'कागजी सरकार ने कागजों का पेट भरा...,' बजट पर जीतू पटवारी का तीखा प्रहार

मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान बजट पेश किया है, जहां मोहन सरकार के बजट पर पीसीसी जीतू पटवारी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। इस दौरान जीतू पटवारी ने मोहन सरकार पर जमकर निशाना साधा है।

मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने विधानसभा के बजट सत्र में बजट पेश किया है, जहां मोहन सरकार की ओर से बजट पेश करने के बाद अब पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने सरकार पर निशाना साधा है।

Bhopal

पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा की, कर्ज लेकर कागज में विकास दिखाने वाली कागजी सरकार ने आज फिर कागजों का पेट भरा और कागजों में ही जनता को नाउम्मीद करने वाला बजट पेश किया!, गांव, गरीब, किसान और महिलाएं भाजपा को भरपूर वोट देने के बाद भी निराश हैं! गांव-गांव से लाड़ली बहन पूछ रही है कि ₹3000 का प्रावधान क्यों नहीं किया? वोट लेकर भूल जाने वाले कैसे सरकार में बने हुए हैं? गेहूं और धान पैदा करने वाला किसान फिर निराशा और हैरानी के साथ जानना चाहता है कि वोट लेकर धोखा देने की भाजपाई फितरत कब खत्म होगी? घोषित समर्थन मूल्य कब मिलेगा?

पटवारी ने लिखा की, BJP4MP सरकार पुलिस महकमे में 7500 पदों पर भर्ती को अपनी बजट उपलब्धि बता रही है! जबकि मप्र में कानून व्यवस्था की बदहाली, दलित और आदिवासी उत्पीड़न के साथ महिलाओं से जुड़े अपराध रोकने के लिए यह संख्या अपर्याप्त है! सरकार कह रही है कि मध्यप्रदेश में सरकारी सेवाओं में भर्ती के लिए होने वाली परीक्षाओं की फीस को कम करेंगे! बेहतर होता सरकार भर्ती परीक्षा के घोटाले और पेपर लीक को रोकने के लिए कोई कठोर व्यवस्था सुनिश्चित करती!

पटवारी ने लिखा की, पीएम आवास योजना के लिए 4 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान करने के बाद वित्त मंत्री खुद ही अपनी पीठ ठोक रहे हैं! सच्चाई यह है कि मध्य प्रदेश में पीएम आवास घटिया निर्माण और वितरण की सर्वाधिक गड़बड़ी का शिकार हैं!, सरकार का बजट बता रहा है कि पीएम ई-बस योजना के तहत मप्र के छह शहरों में 552 ई बसें चलाई जाएंगी! बेहतर होगा सरकार शहरी सड़कों का जायजा ले! बसों को चलाने से पहले बड़े शहरों में रोजाना लगने वाले जाम से मुक्ति और बेहतर सड़क के प्रबंध भी कर लिए जाएं!महिला स्व-सहायता समूहों को बड़े बाजारों से जोड़ने के लिए 800 करोड़ रुपए का प्रावधान करने वाली सरकार यह क्यों भूल रही है कि उसे लाड़ली बहना योजना के तहत दी जाने वाली राशि को बढ़ाना है! क्या सिर्फ 800 करोड़ में प्रदेश की बहनों का भला हो सकता है?

मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान बजट पेश किया है, जहां मोहन सरकार के बजट पर पीसीसी जीतू पटवारी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। इस दौरान जीतू पटवारी ने मोहन सरकार पर जमकर निशाना साधा है।

मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने विधानसभा के बजट सत्र में बजट पेश किया है, जहां मोहन सरकार की ओर से बजट पेश करने के बाद अब पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने सरकार पर निशाना साधा है।

पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा की, कर्ज लेकर कागज में विकास दिखाने वाली कागजी सरकार ने आज फिर कागजों का पेट भरा और कागजों में ही जनता को नाउम्मीद करने वाला बजट पेश किया!, गांव, गरीब, किसान और महिलाएं भाजपा को भरपूर वोट देने के बाद भी निराश हैं! गांव-गांव से लाड़ली बहन पूछ रही है कि ₹3000 का प्रावधान क्यों नहीं किया? वोट लेकर भूल जाने वाले कैसे सरकार में बने हुए हैं? गेहूं और धान पैदा करने वाला किसान फिर निराशा और हैरानी के साथ जानना चाहता है कि वोट लेकर धोखा देने की भाजपाई फितरत कब खत्म होगी? घोषित समर्थन मूल्य कब मिलेगा?

पटवारी ने लिखा की, BJP4MP सरकार पुलिस महकमे में 7500 पदों पर भर्ती को अपनी बजट उपलब्धि बता रही है! जबकि मप्र में कानून व्यवस्था की बदहाली, दलित और आदिवासी उत्पीड़न के साथ महिलाओं से जुड़े अपराध रोकने के लिए यह संख्या अपर्याप्त है! सरकार कह रही है कि मध्यप्रदेश में सरकारी सेवाओं में भर्ती के लिए होने वाली परीक्षाओं की फीस को कम करेंगे! बेहतर होता सरकार भर्ती परीक्षा के घोटाले और पेपर लीक को रोकने के लिए कोई कठोर व्यवस्था सुनिश्चित करती!

पटवारी ने लिखा की, पीएम आवास योजना के लिए 4 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान करने के बाद वित्त मंत्री खुद ही अपनी पीठ ठोक रहे हैं! सच्चाई यह है कि मध्य प्रदेश में पीएम आवास घटिया निर्माण और वितरण की सर्वाधिक गड़बड़ी का शिकार हैं!, सरकार का बजट बता रहा है कि पीएम ई-बस योजना के तहत मप्र के छह शहरों में 552 ई बसें चलाई जाएंगी! बेहतर होगा सरकार शहरी सड़कों का जायजा ले! बसों को चलाने से पहले बड़े शहरों में रोजाना लगने वाले जाम से मुक्ति और बेहतर सड़क के प्रबंध भी कर लिए जाएं!महिला स्व-सहायता समूहों को बड़े बाजारों से जोड़ने के लिए 800 करोड़ रुपए का प्रावधान करने वाली सरकार यह क्यों भूल रही है कि उसे लाड़ली बहना योजना के तहत दी जाने वाली राशि को बढ़ाना है! क्या सिर्फ 800 करोड़ में प्रदेश की बहनों का भला हो सकता है?

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