Central University से हटाए कर्मचारियों को 5 साल बाद कोर्ट से राहत, प्रशासन को माना दोषी
Central University देश की प्रतिष्ठित व पुरानी यूनिवर्सिटी में शामिल मप्र के डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय से करीब 5 साल पहले नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों को जबलपुर श्रम न्यायालय ने राहत देते हुए उन्हें नौकरी पर वापस रखने का फैसला दिया है। विवि ने इन्हें आउटसोर्स कर्मचारी बताकर बाहर कर दिया था, जबकि कोर्ट में विवि एक भी ऐसा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाया जिसमें इनको आउटसोर्स कर्मचारी सिद्ध किया जा सके। कोर्ट ने विवि प्रशासन को भी इस मामले में दोषी माना है।

जबलपुर स्थित केंद्रीय श्रम न्यायालय ने डॉ. हरीसिंह गौर विवि से हटाए गए 17 कर्मचारियों को राहत देते हुए उनके पक्ष में फैसला सुनाया है इसमें विवि प्रशासन को श्रम अधिनियम क धारा 33 की उप धाराओं के उल्लंघन का भी दोषी माना है। कोर्ट में दायर प्रकरण के अनुसार साल 2017 में विवि में नौकरी कर रहे 17 कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया था। मामले में तत्कालीन कुलसचिव कर्नल राकेश मोहन जोशी को नोटिस जारी किया था, लेकिन विवि प्रशासन ने नोटिस को अनदेखा कर दिया और कर्मचारियों को आउटसोर्स कर्मचारी बताकर संबंधित विभागों को पत्र लिखकर सेवाएं समाप्त कर दी थीं।
पांच साल चला संघर्ष, आखिर मिला न्याय
पांच साल तक विवि कर्मचारियों ने न्याय की आस नहीं छोड़ी और सुनवाई के दौरान लगातार उपस्थित होकर अपना पक्ष और दस्तावेज प्रस्तुत करते रहे। कोर्ट में इनके दस्तावेजों से सिद्ध हुआ कि इनकी नियुक्ति विवि की सक्षम प्रशासनिक स्वीकृति से हुई थी। इनके हर महीने के वेतन का भुगतान इनके खातों में विवि द्वारा किया जाता रहा है। विवि कोई भी ऐसा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाया जिसमें इन्हें आउटसोर्स कर्मचारी सिद्ध किया जा सके।












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