और प्रभावी बनाने के लिए कहा, "चौकीदार अभी जिंदा है। अब हाथ में पत्थर की जरूरत नहीं, गाय के गोबर की चोट ज्यादा भारी पड़ सकती है।"

नई शराब नीति: दावे और हकीकत

मध्य प्रदेश सरकार ने 2023 में नई आबकारी नीति की घोषणा की थी, जिसे तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में "ऐतिहासिक और क्रांतिकारी" बताया गया था। इस नीति में अहातों (शराब दुकानों के पास पीने की जगह) और शॉप बार को बंद करने, शराब दुकानों को स्कूलों, धार्मिक स्थलों, और छात्रावासों से 100 मीटर की दूरी पर रखने, और नशे में वाहन चलाने की सजा को और सख्त करने जैसे प्रावधान शामिल थे। उमा भारती ने उस समय इस नीति की सराहना करते हुए इसे शराबबंदी की दिशा में एक बड़ा कदम बताया था।

हालांकि, 2025 में नई सरकार के तहत इस नीति के क्रियान्वयन पर सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 17 धार्मिक शहरों, जैसे उज्जैन, ओरछा, सलकनपुर, और मैहर, में शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध की घोषणा की थी। लेकिन अब खबरें आ रही हैं कि इन धार्मिक स्थलों से हटाई गई शराब दुकानों को ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों, खासकर महिलाओं, में भारी नाराजगी है।

MP new liquor policy: ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ता विरोध

नई नीति के तहत शराब दुकानों के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानांतरण ने कई जगहों पर तनाव पैदा कर दिया है। भोपाल, इंदौर, और अन्य शहरों के अलावा ग्रामीण इलाकों में भी शराब दुकानों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। महिलाएं सड़कों पर उतरकर इन दुकानों को हटाने की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि शराब दुकानों की मौजूदगी से सामाजिक समस्याएं, जैसे घरेलू हिंसा और युवाओं में नशे की लत, बढ़ रही हैं।

उमा भारती ने इन विरोध प्रदर्शनों का हवाला देते हुए सरकार से सवाल किया कि क्या जनता की भावनाओं को अनदेखा किया जा रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर नीति का सही क्रियान्वयन नहीं हुआ, तो वह फिर से सक्रिय रूप से इस मुद्दे को उठाएंगी।

उमा भारती का शराब विरोधी अभियान: एक नजर

उमा भारती लंबे समय से शराबबंदी की वकालत करती रही हैं। उन्होंने 2021 में 'मधुशाला में गौशाला' और 'शराब छोड़ो, दूध पियो' जैसे अभियानों के जरिए शराब के खिलाफ जागरूकता फैलाई थी। 2022 में उन्होंने भोपाल में एक शराब दुकान पर पत्थर फेंका था और निवार जिले के ओरछा में एक दुकान पर गोबर फेंककर विरोध जताया था। उस समय उनकी मांग थी कि शराब की बिक्री को नियंत्रित किया जाए और धार्मिक स्थलों के पास दुकानें न खोली जाएं।

2023 में नई नीति की घोषणा के बाद उमा ने इसे अपनी मांगों के अनुरूप बताते हुए सरकार की तारीफ की थी। लेकिन अब, जब नीति के क्रियान्वयन में खामियां सामने आ रही हैं, उन्होंने फिर से सरकार को कटघरे में खड़ा किया है।

MP new liquor policy: सरकार का पक्ष और चुनौतियां

मध्य प्रदेश सरकार का दावा है कि नई आबकारी नीति शराब की खपत को कम करने और सामाजिक सुधारों को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है। धार्मिक स्थलों पर शराब की बिक्री पर रोक और नदी नर्मदा के 5 किलोमीटर के दायरे में शराबबंदी जैसे कदमों को सरकार ने अपनी उपलब्धि के रूप में पेश किया है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि शराब से होने वाली आय (2022-23 में लगभग 13,000 करोड़ रुपये) राज्य की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा है, जिसके चलते पूर्ण शराबबंदी लागू करना मुश्किल है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शराब दुकानों के स्थानांतरण से न केवल सामाजिक असंतोष बढ़ रहा है, बल्कि यह सरकार की छवि को भी नुकसान पहुंचा सकता है। खासकर, उमा भारती जैसे प्रभावशाली नेताओं की नाराजगी बीजेपी के लिए चुनौती बन सकती है, क्योंकि उनका लोधी समुदाय और धार्मिक समूहों में अच्छा प्रभाव है।

विपक्ष ने भी उठाया मुद्दा

कांग्रेस पार्टी ने भी इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश की है। 2022 में जब शराब नीति को उदार बनाया गया था, तब कांग्रेस ने उमा भारती की चुप्पी पर सवाल उठाए थे। अब, जब उमा स्वयं नीति के खिलाफ बोल रही हैं, विपक्ष इसे सरकार की नाकामी के रूप में पेश कर रहा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शराब दुकानों का बढ़ना सामाजिक समस्याओं को और गंभीर करेगा।

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