MP News: फर्जी बैंकिंग कंपनी का सनसनीखेज खुलासा, IDCS इंडिया ने 5 जिलों में 81 लोगों से ठगे डेढ़ करोड़
MP News: मध्य प्रदेश के इंदौर, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट जिलों में फर्जी बैंकिंग कंपनी 'IDCS इंडिया' के जरिए डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस फर्जी कंपनी के दो युवा संचालकों ने निवेशकों को IDCS बैंक ऑफ मॉरीशस के फर्जी दस्तावेज दिखाकर और 6 प्रतिशत मासिक ब्याज का लालच देकर 81 लोगों को ठगा।
ठगी के पैसों से आरोपियों ने लग्जरी कार, BMW बाइक, सोने के जेवरात और मंडला में आवासीय प्लॉट खरीदा। अनूपपुर पुलिस ने शनिवार को कंपनी के सीईओ योगेश श्रीवास (22) और ब्रांच मैनेजर दीपक उपाध्याय (28) को गिरफ्तार कर लिया। रविवार दोपहर 2 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस ने इस मामले का खुलासा किया।

फर्जी कंपनी का जाल, IDCS इंडिया का ढोंग
IDCS इंडिया के नाम से चल रही यह फर्जी कंपनी 13 अक्टूबर 2023 को योगेश श्रीवास ने फाइनेंशियल कंसल्टेंसी के तहत जीएसटी रजिस्ट्रेशन के साथ शुरू की थी। कंपनी ने अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट और इंदौर में फर्जी बैंकिंग कार्यालय खोले, जो IDCS बैंक ऑफ मॉरीशस से संबद्ध होने का दावा करते थे। निवेशकों को फर्जी दस्तावेज और सर्टिफिकेट दिखाकर फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर 6 प्रतिशत मासिक ब्याज (72 प्रतिशत वार्षिक) का लालच दिया गया। यह रिटर्न सामान्य बैंकिंग मानकों से कई गुना ज्यादा था, जिसने कई लोगों को झांसे में लिया।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने व्हाट्सएप ग्रुप, फर्जी वेबसाइट और पेशेवर दिखने वाले कार्यालयों के जरिए निवेशकों का भरोसा जीता। अनूपपुर के निवेशक अभिजीत सिंह ने 3 दिसंबर 2024 को एक लाख रुपये की FD कराई थी। कुछ महीनों तक ब्याज का भुगतान हुआ, लेकिन जनवरी 2025 से न तो ब्याज मिला और न ही मूल राशि लौटाई गई। अभिजीत की शिकायत पर पुलिस ने जांच शुरू की, जिसने इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया।
MP News: ठगी का पैसा, ऐशोआराम की जिंदगी
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि ठगी के पैसों से आरोपियों ने ऐशोआराम की जिंदगी जी। अनूपपुर पुलिस ने बताया कि सीईओ योगेश श्रीवास ने निवेशकों के पैसों से निम्नलिखित खरीदारी की:
20 लाख रुपये की लग्जरी कार: एक प्रीमियम SUV, जो योगेश के नाम पर रजिस्टर्ड है। 3.5 लाख रुपये की BMW बाइक: युवाओं में लोकप्रिय इस हाई-एंड बाइक को अनूपपुर में प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल किया जाता था। 5 लाख रुपये के सोने के जेवरात, पुलिस ने इन्हें योगेश के आवास से बरामद किया।
50 लाख रुपये का आवासीय प्लॉट: मंडला में खरीदा गया यह प्लॉट भविष्य के निवेश के लिए था।
ब्रांच मैनेजर दीपक उपाध्याय ने भी ठगी के पैसों से इंदौर में महंगे गैजेट्स और कपड़े खरीदे। दोनों आरोपियों ने फर्जी कार्यालयों को आधुनिक उपकरणों से सजाया ताकि निवेशकों को विश्वास हो कि यह एक वैध कंपनी है। पुलिस ने अनूपपुर कार्यालय से 5 लैपटॉप, 2 प्रिंटर, स्मार्टफोन और फर्जी दस्तावेज जब्त किए, जिनमें IDCS बैंक ऑफ मॉरीशस के लोगो वाले सर्टिफिकेट और लेटरहेड शामिल हैं।
MP News: पुलिस की कार्रवाई: गिरफ्तारी और खाते सीज
अनूपपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) मोती उर रहमान के निर्देश पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। शनिवार को योगेश श्रीवास को अनूपपुर और दीपक उपाध्याय को इंदौर से गिरफ्तार किया गया। रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में SP रहमान ने बताया, "यह एक संगठित अपराध था, जिसमें आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से लोगों का भरोसा जीता और उनकी जमा-पूंजी लूट ली। हमने सभी कार्यालयों को सील कर दिया और आरोपियों के बैंक खाते सीज कर दिए हैं।"
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी), 406 (आपराधिक विश्वासघात), और 120B (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया है। जांच में पता चला कि अनूपपुर में डॉक्टर रत्ना परस्ते, आकांक्षा पांडेय, अजय गुप्ता और अन्य लोगों ने लाखों रुपये की FD कराई थी। इसके अलावा, आरोपियों ने कई युवाओं को नौकरी का झांसा देकर उनसे भी पैसे ऐंठे।
कैसे बिछाया ठगी का जाल?
फर्जी कार्यालय: पांच जिलों में किराए के दफ्तर खोले गए, जो आधुनिक फर्नीचर और उपकरणों से सुसज्जित थे। कर्मचारियों को प्रोफेशनल ड्रेस कोड में रखा गया।
व्हाट्सएप और कॉलिंग: निवेशकों को व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा जाता था, जहां फर्जी रिटर्न के स्क्रीनशॉट और टेस्टीमोनियल शेयर किए जाते थे। कॉल के जरिए 6% मासिक ब्याज का लालच दिया जाता था।
फर्जी दस्तावेज: IDCS बैंक ऑफ मॉरीशस के फर्जी सर्टिफिकेट, लेटरहेड और स्टांप का इस्तेमाल कर निवेशकों को भरोसा दिलाया जाता था।
शुरुआती भुगतान: कुछ निवेशकों को शुरुआती महीनों में ब्याज देकर भरोसा जीता जाता था, जिससे वे और लोगों को कंपनी से जोड़ते थे।
पोंजी स्कीम: नए निवेशकों के पैसों से पुराने निवेशकों को ब्याज दिया जाता था, जो एक क्लासिक पोंजी स्कीम का मॉडल है।
पीड़ितों की आपबीती
अनूपपुर के डॉक्टर रत्ना परस्ते ने बताया, "मुझे विश्वास था कि यह एक वैध कंपनी है। मैंने 5 लाख रुपये की FD कराई थी, लेकिन 3 महीने बाद न ब्याज मिला और न ही मेरा पैसा लौटाया गया।" इसी तरह, इंदौर के अजय गुप्ता ने कहा, "मैंने अपने रिटायरमेंट के पैसों में से 3 लाख रुपये निवेश किए थे। यह मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती थी।"
डिंडौरी की आकांक्षा पांडेय ने बताया कि उन्हें नौकरी का ऑफर देकर 50,000 रुपये की 'सिक्योरिटी डिपॉजिट' ली गई, लेकिन नौकरी नहीं दी गई। पीड़ितों में ज्यादातर मध्यमवर्गीय लोग, रिटायर्ड कर्मचारी और छोटे व्यवसायी शामिल हैं, जिन्हें ऊंचे रिटर्न का लालच दिया गया।
अनूपपुर पुलिस के सामने कई चुनौतियां हैं:
- अन्य संलिप्त लोग: पुलिस को शक है कि इस गैंग में और लोग शामिल हो सकते हैं। योगेश और दीपक से पूछताछ में अन्य कर्मचारियों और सहयोगियों के नाम सामने आए हैं।
- पैसों का हिसाब: ठगी के डेढ़ करोड़ रुपये में से बड़ा हिस्सा खर्च या हवाला के जरिए ट्रांसफर किया जा चुका है। पुलिस इसे रिकवर करने की कोशिश कर रही है।
- अंतरजिला जांच: पांच जिलों में फैले इस नेटवर्क की जांच के लिए इंदौर, मंडला, डिंडौरी और बालाघाट पुलिस के साथ समन्वय जरूरी है।
- जागरूकता: पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे ऊंचे रिटर्न के वादों पर भरोसा न करें और किसी भी कंपनी में निवेश से पहले उसकी वैधता जांच लें।
- SP मोती उर रहमान ने कहा, "हमारी प्राथमिकता पीड़ितों को उनका पैसा वापस दिलाना है। आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी, और हम इस तरह के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाएंगे।"
मध्य प्रदेश में साइबर ठगी का बढ़ता खतरा
- नवंबर 2024: इंदौर क्राइम ब्रांच ने USB सिक्योरिटी नाम की फर्जी कंपनी के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिन्होंने 11 राज्यों में 28 लोगों से 6.5 करोड़ रुपये ठगे।
- जनवरी 2025: इंदौर के एक डॉक्टर से शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर 3 करोड़ रुपये की ठगी।
- मार्च 2020: इंदौर में सेबी से पंजीकृत न होने वाली एडवाइजरी कंपनियों के खिलाफ 6800 शिकायतें दर्ज, जिनमें से 85% इंदौर की थीं।
- इंदौर, जो मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी है, ठगी की इन वारदातों का केंद्र बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सेबी और RBI की ओर से सख्त निगरानी और जागरूकता की कमी इसकी बड़ी वजह है।
IDCS इंडिया का यह फर्जीवाड़ा कई सवाल खड़े करता है:
- निगरानी की कमी: इतने बड़े पैमाने पर फर्जी कंपनी कैसे बिना किसी चेक के कार्यालय खोल सकी?
- जागरूकता: क्या लोग ऊंचे रिटर्न के लालच में बिना जांच के निवेश करते हैं?
- पुलिस की तैयारी: साइबर और वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए पुलिस कितनी तैयार है?
- कानूनी कार्रवाई: क्या आरोपियों को सजा और पीड़ितों को उनका पैसा वापस मिलेगा?












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