मनोज परमार के सुसाइड मामले पर विजयवर्गीय और मीनाक्षी नटराजन की प्रतिक्रियाएं: आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी
आष्टा के कारोबारी मनोज परमार और उनकी पत्नी नेहा परमार के सुसाइड मामले ने मध्य प्रदेश की राजनीति में भूचाल मचा दिया है। जहां कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि भाजपा ने मनोज परमार पर पार्टी जॉइन करने का दबाव डाला था, वहीं भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह से बेबुनियाद बताया है। इस मामले में दोनों दलों के नेताओं के बयान स्थिति को और जटिल बना रहे हैं।
कैलाश विजयवर्गीय का बयान
कांग्रेस द्वारा भाजपा पर यह आरोप लगाने के बाद कि पार्टी ने मनोज परमार पर दबाव डाला था, भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जबलपुर में अपनी प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा, "आज की तारीख में हम मनोज परमार जैसे लोगों को बीजेपी में लाकर पार्टी की प्रतिष्ठा कम नहीं करना चाहते। ये बेबुनियाद आरोप हैं। हम अच्छे लोगों को बीजेपी में आमंत्रित करते हैं।" विजयवर्गीय का यह बयान कांग्रेस के आरोपों को सिरे से नकारते हुए भाजपा की स्थिति को स्पष्ट करने की कोशिश करता है।
उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह राजनीतिक लाभ उठाने के लिए इस संवेदनशील मामले का गलत इस्तेमाल कर रही है। भाजपा के नेता का कहना था कि पार्टी हमेशा अच्छे और ईमानदार लोगों को अपने साथ जोड़ने का प्रयास करती है, और यह आरोप पूरी तरह से निराधार है। विजयवर्गीय ने मामले की गंभीरता को कम करने का प्रयास किया और इस पर किसी भी प्रकार की राजनीति को न करने की बात कही।
कांग्रेस की पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन का बयान
वहीं, कांग्रेस की पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन ने इस मामले में चिंता व्यक्त की और कहा कि जो कुछ भी सामने आया है, वह अत्यंत दुखद है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में स्वायत्तशासी संस्थाओं का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया और मनोज परमार को एक राजनीतिक दल जॉइन करने का दबाव डाला गया। नटराजन ने कहा, "पिछले समय में जिस तरह से स्वायत्तशासी संस्थाओं को टूल के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है, वह भी सामने आया है। धमकी दी जाती है कि एक दल जॉइन कीजिए, विपक्ष के नेता राहुल गांधी प्रधानमंत्री भी हो जाएंगे तो उनकी धाराएं कम नहीं होंगी। इस तरह की धमकी भरी बातों ने कई सवाल खड़े किए हैं।"
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि इस मामले में मनोज परमार के साथ जो हुआ, वह भारतीय राजनीति के इतिहास में पहली बार देखा गया है। उनका कहना था कि सुसाइड नोट में जो बातें सामने आई हैं, वे मानसिक और शारीरिक यातनाओं को दर्शाती हैं। नटराजन ने आरोप लगाया कि भाजपा के दबाव में राजनीति से प्रेरित आरोपों और धमकियों ने मनोज परमार की मानसिक स्थिति को प्रभावित किया, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने यह खौफनाक कदम उठाया।
राहुल गांधी का रुख
कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी से उम्मीद जताई जा रही है कि वे इस मामले में कुछ ठोस कदम उठाएंगे, जैसा कि उन्होंने पहले हाथरस और निर्भया मामलों में किया था। नटराजन ने कहा, "मुझे भरोसा है कि जिस तरह से राहुल गांधी ने हाथरस और निर्भया जैसी घटनाओं में सहयोग की भावना रखी है, उसी तरह वे आष्टा की घटना में भी ध्यान देंगे। राहुल गांधी आज शाम तक इस मामले में कुछ फैसला कर सकते हैं।"
इस तरह, मीनाक्षी नटराजन ने इस घटनाक्रम को सिर्फ एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति और सत्ता के गलत इस्तेमाल का उदाहरण बताया। उनका कहना था कि अगर इस मामले की गहन जांच नहीं की गई, तो यह संदेश जाएगा कि राजनीतिक दबाव और धमकियों का उपयोग केवल सत्ता में बैठे लोग करते हैं, जो लोकतंत्र और न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।












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