ट्रांसफॉर्मर की 'मौत' ने पूरे गांव को रुलाया, ट्रैक्टर में रखकर निकाली 'शवयात्रा', देखें वायरल Video

कटनी, 13 दिसम्बर। मध्य प्रदेश के कटनी जिले के बहोरीबंद इलाके के पटना गांव में ट्रांसफॉर्मर की 'मौत' ने हर किसी को रुला दिया। यही वजह है कि सोमवार को गांव का हर कोई वाशिंदा ट्रांसफॉर्मर पर फूल माला चढ़ाने को आतुर दिखा। सोशल मीडिया में ट्रांसफॉर्मर की 'शवयात्रा' के ये वीडियो वायरल भी हो रहे हैं।

विद्युत विभाग की लापरवाही

विद्युत विभाग की लापरवाही

दरअसल, पटना गांव के लोग विद्युत विभाग की लापरवाही का दंश भोग रहे हैं। लोगों के सामने भूखे मरने की नौबत आ गई। हर कोई गुस्साया हुआ है। ऐसे में पटना के ग्रामीणों ने सोमवार को गांव में ट्रांसफॉर्मर की अर्थी निकाल विरोध जताया।

 रोजी रोटी खेती पर निर्भर

रोजी रोटी खेती पर निर्भर

कटनी जिले के गांव पटना के किसान कमलेश तिवारी बताते हैं कि गांव में बिजली विभाग की लापरवाही के कारण सिंचाई के लिए बिजली नहीं मिल रही है। गांव में एक हजार वोटर हैं। अधिकांश की रोजी-रोटी खेती पर निर्भर है।

24 घंटे में जल जाता है ट्रांसफॉर्मर

समस्या ये है कि गांव पटना में भटवा टोला के पास लगाया गया बिजली विभाग का ट्रांसफॉर्मर लोड नहीं उठा पा रहा है। कुछ ही दिन में जल जाता है। महज 24 घंटे भी ठीक से विद्युत आपूर्ति नहीं हो पाती है।

एक ट्रांसफॉमर निजी काम में लगाया

एक ट्रांसफॉमर निजी काम में लगाया

किसान रमेश पटेल की मानें तो गांव में पहले दो ट्रांसफॉर्मर हुआ करते थे। तब जैसे-तैसे काम चल जाता था, मगर पिछले दिनों विभाग ने एक ट्रांसफॉर्मर उठाकर किसी के निजी काम के लिए लगा दिया। इसके बाद बचा एकमात्र ट्रांसफॉर्मर भी जल गया।

दो ट्रांसफॉमरों की दरकार

दो ट्रांसफॉमरों की दरकार

पटना के ग्रामीणों की मांग है कि गांव में कम से कम सौ-सौ एचपी के दो ट्रांसफॉर्मर रखे जाए ताकि वे यहां आस-पास के 40 कृषि कनेक्शनों का लोड उठा सकें। गड़बड़ विद्युत आपूर्ति की वजह से गांव में धान की फसल सूख चुकी है जबकि गेहूं की फसल की तो अभी बुवाई भी नहीं पाई।

जाना पड़ता है जबलपुर

जाना पड़ता है जबलपुर

किसान इंद्रसिंह पटेल कहते हैं कि हमारा गांव एई स्लीमनाबाद के अधीन आता है। इनका कार्यालय हमारे से 40 किलोमीटर है। जब भी ट्रांसफॉर्मर जलता है तो हम एई स्लीमनाबाद कार्यालय जाते हैं। वहां से हमें जबलपुर भेज दिया जाता है।

हर बार पांच रुपए खर्च

हर बार पांच रुपए खर्च

गांव से जबलपुर की दूरी करीब सौ किलोमीटर है। ट्रांसफॉर्मर बदलवाने के लिए ग्रामीणों को जबलपुर जाना पड़ जाता है, जिसके लिए करीब तीन हजार रुपए किराया खुद की जेब से वहन करना पड़ता है और फिर दो हजार रुपए आयल व ट्रांसफॉर्मर लगाने में खर्च हो जाते हैं।

एई कार्यालय से निराश लौटना पड़ा

एई कार्यालय से निराश लौटना पड़ा

गुस्साए ग्रामीणों ने विरोध स्वरूप सोमवार को जले हुए ट्रांसफॉर्मर को ट्रैक्टर ट्रोली में रखकर उसकी अर्थी निकाली और गांव से बहोरीबंद होते हुए बिजली विभाग के एई कार्यालय पहुंचे। यहां अभियंता नहीं मिलने पर ग्रामीणों को देर शाम निराश लौटना पड़ा। अब जबलपुर जाना होगा।

कोई नहीं कर रहा सुनवाई

कोई नहीं कर रहा सुनवाई

किसान उम्मेद पटेल कहते हैं कि विभाग उनकी सुनवाई नहीं कर रहा। हर बार कम क्षमता और घटिया गुणवत्ता का ट्रांसफॉर्मर लगा देता है, जिससे ग्रामीण खासे परेशान हैं। इस संबं​ध में जिला कलेक्टर व जनप्रतिनिधियों से भी शिकायत कर चुके हैं, मगर समस्या का समाधान नहीं हो रहा।

ग्रामीणों ने की नारेबाजी

ग्रामीणों ने की नारेबाजी

विद्युत सप्लाई को लेकर परेशान ग्रामीणों ने ट्रांसफॉर्मर की शवयात्रा निकालने के दौरान मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार के खिलाफ भी नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। किसानों का कहना है कि चुनाव में 'कमल का फूल उनकी भूल' था।

विभाग के एई सुशांत सोनल का तर्क

विभाग के एई सुशांत सोनल का तर्क

स्लीमनाबाद एई सुशांत सोनल कहते हैं कि पटना में ऐसी कोई समस्या नहीं है कि ट्रांसफॉमर बार बार जल जाता है। आज ग्रामीण आए जरूर थे। इस दौरान वे कार्यालय के काम से बाहर थे। कल लाइनमैन को मौके पर भेजकर पूरी रिपोर्ट तैयार करवाएंगे और समस्या का समाधान करेंगे।

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