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MP: सतना मेडिकल कॉलेज की मान्यता के लिए 'जुगाड़' से 53 डॉक्टर भेजे, बाकी की मान्यता खतरे में डाली

सागर के बीएमसी सहित प्रदेश के सात मेडिकल कॉलेजों से 53 डॉक्टर्स के तबादलने सतना मेडिकल कॉलेज में किए गए हैं, ताकि उसे नेशनल मेडिकल कमीशन से मान्यता मिल सके। इधर बाकी मेडिकल कॉलेज में नए सिरे डॉक्टरों का संकट खड़ा हो गया।

Sagar BMC

मध्यप्रदेश सरकार सभी जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने की योजना पूरी करने में लगी है। जैसे-तैसे मेडिकल कॉलेज के लिए भवन तो तैयार हो गया, लेकिन फैकल्टी पर अब भी सवाल है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है सतना मेडिकल कॉलेज। जहां कॉलेज की बिल्डिंग बनते ही नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) को मान्यता के लिए आवेदन भेज दिया गया और जैसे ही वहां से निरीक्षण के लिए हरी झंडी मिली तो फैकल्टी को लेकर समस्या खड़ी हो गई। ऐसे में अब सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज समेत प्रदेश के सात मेडिकल कॉलेजों से 53 चिकित्सा शिक्षकों को बुलाया गया है। कॉलेज में पर्याप्त फैकल्टी के जुगाड़ के किस्से अब तक प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में सुनने को मिलते थे, लेकिन इस बार सरकारी मेडिकल कॉलेज में भी जुगाड़ से फैकल्टी की व्यवस्था की जा रही है।

चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से 17 फरवरी को मेडिकल कॉलेजों के डीन को एक पत्र जारी किया गया। इसके माध्यम से इन कॉलेजों में विभिन्न पदों पर तैनात 53 फैकल्टी को आगामी आदेश तक गवर्मेंट मेडिकल कॉलेज सतना में काम करने के लिए आदेशित किया गया है। डीन को यह भी कहा है कि उक्त फैकल्टी को तत्काल प्रभाव से रिलीव कर यह भी सुनिश्चित करें कि सभी फैकल्टी 20 फरवरी की सुबह आठ बजे तक सतना मेडिकल कॉलेज में अपनी उपस्थिति भी दर्ज कराएं। उक्त आदेश के बाद इन मेडिकल कॉलेजों में अफरा-तफरी के हालात बन गए थे। विभागीय सूत्रों की मानें तो अगले हफ्ते न सिर्फ एनएमसी की टीम निरीक्षण करने आ रही है, बल्कि जिम्मेदार कॉलेज का शुभारंभ भी करना चाहते हैं। इसके लिए यह जमावट की जा रही है।

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    बीएमसी में भी फैकल्टी की कमी, लेकिन फिर भी भेजा स्टाफ
    बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा शिक्षा विभाग का पत्र पहुंचते ही चार चिकित्सा शिक्षकों को सतना भेजा गया है। इनमें मेडिसिन विभाग की प्रोफेसर डॉ. ज्योति तिवारी, पैथोलॉजी विभाग से असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नैन्सी मौर्या व एसआर डॉ. प्रकृति राज पटेल और एनाटॉमी विभाग से डॉ. मीनू पुरूषोत्तम को तत्काल प्रभाव से सतना भेजा गया है। जबकि प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेज में पदस्थ मेडिकल टीचर्स की पदस्थापना स्वशासी के तहत संबंधित कॉलेज में ही होती है। ऐसे में इनके एक से दूसरे कॉलेज में ट्रांसफर नहीं किए जाते हैं। यह बात विभाग के अधिकारी भी जानते हैं। यही वजह है कि उन्होंने जारी आदेश में ट्रांसफर और प्रतिनियुक्ति जैसा कुछ भी दर्ज नहीं किया है। हालांकि, जिन मेडिकल फैकल्टी को सतना मेडिकल कॉलेज में ज्वाइन करने के निर्देश दिए गए हैं, उनमें से अधिकांश कोर्ट जाने की तैयारी में जुट गए हैं। इन फैकल्टी की संख्या 54 है, जो कि एमबीबीएस की 100 सीट के हिसाब से पर्याप्त नहीं है। इधर बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज ये डॉक्टर वापस कम आएंगे। जबकि जबलपुर मेडिकल कॉलेज से भी 18 फैकल्टी मांगी गईं थीं, लेकिन उन्होंने कमी बताते हुए फैकल्टी को भेजने से मना कर दिया। यही हाल बीएमसी का भी है, लेकिन फिर भी शासन के आदेश के आगे विद्यार्थियों के भविष्य को दांव पर लगा दिया गया।

    फैकल्टी डिक्लियरेशन फार्म से खुल जाएंगी जुगाड़ की पोल
    मेडिकल टीचर्स का कहना है कि सतना में निरीक्षण के लिए एनएमसी को कम से कम 6 माह पहले आवेदन किया गया होगा। ऐसे में समय रहते प्रबंधन और चिकित्सा शिक्षा विभाग को पद सृजित करने के साथ नियुक्ति करना चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब जब एनएमसी का निरीक्षण आ गया है तो दूसरे मेडिकल कॉलेजों से फैकल्टी बुलाई जा रही है, लेकिन यह नुस्खा कारगर नहीं होगा, क्योंकि निरीक्षण के दौरान हेड काउंट में एनएमसी की टीम द्वारा फैकल्टी डिक्लियरेशन फार्म भराया जाएगा। जिसमें फैकल्टी कहां से एपियर हुई है यह जानकारी भी देना होगी, जिसमें इस जुगाड़ के सिस्टम की पोल खुल जाएगी।

    डीएमई से आदेश आया था, हमने नाम दिए थे
    चिकित्सा शिक्षा संचालनालय से आदेश आया था। उन्होंने जो फैकल्टी मांगी थी, हमने उन्हें रिलीव किया है। यदि हमारे यहां कमी हुई तो चिकित्सकों के पदों पर विज्ञापन जारी कर नियुक्तियां की जाएंगी।
    - डॉ. आरएस वर्मा, डीन बीएमसी

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