संकल्‍प मोटर साइकल से पहुंचे “उमलिंग ला”, धरती पर देख आए "स्‍वर्ग"

सागर, 14 जुलाई। लेह-लद्दाख दुन‍िया की उन चुन‍िंदा खूबसूरत और दुर्गम जगहों में शुमार है, जहां इंसान बार-बार जाना और रहना चाहता है। दुन‍िया की सबसे ऊंची सड़क भी यहीं पर है। सागर के संकल्‍प बेलापुरकर ने इंटरनेट की दुन‍िया पर धरती का स्‍वर्ग खंगाला था। स्‍वर्ग के साक्षात्‍कार करने और नजदीक से न‍िहारने के जुनून ने उन्‍हें लद्दाख में बनी दुन‍िया की सबसे ऊंची सड़क उमल‍िंग ला दर्रा तक पहुंचा द‍िया। संकल्‍प यू-ट्यूबर्स हैं, उन्‍होंने अपना यू-ट्यूब संकल्‍प ब्‍लॉग्‍स नाम से बना रखा है। सफर के दौरान हेलमेट में लगे कैमरे से वे लाइव नजारों का दीदार कराते रहे।

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'दर्रा' स‍िर्फ नाम सुना था, जब पहुंचे तो समझ आया क‍ितना खरनाक है

'दर्रा' स‍िर्फ नाम सुना था, जब पहुंचे तो समझ आया क‍ितना खरनाक है

सागर के संकल्‍प व‍िकास बेलापुरकर को एडवेंचर का शौक है, दुन‍िया के खूबसूरत नजारों को वे अपनी आंखों और जेहन में कैद करना चाहते हैं। बीकाम एलएलबी कर चुके 27 साल के संकल्‍प ने बीते डेढ़ महीने में सागर से लेह-लद्दाक तक की दूरी नाप डाली। बतौर संकल्‍प बीता डेढ़ महीना उनके जीवन का अकल्‍पनीय और अद्भुत, रोमांच से भरा रहा। वाकई धरती का स्‍वर्ग देखकर लौटा हूं। ज‍िंदगी में एक बार इंसान को मनाली से होते हुए उमल‍िंग ला अर्थात धरती की सबसे ऊंची सड़क पर चलकर आना चाह‍िए। करीब 6 हजार क‍िलोमीटर का सफर सवा महीने में पूरा कर ल‍िया है।

हनले में इस मशीन से आसमानी दुन‍िया नजदीक‍ द‍िखती है

हनले में इस मशीन से आसमानी दुन‍िया नजदीक‍ द‍िखती है

संकल्‍प लद्दाक के हनले पहुंचे तो पता चला क‍ि यहां पर दुन‍िया का सबसे ऊंचा टेलीस्‍कोप MACE 2020 लगा है। यह भारत सरकार का उपक्रम है ज‍िसे गामा-रे टेल‍िस्‍कोप कहा जाता है। रात के समय धरती से आकाश की तरफ देखने पर व‍िशालकाय स‍ितारों की दुन‍िया के सबसे नजदीक से दर्शन होते हैं।

लद्दाख के हनले में भारतीय वेधशाला

लद्दाख के हनले में भारतीय वेधशाला

लद्दाख के हनले में भारत की सबसे ज्‍यादा ऊंचाई पर भारतीय वेधशाला स्‍थ‍ित है। इसके माध्‍यम से भारत आंतर‍िक्ष की दुन‍िया पर नजर रखता है। यहां से स‍ितारों की दुन‍िया की खोज भी की जाती है। कहते हैं यहां से चांद-स‍ितारों की दुन‍िया काफी नजदीक है।

पांगोंग झील, दुन‍िया की तीसरी सबसे बड़ी झील

पांगोंग झील, दुन‍िया की तीसरी सबसे बड़ी झील

संकल्‍प जब यहां लद्दाख में दाख‍िल हुए तो वे यहां पर पांगोंग झील पहुंचे। यह झील दुन‍िया की सबसे गहरी और सबसे बड़ी झील में शुमार है। र‍िकॉर्ड के अनुसार दुन‍िया की सबसे बड़ी और गहरी झील में पांगोंग झील का तीसरा नंबर है। यह भारत से चाइना तक फैली है। इसमें आर्मी की मोटरबोट चलती हैं। भारत के पास करीब 45 क‍िलोमीटर झील का इलाका है। करीब 170 क‍िलोमीटर झील का इलाका चीन में है।

नुब्रा घाटी, जहां प्राकृत‍िक नजारे सम्‍मोह‍ित कर लेते हैं

नुब्रा घाटी, जहां प्राकृत‍िक नजारे सम्‍मोह‍ित कर लेते हैं

संकल्‍प बताते हैं कि सफर के दौरान उन्‍हें प्राकृति‍ की अद्भुत कलाकृत‍ि नुब्रा घाटी को ब‍िल्‍कुल नजदीक से न‍िहारने का क‍िस्‍मत से ही मौका म‍िला। एक तरफ पहाड, तलहटी में दर्रे, मैदानी इलाका, कल कल बहती नदी, ऊंटों का बसेरा... और भी बहुत कुछ ऐसा ज‍िसे शब्‍दों में बयां नहीं क‍िया जा सकता। नुब्रा घाटी में ऐसा प्रतीत होता है, जैसे अलौक‍िक दुन‍िया में प्रवेश कर ल‍िया हो।

जंसकार में स‍िंंकूला अर्थात मौत का रोड

जंसकार में स‍िंंकूला अर्थात मौत का रोड

संकल्‍प को सफर के दौरान पहाडी और दुर्गम रास्‍तों से तो जाना ही पडा। यहां सबसे खतरनाक मार्ग जंसकार स‍िंकूला है। स्‍थानीय भाषा में इसे मौत का रोड कहा जाता है। दरअसल यह बर्फीली पहाड‍ियों के बीच का कच्‍चा रास्‍ता है, ज‍िसके एक तरफ गहरी खाई है। बार‍िश के दौरान म‍िट्टी की सडक वाहनों के ल‍िए जानलेवा बन जाती है।

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