OPINION: सरकारी कर्मचारियों के लिए एमपी सरकार की संवेदनशील पहल
MP News: मध्य प्रदेश के 7 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों को मोहन यादव सरकार बहुत बड़ा तोहफा देने जा रही है। राज्य सरकार ने प्रदेश के 7 लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों को उन्हें मिलने वाले आवास किराया, परिवहन और मंत्रालय भत्ते बढ़ाने की तैयारी कर ली है। मोहन यादव सरकार की इस पहल से सरकारी कर्मचारियों समेत उनके परिवारों के जीवन में नई खुशियां आने वाली हैं।
मोहन यादव सरकार का यह कदम सरकारी वेतनभोगियों को मिलने वाले भत्तों को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जोड़ने के व्यापक उद्देश्य का हिस्सा है। इससे इन सरकारी कर्मियों और उनके परिवारों के जीवन-यापन का स्तर और बेहतर होने की उम्मीद है। इसके अलावा, जो सरकारी कर्मचारी मंत्रियों के निजी कार्यों में नियुक्त किए गए हैं, उन्हें मिलने वालों भत्तों में भी खास वृद्धि की योजना है।

एमपी के 7 लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी
राज्य सरकार ने लंबे समय के गतिरोध के बाद इस दिशा में कदम बढ़ाया है। इन भत्तों में 12 वर्षों से कोई बदलाव नहीं हुआ है। 2018 में लागू सातवें वेतन आयोग के तहत वेतन समायोजित किए गए, लेकिन भत्ते अपरिवर्तित रहे। अब मोहन यादव सरकार की ओर से पहल की जा रही है, उससे जाहिर होता है कि वह सरकारी कर्मचारियों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को लेकर कितनी सजग और संवेदनशील है।

सरकारी कर्मचारियों के प्रति संवेदनशील है मोहन सरकार
इससे पहले, कर्मचारी संगठनों की ओर से खर्चों और महंगाई में बढ़ोतरी हवाला देते हुए इन भत्तों में बढ़ोतरी की मांग की जा रही थी। एमपी सरकार ने पहले इसकी समीक्षा करवाई, जिसको लेकर इन भत्तों को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जोड़ने की सिफारिश की गई।

भत्तों में बढ़ोतरी से सरकारी कर्मचारियों का बढ़ेगा मनोबल
इससे पहले नई दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरीय क्षेत्रों में तैनात मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के लिए गृह किराया भत्ते की दरें हाल ही में 10% से बढ़ाकर 30% की गई हैं। मध्य प्रदेश में गृह किराया भत्ता (HRA) दरों का अंतिम संशोधन 2012 में हुआ था, जो उस समय राज्य वेतन आयोग की सिफारिशों पर आधारित था।

इन संशोधित दरों का लाभ अखिल भारतीय सेवाओं के कर्मचारियों सहित सभी श्रेणियों के कर्मचारियों को मिलेगा, जो वर्तमान में क्रमशः 46% और 50% की दर से भत्ते प्राप्त कर रहे हैं।

सरकारों की यह जिम्मेदारी है कि वह अपने कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाकर रखे। क्योंकि, अगर एक कल्याणकारी सरकार को जनहित के कार्य करवाने हैं तो उनका माध्यम यही सरकारी कर्मचारी बनते हैं।

अगर उनका मनोबल ऊंचा रहेगा, वे हौसलेमंद रहेंगे तो आखिरकार इसका प्रभाव उनकी कार्य क्षमता और उनकी दक्षता पर पड़ेगा। स्वाभाविक रूप से अगर कर्मचारी खुश रहेंगे तो वह जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभाने में भी जी-जान से जुटने की कोशिश करेंगे।













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