MP News: राजगढ़ में दिल दहलाने वाला हादसा, अयोध्या दर्शन से लौट रहे परिवार की SUV डिवाइडर से टकराई

MP News: मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के पचोर में गुरुवार तड़के एक भीषण सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। अयोध्या से दर्शन कर सूरत लौट रहे एक परिवार की XUV 500 कार नेशनल हाईवे पर डिवाइडर से टकरा गई, जिसके परिणामस्वरूप दो बच्चों सहित चार लोगों की मौत हो गई और तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे का कारण ड्राइवर को झपकी आना बताया जा रहा है।

इस दुखद घटना ने न केवल परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। स्थानीय लोगों, एक एम्बुलेंस चालक, और ट्रक ड्राइवरों की त्वरित कार्रवाई ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की, लेकिन चार जिंदगियां बचाई नहीं जा सकीं। आइए, इस हृदयविदारक घटना की पूरी कहानी को विस्तार से जानते हैं-कैसे एक धार्मिक यात्रा का आनंद त्रासदी में बदल गया।

Shocking accident in Rajgarh SUV of a family returning from Ayodhya Darshan collided with a divider

हादसे की सुबह: खुशी से मातम तक

18 जून 2025 को अयोध्या में रामलला के दर्शन कर चुका एक परिवार दो कारों में सूरत के लिए रवाना हुआ। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के दुबेपुरवा भवानीपुर से निकले इस परिवार ने बुधवार को अयोध्या में पूजा-अर्चना की थी। परिजन आयुष दुबे ने बताया, "हमने अयोध्या में दर्शन किए और शाम को दो कारों में सूरत के लिए निकले। रास्ते में एक ढाबे पर सभी ने चाय पी। इसके करीब एक घंटे बाद ही यह हादसा हो गया।"

गुरुवार तड़के करीब 4:30 बजे, राजगढ़ जिले के पचोर के पास नेशनल हाईवे पर एक XUV 500 कार, जिसे भोलेनाथ दुबे (50) चला रहे थे, अचानक अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। कार में सवार सात लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। मौके पर ही दो बच्चों-अनमोल दुबे (16) और प्रियांशु पांडे (11)-की मौत हो गई।

त्वरित सहायता: एम्बुलेंस और ट्रक चालकों का मानवीय प्रयास

हादसे के तुरंत बाद, अहमदाबाद की ओर जा रहे एक एम्बुलेंस चालक यग्नेश भाई रावल ने हाईवे पर कार से धुआं उठता देखा। उन्होंने तुरंत अपनी एम्बुलेंस रोकी और पास के ट्रक चालकों की मदद से कार का दरवाजा तोड़ा। यग्नेश ने बताया, "मैंने देखा कि कार पूरी तरह पिचक गई थी और उसमें लोग फंसे हुए थे। ट्रक चालकों के साथ मिलकर हमने दरवाजा तोड़ा और घायलों को बाहर निकाला। बच्चे और बड़ों की हालत बहुत खराब थी।"

स्थानीय लोगों ने भी मदद की और पचोर पुलिस को सूचना दी। पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और घायलों को पचोर अस्पताल ले जाने के लिए एम्बुलेंस बुलाई। पचोर अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद सभी घायलों को शाजापुर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।

अस्पताल में मातम: दो और मौतें

शाजापुर जिला अस्पताल में पहुंचने के बाद दो और लोगों-प्रमिला पांडे (55) और शिवदेवी तिवारी (45)-ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। अस्पताल में तैनात डॉ. दीपक पाटीदार ने बताया, "पचोर से चार घायल हमारे पास लाए गए थे। दो महिलाओं की हालत बहुत गंभीर थी, और उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। एक बच्ची और एक महिला का इलाज जारी है। भोलेनाथ दुबे को मामूली चोटें आई हैं।"

वर्तमान में, पुष्टम दुबे (50) और उनकी बेटी अंशिका दुबे (14) का शाजापुर जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। भोलेनाथ दुबे की स्थिति स्थिर बताई जा रही है।

परिवार का दर्द: सभी थे रिश्तेदार

हादसे की सूचना मिलते ही दूसरी कार में सवार परिजन शाजापुर जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने बताया कि हादसे वाली कार में सवार सभी लोग रिश्तेदार थे। कार को भोलेनाथ दुबे चला रहे थे, और उनके साथ उनकी पत्नी पुष्टम दुबे, बेटा अनमोल दुबे, बेटी अंशिका दुबे, बहन प्रमिला पांडे, उनका बेटा प्रियांशु पांडे, और बड़ी बहन शिवदेवी तिवारी सवार थे।

परिजन आयुष दुबे ने रोते हुए कहा, "हम सब अयोध्या दर्शन करके खुशी-खुशी लौट रहे थे। सोचा भी नहीं था कि ऐसा हो जाएगा। अनमोल और प्रियांशु तो अभी बच्चे ही थे। प्रमिला चाची और शिवदेवी ताई की मौत ने पूरे परिवार को तोड़ दिया है।"

हादसे का कारण: ड्राइवर को आई झपकी

पचोर पुलिस के प्रारंभिक जांच में सामने आया कि हादसे का मुख्य कारण ड्राइवर भोलेनाथ दुबे को झपकी आना था। थाना प्रभारी संजय सिंह ने बताया, "परिवार लंबी यात्रा पर था, और रात में ड्राइविंग के दौरान ड्राइवर को नींद आ गई। इससे कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। हमने मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है।"

लंबी दूरी की यात्रा के दौरान ड्राइवर की थकान और नींद सड़क हादसों का एक प्रमुख कारण है। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि रात में ड्राइविंग से बचना चाहिए, और हर दो घंटे में विश्राम लेना जरूरी है।

सड़क हादसों का बढ़ता ग्राफ

यह हादसा मध्य प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं की गंभीरता को फिर से उजागर करता है। मंत्रालय सड़क परिवहन और राजमार्ग के आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल करीब 1.5 लाख लोग सड़क हादसों में जान गंवाते हैं, और मध्य प्रदेश इस मामले में अग्रणी राज्यों में से एक है। राजगढ़ जिले में भी हाल के वर्षों में हादसों की संख्या बढ़ी है। जुलाई 2024 में शाजापुर से राजगढ़ लौट रहे दोस्तों की कार डिवाइडर से टकराने से एक की मौत और पांच लोग घायल हो गए थे।

सामाजिक प्रतिक्रियाएं: सड़क सुरक्षा की मांग

इस हादसे ने स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर सड़क सुरक्षा को लेकर चर्चा छेड़ दी है। X पर @RajgarhNews ने लिखा, "पचोर हादसा दिल दहलाने वाला है। सरकार को हाईवे पर सड़क सुरक्षा के लिए और कदम उठाने चाहिए। ड्राइवरों को भी रात में ड्राइविंग से बचना चाहिए।"

पचोर के निवासी रमेश यादव ने कहा, "हाईवे पर रात में अक्सर हादसे होते हैं। यहां रिफ्लेक्टिव साइन बोर्ड और स्पीड ब्रेकर की कमी है। प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।" वहीं, एक अन्य यूजर @SafeMP ने सुझाव दिया, "लंबी यात्रा पर निकलने से पहले ड्राइवर को पर्याप्त नींद लेनी चाहिए। सरकार को सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाना चाहिए।"

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

पचोर पुलिस ने हादसे के बाद तुरंत कार्रवाई की। थाना प्रभारी संजय सिंह ने बताया, "हमने घटनास्थल का मुआयना किया और शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। मामले में IPC की धारा 304A (लापरवाही से मौत) के तहत केस दर्ज किया गया है।"

जिला प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को सहायता का आश्वासन दिया है। राजगढ़ कलेक्टर ने कहा, "यह एक दुखद घटना है। हम घायलों के इलाज की निगरानी कर रहे हैं और परिवार को हर संभव मदद प्रदान करेंगे।"

भविष्य के लिए सबक

यह हादसा न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि सड़क सुरक्षा की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाईवे पर रिफ्लेक्टिव साइनेज, स्पीड कैमरे, और नियमित पुलिस गश्त से हादसों को कम किया जा सकता है। साथ ही, ड्राइवरों को लंबी यात्रा के दौरान थकान से बचने के लिए नियमित ब्रेक लेने की सलाह दी जाती है।

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