अभिनेता आशुतोष राणा का देशी अंदाज, खटिया पर बैठ, बुंदेली में बतियाये, संस्मरण सुनाए

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actor
ashutosh
rana
सागर
में
अलग
ही
अंदाज
में
नजर
आए।
कुर्ता-पायजामा,
जैकेट
और
साफा
पहने
खटिया
पर
बैठकर
संवाद
किया।
उन्होंने
अपने
छात्र
जीवन
से
जुड़े
संस्मरण
सुनाए।
ये
यहां
ठेठ
बुंदेलखंडी
में
बात
करते
नजर
आए।
दरअसल
सागर
डॉ.
हरीसिंह
गौर
विवि
के
संस्थापक
महान
दानवीर
डॉ.
गौर
की
जयंती
सागर
गौरव
महोत्सव
के
तहत
अभिनेता
राणा
विद्यार्थी
संवाद
में
शिरकत
करने
आए
थे।
बता
दें
कि
वे
राणा
ने
सागर
विवि
से
ही
पढ़ाई
की
है।
वे
यहां
के
हॉस्टल
में
रहे
हैं।
उनकी
दीक्षा
आध्यात्मिक
गुरु
भी
सागर
में
ही
मिले
थे।

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      आशुतोष राणा ने खटिया पर बैठकर, बुंदेली अंदाज में किया संवाद
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      आशुतोष के संवाद के लिए चौपाल सजाई गई थी

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      फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा सागर में अलग ही अंदाज में नजर आए। कुर्ता-पायजामा, जैकेट और साफा पहने खटिया पर बैठकर संवाद किया। उन्होंने अपने छात्र जीवन से जुड़े संस्मरण सुनाए। ये यहां ठेठ बुंदेलखंडी में बात करते नजर आए। दरअसल सागर डॉ. हरीसिंह गौर विवि के संस्थापक व महान दानवीर डॉ. गौर की जयंती व सागर गौरव महोत्सव के तहत अभिनेता राणा विद्यार्थी संवाद में शिरकत करने आए थे। बता दें कि वे राणा ने सागर विवि से ही पढ़ाई की है। वे यहां के हॉस्टल में रहे हैं। उनकी दीक्षा व आध्यात्मिक गुरु भी सागर में ही मिले थे।

      सागर विवि में पढ़े हैं आशुतोष राणा, यहीं आध्यात्मिक गुरु मिले

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      महान दानवीर, विधिवेत्ता, सर, डॉ. हरीसिंह गौर की 152 वीं जयंती को सागर में गौरव महोत्सव के रुप में मनाया जा रहा हैं। 26 नवंबर को मुख्य कार्यक्रम होने है। गुरुवार को विवि के स्वर्ण जयंती सभागार में सागर विवि के छात्र रहे व फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा से विद्यार्थियों का सीधा संवाद कार्यक्रम रखा गया था। मंच को बुंदेली अंदाज में सजाया गया था। यहां निबार बुनी खटिया पर बैठक व्यवस्था, लकड़ी के पुरातन स्टाइल के स्टूल, बुंदेली संस्कृति की सजावट की गई थी। मंच पर कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता, आशुतोष राणा, वरिष्ठ पत्रकार मनोज शर्मा, कलेक्टर दीपक आर्य, एसपी तरुण नायक तमाम अतिथि और अधिकारी खटिया पर बैठकर संवाद करते नजर आए।

      बुंदेली संवाद से छात्रों से सीधा जुड़ाव किया, हॉस्टल लाइफ के किस्से सुनाए

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      आशुतोष राणा करीब 7 साल सागर विवि के हॉस्टल में रहकर पढ़े हैं। उस दौर के किस्से, संस्मण और रोचक बातों को उन्होंने मंच से बुंदेली अंदाज में साझा किया। वे कभी खड़े होकर बोलते तो कभी बुंदेली अंदाज में पालथी लगाकर खटिया पर बैठ जाते। उनके सहपाठी पत्रकार मनोज शर्मा ने उनकी हॉस्टल लाइफ के किस्से साझा किए।

      मैं अगर सागर न आता, तो आशुतोष राणा जो है वो न होता

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      आशुतोष राणा ने बताया कि वे गाडरवारा जिले के रहने वाले हैं। पढ़ाई के लिए वे सागर आए थे। जहां उन्हें डॉ. गौर की पूंजी से निर्मित इस विशाल शिक्षा के मंदिर में अध्ययन का अवसर मिला। यदि में सागर न आता तो मुझे मेरे आध्यात्मिक गुरु दद्दाजी नहीं मिल पाते। इन दोंनों ने मेरा जीवन बदल दिया और मैं आज जो कुछ भी हूं, डॉ. गौर विवि और अपने गुरुजी के कारण हूं।

      शिव तांडव, रश्मिरथी की पंक्तियां भी सुनाई

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      आशुतोष राणा ने विद्यार्थियों के आग्रह पर रश्मिरथी की पंक्तिया, शिव तांडव, प्रिय तुम, बचपन याद आता है एवं मां पर आधारित कविता सुनाई। उन्होंने अपनी पुस्तक से व्यंग्य मनोविज्ञान के क्रांतिकारी सूत्र का भी पाठ किया। उन्होंने विद्यार्थियों के सवाल जैसे निरंतर प्रयास करने के बावज़ूद सफलता न मिलना। आध्यात्मिकत चिंतन को कैसे बढ़ाएं आदि गहन प्रश्नों के भी सरलता से उत्तर दिया एवं कहा कि असफलता जैसी कोई चीज़ नहीं होती, हमें बस इच्छित फल प्राप्त नहीं होता है, नियति को स्वीकारते हुए हमें प्रकृति पर भरोसा करना चाहिए कि इससे कुछ और बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि असल सुख लक्ष्य की प्राप्ति हेतु जो प्रक्रिया है, उसी में होता है क्योंकि लक्ष्य प्राप्ति के बाद हम फिर कोई दूसरा लक्ष्य निर्धारित कर लेते हैं।

      सागर विवि में एनएसडी जैसा संस्थान बने

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      उन्होंने कुलपति से अनुरोध करते हुए सुझाव दिया की सागर विवि में एनएसडी जैसा संस्थान फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टिट्यूट स्थापित हो। उन्होंने कहा कि इस विवि से निकला हुआ हर विद्यार्थी क्षमता एवं दक्षता के साथ निकले जो स्वयं में एक विवि का प्रतिनिधित्व बने।

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