हीरा नगरी पन्ना में 'डायमंड' की चमक फीकी, बार-बार नीलामी के बाद भी नहीं मिल रहे खरीददार
पन्ना में हीरा नीलामी में तीन बार से रखे जा रहे बड़े हीरों को खरीददार नहीं मिल सके। 14 कैरेट से अधिक का हीरा तीसरी दफा भी नीलाम नहीं हो सका। जिन मजदूरों को यह हीरे मिले थे, वे करीब 8 महीने से परेशान हो रहे हैं।

Diamond City पन्ना की धरती के गर्भ से निकलने वाले हीरों को करीब एक साल से सही कद्रदान नहीं मिल पा रहे हैं। पिछली तीन दफा से नीलामी में रखे जा रहे बड़े और वजनी हीरों की नीलामी नहीं हो पा रही है। जिला प्रशासन ने मंगलवार से हीरा नीलामी की प्रक्रिया प्रारंभ की है, जिसमें 4 करोड़ 13 लाख रुपए कीमत के 218 हीरे नीलामी के लिए रखे गए हैं, जिनमें से दो दिन में महज 37 हीरे ही नीलाम हो सके।

देश-दुनिया में हीरों के लिए प्रसिद्ध पन्ना की धरती को चमत्कारिक धरती कहा जाता है। यहां एक रात में लोग लखपति बन जाते हैं। उथली खदानों से सैकड़ों मजदूरों और गरीबों को हीरे देकर लखपति बनाया है। कई तो रातों-रात करोड़पति तक बन चुके हैं। जमीन से निकलने वाले बेशकीमती को हीरा कार्यालय में जमा कराया जाता है, जहां से प्रत्येक चार महीने में देश-प्रदेश के जौहरी, डायमंड व्यापारियों को आमंत्रित कर हीरों की नीलामी कराई जाती है। लेकिन बीते 8 महीने में तीन बार आयोजित हुई नीलामी में प्रशासन द्वारा रखे गए हीरों को खरीददार ही नहीं मिल पा रहे हैं। हाल-फिलहाल में भी चल रही नीलामी में दो दिन में महज 37 हीरे ही नीलाम हो सके हैं। कुल 372.66 कैरेट के 218 नग हीरे रखे गए हैं।
14.88 कैरेट का सबसे बड़ा हीरा, तीन बार से रख रहे
हीरों की नीलामी के लिए जो 218 नग डायमंड रखे गए हैं, उनमें सबसे बड़ा हीरा 14.88 कैरेट वजन का है। इसकी अनुमानित कीमत 70 लाख के आसपास बताई जा रही है। इसके अलावा 9.64 कैरेट, 6.44 कैरेट, 6.29कैरेट, 5.70 कैरेट के बड़े हीरे भी शामिल हैं। सबसे चिंता का विषय तीन बार से नीलामी में रखे जा रहे बड़े हीरों को खरीददार नहीं मिले। इस बार फिर ऐसा ही मामला नजर आ रहा है। इधर पहले दिन की नीलामी में 13 हीरे तो दूसरे दिन 24 हीरे ही नीलाम हो सके हैं। इनकी कुल बोली 46 लाख 42 हजार 683 रुपए लगी है।
मॉर्केट में मंदी का बता रहे असर, रिवाइज्ड होगी हीरों की कीमत
जिला प्रशासन द्वारा दो दिन की हीरा नीलामी के संबंध में दी गई जानकारी अनुसार हीरों की बोली न लगने का कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव और मंदी का दौर रहा है। बड़े व्यापारी पैसा फंसाना नहीं चाहते। दूसरी तरफ हीरा कार्यालय के अधिकारियों के अनुसार हीरों की गुणवत्ता को लेकर भी व्यापारियों ने तर्क दिए हैं। फिलहाल हीरों की जो बोली प्रशासन ने तय की है, उसमें वे नीलाम नहीं हो रहे, इसलिए एनएमडीसी हीरा खनन परियोजना से पारखी को बुलाकर एक बार फिर से हीरों की गुणवत्ता की जांच कराएंगे।












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